Friday, October 30

संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर अदालतें हस्तक्षेप करें: CJI सूर्यकांत

NHRC के स्थापना दिवस पर बोले मुख्य न्यायाधीश—मानवाधिकारों की रक्षा के लिए व्यवस्था की खामियों को पहचानना और कमजोर वर्गों की आवाज सुनना जरूरी

(SDNA) नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि जब नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तब न्यायालयों को हस्तक्षेप करना चाहिए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए न्यायिक संस्थाओं और आयोग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मानवाधिकार केवल कानूनी सिद्धांत नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध व्यक्ति के स्वास्थ्य, भोजन, आवास, आजीविका और स्वच्छ पर्यावरण जैसे बुनियादी अधिकारों से है। उन्होंने मानवाधिकार आयोगों से शिकायतों की जांच करने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों को पहचानने और उन समस्याओं पर ध्यान देने का आह्वान किया, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

33 वर्षों में 24 लाख से अधिक मामले दर्ज

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मुख्य न्यायाधीश ने NHRC के कामकाज का उल्लेख करते हुए बताया कि आयोग ने पिछले 33 वर्षों में 24 लाख से अधिक शिकायतों का पंजीकरण किया है और 23 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया है। उन्होंने नागरिकों की सुविधा के लिए शुरू किए गए ‘NHRC India’ मोबाइल ऐप का भी जिक्र किया, जिसके माध्यम से लोग अपनी शिकायत दर्ज कराने और उसकी स्थिति जानने में आसानी महसूस कर सकेंगे।

कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों पर जोर

CJI सूर्यकांत ने कहा कि मानवाधिकार आयोग की जिम्मेदारी उन लोगों तक पहुंचना भी है, जिन्हें न्यायालयों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आयोग को संविधान के वादों का संरक्षक बताते हुए कहा कि यह उन लोगों की आवाज बन सकता है, जो अपनी समस्याएं प्रभावी ढंग से सामने नहीं रख पाते। आयोग जरूरत पड़ने पर स्वतः संज्ञान लेकर भी कार्रवाई कर सकता है।

उन्होंने हाशिए पर रहने वाले समुदायों, विचाराधीन कैदियों, प्रवासी मजदूरों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा को विशेष महत्व देने की बात कही। उनका संदेश स्पष्ट था कि संविधान की भावना तभी सार्थक होगी, जब प्रत्येक नागरिक को सम्मान, सुरक्षा और न्याय प्राप्त हो तथा अधिकारों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।