Friday, October 30

मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद से आएगा बदलाव, उज्जैन में कैंपस आउटरीच कार्यक्रम आयोजित

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की पहल, मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के अनुभव सुनने और सामाजिक कलंक मिटाने पर दिया जोर

(SDNA) उज्जैन। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश विकलांग सहायता समिति के मनोविकास विशेष शिक्षा महाविद्यालय में आयोजित कैंपस आउटरीच कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य विषय “सुने गए वास्तविक अनुभव : असली आवाज़ें, असली बदलाव” रहा।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज के मार्गदर्शन में पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान के निदेशक एवं डीन प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता तथा प्रबंध अध्ययन मंडल के अध्यक्ष प्रो. डॉ. कामरान सुल्तान ने संस्था का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने संस्था के पदाधिकारियों को अनुग्रह भेंट प्रदान की और फादर जीजो जॉर्ज तथा फादर सेबेस्टियन बड़ेकल के साथ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा की।

कुलगुरु प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज ने अपने शुभकामना संदेश में संस्था के उत्कृष्ट प्रशिक्षण कार्यों की सराहना की। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित निर्णयों में शोध आधारित अनुभवों, नवाचार और व्यावहारिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सकता है।

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संस्था के निदेशक फादर जीजो जॉर्ज, वित्त प्रबंधक फादर सेबेस्टियन बड़ेकल और प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता ने मानसिक स्वास्थ्य को समग्र स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि मानसिक समस्याओं के प्रति समाज में व्याप्त संकोच और भेदभाव को दूर करना तथा जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता लेने के लिए प्रेरित करना बेहद जरूरी है।

वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से गुजर रहे व्यक्तियों की भावनाओं और अनुभवों को संवेदनशीलता के साथ सुनना आवश्यक है। ऐसा करने से उपचार की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है और प्रभावित लोगों को उनकी जरूरत के अनुरूप सहयोग मिल सकता है।

कार्यक्रम ने संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना केवल चिकित्सा विशेषज्ञों का दायित्व नहीं, बल्कि परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थानों की भी साझा जिम्मेदारी है। लोगों की बात सुनना, उनकी भावनाओं को समझना और समय पर सहायता उपलब्ध कराना ही मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव है।