Thursday, October 29

न्यूयॉर्क में दिवाली की सांस्कृतिक छटा के बीच गूंजेगी तबले की थाप, पंडित आदित्य नारायण बनर्जी की विशेष कार्यशाला 7 नवंबर को

तीन दशकों से अधिक के संगीत अनुभव वाले अंतरराष्ट्रीय तबला वादक देंगे प्रशिक्षण; शुरुआती विद्यार्थियों से लेकर उन्नत कलाकारों तक को मिलेगा भारतीय शास्त्रीय ताल परंपरा सीखने का अवसर

(SDNA) वेस्टचेस्टर, न्यूयॉर्क, 17 अक्टूबर 2026। रोशनी, उल्लास और सांस्कृतिक उत्सव का प्रतीक दिवाली इस वर्ष न्यूयॉर्क में भारतीय शास्त्रीय संगीत की मधुर लय के साथ मनाने की तैयारी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले तबला वादक पंडित आदित्य नारायण बनर्जी 7 नवंबर 2026 को एक विशेष तबला कार्यशाला का संचालन करेंगे। इस आयोजन के माध्यम से संगीत प्रेमियों और विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय ताल, तबले की तकनीक तथा लयकारी की बारीकियों को समझने का अवसर मिलेगा।

आयोजकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्यशाला दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक 50 सटन रोड, ब्रायरक्लिफ मैनर, न्यूयॉर्क में आयोजित होगी। कार्यक्रम को शुरुआती विद्यार्थियों, मध्यवर्ती स्तर के शिक्षार्थियों और उन्नत तबला वादकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ ताल संरचनाओं, तकनीकी दक्षता, लय नियंत्रण और भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनुशासित साधना पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

तीन दशकों की साधना और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच

पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर से संबंध रखने वाले पंडित आदित्य नारायण बनर्जी ने तीन दशकों से अधिक समय तबले की साधना और भारतीय ताल परंपरा को आगे बढ़ाने में समर्पित किया है। उनके संगीत सफर में भारत के साथ अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व के विभिन्न मंचों पर प्रस्तुतियां शामिल हैं।

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उन्हें ‘ताल सम्राट’ और ‘ताल रत्न’ जैसी उपाधियों से सम्मानित किए जाने का उल्लेख उनकी उपलब्धियों में किया जाता है। उनकी प्रस्तावित कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल तबला बजाने की तकनीक सिखाना ही नहीं, बल्कि लय, अनुशासन, अभ्यास और संगीत की अभिव्यक्ति के बीच के संबंध को समझने में भी सहायता करना है।

पद्मश्री पंडित स्वपन चौधुरी से जुड़ी संगीत परंपरा

पंडित बनर्जी की संगीत यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष पद्मश्री पंडित स्वपन चौधुरी से उनका जुड़ाव है। पंडित स्वपन चौधुरी तबला वादन के प्रतिष्ठित कलाकार हैं और लखनऊ घराने की परंपरा से जुड़े हुए हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत में घरानों की परंपरा तकनीक, रचनाओं, ताल की प्रस्तुति और गुरु-शिष्य संबंध के माध्यम से संगीत ज्ञान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाती है।

पंडित बनर्जी के प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों को इसी समृद्ध संगीत विरासत के वैश्विक विस्तार के रूप में देखा जा सकता है। उनकी उपलब्धियों के विवरण में अमेरिका के व्हाइट हाउस में प्रस्तुति का उल्लेख भी किया गया है।

शास्त्रीय संगीत से लेकर जैज तक कलाकारों के साथ जुड़ाव

पंडित आदित्य नारायण बनर्जी के संगीत संबंधों का दायरा भारतीय शास्त्रीय, भक्ति, लोकप्रिय और अंतरराष्ट्रीय संगीत परंपराओं तक फैला बताया जाता है। उनके प्रोफाइल में पंडित जसराज, डॉ. बालमुरली कृष्ण, पंडित राजन-साजन मिश्रा, शंकर महादेवन, गुलाम अली, अनूप जलोटा, सुखविंदर सिंह, प्रसिद्ध जैज गिटारवादक लैरी कोरीएल और बांसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार जैसे कलाकारों के साथ सहयोग का उल्लेख है।

तबले की विशेषता इसकी बहुआयामी संगीत क्षमता है। पारंपरिक ताल और शास्त्रीय बंदिशों के साथ यह वाद्य भक्ति संगीत, गायन, जैज और समकालीन संगीत संयोजनों में भी अपनी प्रभावशाली भूमिका निभाता है। लय की सटीकता और तत्काल रचनात्मक अभिव्यक्ति का मेल तबले को वैश्विक संगीत मंचों पर विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।

पुरस्कारों और रिकॉर्ड उपलब्धियों का सफर

पंडित बनर्जी की उपलब्धियों में वर्ष 2007 का राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार तथा वर्ष 2008 में न्यूयॉर्क के शिक्षायतन कल्चरल सेंटर द्वारा प्रदान किया गया ‘ताल मणि’ पुरस्कार शामिल बताए गए हैं। उनके प्रोफाइल में पंडित जसराज संस्थान से संबंधित ‘आचार्य वर’ और ‘आचार्य वरिष्ठ’ उपाधियों तथा ऑल इंडिया जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन, जबलपुर की ओर से ‘ताल सम्राट’ सम्मान का भी उल्लेख है।

उनकी एक अन्य उल्लेखनीय उपलब्धि वर्ष 2013 में 36 घंटे तक लगातार तबला वादन करने की बताई गई है, जिसे उनके प्रोफाइल में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से संबंधित उपलब्धि के रूप में दर्ज किया गया है। इस तरह का प्रदर्शन लंबे समय तक एकाग्रता, शारीरिक सहनशक्ति और संगीत के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की मांग करता है।

शुरुआती विद्यार्थियों से अनुभवी वादकों तक के लिए प्रशिक्षण

7 नवंबर की कार्यशाला में अलग-अलग स्तर के विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण की व्यवस्था प्रस्तावित है।

प्रशिक्षण श्रेणीअवधिशुल्क
शुरुआती विद्यार्थी90 मिनट50 अमेरिकी डॉलर
मध्यवर्ती एवं उन्नत विद्यार्थी2 घंटे60 अमेरिकी डॉलर

प्रशिक्षण में तबले की मूल तकनीक, विभिन्न तालों की संरचना, लयकारी, हाथों के संचालन, वादन में सटीकता और संगीत की अभिव्यक्ति जैसे विषयों पर काम किया जाएगा। नए विद्यार्थी वादन की बुनियादी समझ विकसित कर सकेंगे, जबकि अनुभवी शिक्षार्थियों को अपनी तकनीक और ताल संबंधी समझ को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।

आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम को केवल एक सामान्य संगीत कक्षा के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय ताल परंपरा और उसकी साधना को करीब से समझने के अवसर के रूप में तैयार किया गया है।

दिवाली के अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर

भारतीय शास्त्रीय संगीत पीढ़ियों की साधना, गुरु-शिष्य परंपरा और निरंतर अभ्यास से विकसित हुई जीवंत सांस्कृतिक धरोहर है। तबला इस विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें गणितीय सटीकता, रचनात्मकता, तात्कालिक प्रयोग और भावपूर्ण अभिव्यक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

विदेशों में आयोजित ऐसी कार्यशालाएं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संगीत प्रेमियों को भारतीय कलाओं से परिचित कराने में भी सहायक हो सकती हैं। दिवाली के उत्सवी माहौल में संगीत प्रशिक्षण का यह आयोजन सांस्कृतिक उत्सव और कलात्मक शिक्षा को एक साथ जोड़ने का प्रयास है।

न्यूयॉर्क और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले तबला विद्यार्थियों, संगीत साधकों तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह कार्यक्रम अनुभवी कलाकार के मार्गदर्शन में ताल की परंपरा को समझने का अवसर प्रदान करेगा।

पंजीकरण संबंधी जानकारी: इच्छुक प्रतिभागी पंजीकरण, उपलब्ध सीटों और भागीदारी की अन्य शर्तों के लिए आयोजकों से सीधे संपर्क करें।

(SDNA) — एस. डी. न्यूज़ एजेंसी

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