
क्रमिक अनशन का आठवां दिन; एसआईआर निरस्त करने, मताधिकार की रक्षा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी
(SDNA) उज्जैन, 18 अक्टूबर 2026। लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा की मांग को लेकर उज्जैन के टॉवर चौक स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रतिमा स्थल पर चल रहा सत्याग्रह रविवार को 13वें दिन में पहुंच गया। वहीं, क्रमिक अनशन का आठवां दिन रहा। आंदोलन को समर्थन देने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी सत्याग्रह स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से मुलाकात कर उनकी मांगों और आंदोलन की दिशा पर चर्चा की।
सत्याग्रहियों की प्रमुख मांगों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को निरस्त करना, मतदाताओं के मताधिकार की रक्षा करना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग शामिल है। आंदोलनकारियों का कहना है कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
भगत सिंह, महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के विचारों का साझा मंच
रविवार के क्रमिक अनशन की विशेषता यह रही कि अलग-अलग विचारधाराओं से प्रेरित तीन लोग एक साथ अनशन पर बैठे। इनमें भगत सिंह के विचारों से प्रेरित मनजीत सिंह ठकराल, महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने वाली रेणुका गांधी तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रेरित कमलेश मरमट शामिल रहे।
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सत्याग्रहियों ने इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के साझा संकल्प का प्रतीक बताया। उनका कहना है कि विचारधाराओं में अंतर होने के बावजूद नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के मुद्दे पर एकजुट हुआ जा सकता है।
दिग्विजय सिंह बोले—सत्याग्रह का प्रभाव दिखाई दे रहा है
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सत्याग्रह स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि सत्याग्रह का प्रभाव पड़ता है और इस आंदोलन का असर भी दिखाई दे रहा है। साथ ही उन्होंने आंदोलन को और व्यापक बनाने की जरूरत बताई, ताकि मताधिकार से जुड़े सवाल अधिक लोगों तक पहुंच सकें और इस मुद्दे पर जनसमर्थन बढ़े।
उन्होंने अपने राजनीतिक अभियान ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का उल्लेख करते हुए ज्ञानेश कुमार से संबंधित मुद्दे को भी उठाया। उनके वक्तव्य में राम जन्मभूमि न्यास समिति में ज्ञानेश कुमार की कथित पूर्व भूमिका और इस्तीफे के संदर्भ का उल्लेख किया गया। उन्होंने राम मंदिर में कथित ‘नोट चोरी’ और लोकतंत्र में ‘वोट चोरी’ के मुद्दों को जोड़ते हुए ज्ञानेश कुमार को दोनों संदर्भों में साझा कड़ी बताया। ये आरोप और राजनीतिक टिप्पणियां हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
मताधिकार की रक्षा को बताया लोकतंत्र की बुनियाद
सत्याग्रह में शामिल नागरिकों का कहना है कि प्रत्येक पात्र मतदाता का मताधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठाई जा रही चिंताओं पर संबंधित संस्थाओं को पारदर्शी तरीके से विचार करना चाहिए।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में हैं। उनका उद्देश्य मतदाता सूची और नागरिकों के मतदान अधिकारों से जुड़े सवालों को सार्वजनिक विमर्श में लाना तथा जिम्मेदार संस्थाओं का ध्यान आकर्षित करना है।
बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता
रविवार के सत्याग्रह में राजेंद्र प्रसाद वशिष्ठ, रवि राय, हेमंत सिंह चौहान, विवेक यादव, डॉ. चैनसिंह चौधरी, अनिल, प्रकाश, भवानीदान सिंह, बंजारा किशन चंदेल, बालाराम चंद्रशेखर बैरागी, राजेंद्र सिंह सोलंकी, यूनुस पटेल, जितेंद्र सिंह पंवार, पवन, कैलाशचंद्र, हेमंत कोली, राजेंद्र चंदेल, होकम सिंह, सतीश टटवाल, एडवोकेट प्रकाश चौबे, सीमा पटेल, सुरेंद्र यादव, विकास कपूर, शरीफ खान, मुजीब सुपारी और अमित आजाद सहित अन्य लोग शामिल हुए।
19 अक्टूबर को पत्रकारों से संवाद
सत्याग्रह से जुड़े लोगों के अनुसार, सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को दोपहर 1 बजे सत्याग्रह स्थल पर पत्रकारों से मुलाकात की जाएगी। इस दौरान आंदोलन की वर्तमान स्थिति, प्रमुख मांगों, अब तक की गतिविधियों और आगामी रणनीति पर चर्चा होगी।
आयोजकों ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकारों से निर्धारित समय पर पहुंचने की अपील की है।
स्थान: डॉ. अंबेडकर प्रतिमा स्थल, टॉवर चौक, उज्जैन
पत्रकारों से मुलाकात: 19 अक्टूबर 2026, दोपहर 1 बजे
जारीकर्ता: उज्जैन सत्याग्रह — हम भारत के नागरिक
(SDNA) — राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय डिजिटल समाचार नेटवर्क



