Saturday, October 10

श्राद्ध पक्ष में सेवा और श्रद्धा की मिसाल बनी ‘तेरा तुझको अर्पण’ संस्था, 3 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किया निःशुल्क तर्पण

नीलगंगा सरोवर पर 16 दिनों तक चला सेवा अभियान; सर्व पितृ अमावस्या पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 50 से अधिक कार्यकर्ताओं ने संभाली व्यवस्थाएं

(SDNA) उज्जैन। पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सेवा भाव को समर्पित उज्जैन की सामाजिक संस्था ‘तेरा तुझको अर्पण’ ने श्राद्ध पक्ष में अनुकरणीय सेवा कार्य करते हुए 3 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को निःशुल्क तर्पण कराया। नीलगंगा सरोवर पर लगातार 16 दिनों तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के निमित्त विधि-विधान से तिलांजलि और जलांजलि अर्पित की। संस्था पिछले 10 वर्षों से इस सेवा अभियान को निरंतर संचालित कर रही है।

प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शुरू होने वाले इस आयोजन में उज्जैन के साथ आसपास के क्षेत्रों और अन्य स्थानों से भी श्रद्धालु पहुंचे। अभियान का विशेष आकर्षण सर्व पितृ अमावस्या रहा, जब एक हजार से अधिक लोगों ने तर्पण कर अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। धार्मिक अनुष्ठान के साथ सेवा और सामूहिक सहभागिता का संदेश देने वाला यह आयोजन पूरे श्राद्ध पक्ष में जारी रहा।

निःशुल्क पूजन सामग्री के साथ कराया विधि-विधान से तर्पण

संस्था की ओर से श्रद्धालुओं को तर्पण के लिए आवश्यक पूजन सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। इसमें सोला, कुंकू, चंदन, अबीर, हल्दी, चावल, भस्मी, जौ और तिल सहित अन्य पूजन सामग्री की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा दूध, तुलसी पत्र और प्रसाद भी उपलब्ध कराया गया।

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तर्पण के लिए तैयार जल पात्र में दूध, पुष्प, जौ, तिल तथा गंगा, क्षिप्रा, नर्मदा, त्रिवेणी और महाकाल कुंड का जल मिलाया जाता था। आचार्य के मार्गदर्शन में श्रद्धालु हाथों में कुश धारण कर देवताओं, ऋषियों, मनुष्यों, दिव्य मनुष्यों और अपने पूर्वजों के निमित्त विधि-विधान से तर्पण करते थे।

धार्मिक अनुष्ठान के साथ सेवा का भी दिया संदेश

इस आयोजन की खास बात यह रही कि यहां श्रद्धालु केवल तर्पण करने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि व्यवस्थाओं में भी सक्रिय भागीदारी निभाते नजर आए। परिसर की साफ-सफाई, झाड़ू-पोछा, जल पात्र भरना, पूजन सामग्री की थालियां तैयार करना तथा दूध, पुष्प और प्रसाद को व्यवस्थित करना जैसे कार्यों में श्रद्धालुओं ने सहयोग किया।

तर्पण संपन्न होने के बाद कई श्रद्धालु अपने पात्रों को स्वयं धोकर साफ करते और निर्धारित स्थान पर रखते थे। इस तरह धार्मिक आस्था के साथ श्रमदान, स्वच्छता और सामूहिक सहयोग की भावना भी मजबूत हुई।

संस्था के दिलीप शर्मा और मुकेश खंडेलवाल ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु तर्पण के लिए पहुंचते थे। वे अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ ही आयोजन की व्यवस्थाओं में भी योगदान देते थे। लगातार 16 दिनों तक चले इस अभियान में सेवा और सहभागिता का यह क्रम बना रहा।

50 से अधिक कार्यकर्ताओं ने संभाली जिम्मेदारी

वृहद आयोजन के सुचारु संचालन में संस्था के दिलीप शर्मा, मुकेश खंडेलवाल, हरीश शर्मा, प्रकाश परमार, अंगद मीणा, गिरिराज यादव और महेश ठाकुर सहित 50 से अधिक कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं की सुविधा, पूजन सामग्री की उपलब्धता और तर्पण की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए निरंतर सेवाएं दीं।

धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की पहल

संस्था के अनुसार, नीलगंगा सरोवर स्थित तर्पण स्थल का धार्मिक महत्व भी विशेष है। स्कंद पुराण के अवंति खंड में श्राद्ध और तर्पण की महत्ता का उल्लेख मिलता है। इसी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संस्था पिछले एक दशक से निःशुल्क तर्पण सेवा का संचालन कर रही है।

‘तेरा तुझको अर्पण’ का यह अभियान धार्मिक आस्था के साथ सेवा, सहयोग और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता की भावना को प्रोत्साहित करने का माध्यम बना। तीन हजार से अधिक श्रद्धालुओं की सहभागिता और कार्यकर्ताओं के समर्पण ने इस आयोजन को सामाजिक सेवा की एक प्रेरक मिसाल के रूप में स्थापित किया।