Friday, October 30

(SDNA) मध्यप्रदेश की विकास, रोजगार, सड़क सुरक्षा और कृषि से जुड़ी पांच अहम खबरें

1. इंदौर में 28 अक्टूबर को जुटेंगे शहरी विकास के दिग्गज, ₹2,753 करोड़ की परियोजनाओं को मिलेगी गति

इंदौर | 15 अक्टूबर 2026

अर्बन कॉन्क्लेव में बैंकों के साथ होंगे अनुबंध, विकास परियोजनाओं के लिए जारी किए जाएंगे लेटर ऑफ अवार्ड

(SDNA) मध्यप्रदेश में आधुनिक शहरी अधोसंरचना को मजबूत करने और विकास परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से 28 अक्टूबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में अर्बन चैलेंज फंड के तहत स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति, वित्तीय प्रबंधन और समयसीमा में कार्य पूरा करने की रणनीति पर चर्चा होगी।

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इंदौर, उज्जैन और रीवा की योजनाओं पर रहेगा फोकस

अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत प्रदेश में कुल ₹2,753.10 करोड़ की विकास परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इनमें इंदौर की जल वितरण व्यवस्था और सीवरेज नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण, उज्जैन में एकीकृत मंदिर क्षेत्र का विकास तथा रीवा की समावेशी जलप्रदाय योजना प्रमुख हैं।

कॉन्क्लेव के दौरान संबंधित वित्तीय संस्थानों और बैंकों के साथ अनुबंध किए जाएंगे। साथ ही परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी एजेंसियों को लेटर ऑफ अवार्ड प्रदान किए जाएंगे।

निवेशकों और युवाओं को मिलेगा अवसर

इस आयोजन में शहरी विकास विशेषज्ञों, निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, स्टार्टअप्स और युवाओं को भागीदारी का अवसर मिलेगा। सरकार का लक्ष्य शहरों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने के साथ वित्तीय संसाधनों का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना है।

इच्छुक निवेशक और युवा ugconclave.mp.gov.in पर ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं। इस पहल से प्रदेश के शहरों में आधुनिक सुविधाओं, बेहतर जीवन स्तर और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

2. इंडिया स्किल्स 2026-27: युवाओं के पास हुनर दिखाने का मौका, 19 अक्टूबर तक करें आवेदन

इंदौर | 15 अक्टूबर 2026

63 कौशल श्रेणियों में होगी प्रतियोगिता, शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता नहीं

(SDNA) अपने हुनर को पहचान दिलाने और कौशल के दम पर आगे बढ़ने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए इंडिया स्किल्स 2026-27 प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर है। इसके लिए ऑनलाइन पंजीयन की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

शासकीय संभागीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, इंदौर की प्राचार्य रीना सोलंकी के अनुसार प्रतियोगिता में कुल 63 कौशल श्रेणियों में प्रतिभागियों की दक्षता परखी जाएगी। इसमें शामिल होने के लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं रखी गई है।

कौन कर सकता है आवेदन?

प्रतियोगिता में वही युवा भाग ले सकेंगे जिनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2006 के बाद की है। इच्छुक अभ्यर्थी स्किल्स इंडिया डिजिटल हब (SIDH) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं।

प्रतियोगिता की प्रक्रिया और अन्य आवश्यक जानकारियों के लिए युवा अपने नजदीकी शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) से संपर्क कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण तिथि: 19 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन पंजीयन।

3. सड़क सुरक्षा की पाठशाला बना सुशीला देवी बंसल कॉलेज, विद्यार्थियों को बताए दुर्घटनाओं से बचने के तरीके

इंदौर | 15 अक्टूबर 2026

सुरक्षित ड्राइविंग, यातायात नियमों और संभावित खतरों की पहचान पर दिया जोर

(SDNA) सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और युवाओं को जिम्मेदार वाहन चालक बनाने के उद्देश्य से इंदौर के सुशीला देवी बंसल कॉलेज में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। आदर्श सड़क सुरक्षा नगर परियोजना के अंतर्गत हुए इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सुरक्षित दोपहिया वाहन चालन और सड़क पर जोखिमों से बचाव के व्यावहारिक उपाय समझाए गए।

कार्यक्रम का आयोजन एशियन रोड सेफ्टी एकेडमी (ARSA) और होंडा इंडिया फाउंडेशन (HIF) ने उच्च शिक्षा विभाग, इंदौर के निर्देशन में किया।

वीडियो के जरिए समझाए सड़क के खतरे

डॉ. प्रेरणा अरोड़ा सिंह ने विद्यार्थियों को बताया कि सड़क पर सुरक्षित रहने के लिए केवल यातायात नियमों की जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि अचानक पैदा होने वाली परिस्थितियों को पहचानना और समय पर सही निर्णय लेना भी जरूरी है।

शैक्षणिक वीडियो के माध्यम से अचानक सामने आने वाले वाहन, अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की अप्रत्याशित गतिविधियों और यातायात में होने वाले बदलावों से उत्पन्न खतरों को समझाया गया। विद्यार्थियों को गति नियंत्रित रखने, आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखने और सड़क एवं मौसम की परिस्थितियों के अनुसार वाहन चलाने की सलाह दी गई।

चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट के उपयोग और सड़क पर दूसरों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी निभाने पर भी जोर दिया गया।

जिम्मेदार यातायात व्यवहार विकसित करने की पहल

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के नियमों से परिचित कराने के साथ उन्हें रोजमर्रा के जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

इस अवसर पर सड़क सुरक्षा नोडल अधिकारी डॉ. एस.के. उजले, कॉलेज के निदेशक डॉ. राजेश कुमार चक्रवर्ती, प्राचार्य डॉ. राजेश आर्य, डीन डॉ. विकेश गुप्ता और रजिस्ट्रार डॉ. विजय बिसेन सहित महाविद्यालय का स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

4. मध्यप्रदेश में पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध, कंपनियों को बचा हुआ स्टॉक नष्ट करने के निर्देश

इंदौर | 15 अक्टूबर 2026

मानव और पशुओं के लिए अत्यंत विषैला रसायन; निर्माण, बिक्री और भंडारण पर रोक लगाने के निर्देश

(SDNA) किसानों द्वारा खरपतवार नियंत्रण और फसल सुखाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले खतरनाक रसायन पैराक्वेट डाइक्लोराइड को लेकर मध्यप्रदेश शासन ने प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। कृषि विभाग के अनुसार यह रसायन मनुष्यों और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

राज्य के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने संबंधित कंपनियों के निर्माण, बिक्री और भंडारण पर रोक लगाने की कार्रवाई करने को कहा है। निर्माताओं को अपने पास मौजूद पंजीकरण प्रमाणपत्र केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति को लौटाने तथा शेष स्टॉक वापस मंगाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को पहुंचा सकता है नुकसान

पैराक्वेट डाइक्लोराइड एक अत्यंत विषैला रसायन है, जिसे ग्रामोक्सोन जैसे व्यापारिक नामों से भी जाना जाता है। पौधों के हरे हिस्सों पर इसका संपर्क होने से वे तेजी से सूख जाते हैं। इसी गुण के कारण इसका इस्तेमाल कुछ स्थानों पर फसल सुखाने के लिए किया जाता रहा है।

हालांकि, मनुष्यों के शरीर में पहुंचने पर यह फेफड़ों और गुर्दों सहित महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसके विषाक्त प्रभाव का कोई विशिष्ट प्रतिविष उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसके संपर्क से बचाव बेहद जरूरी है।

किसानों को सावधानी बरतने की जरूरत

विभाग ने प्रतिबंधित रसायन के स्टॉक के निस्तारण और नियमानुसार कार्रवाई पर जोर दिया है। किसानों को सलाह है कि फसल सुखाने के लिए प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग न करें और किसी भी कृषि रसायन के इस्तेमाल से पहले उसकी वैधता तथा फसल पर उपयोग की अनुमति की पुष्टि करें।

SDNA का संदेश: फसल उत्पादन में समय और लागत बचाने के साथ किसानों, खेत मजदूरों, उपभोक्ताओं और पशुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

5. एमपी ट्रांसको में महिला और दिव्यांग इंजीनियर निभा रहे तकनीकी जिम्मेदारियां, मैदानी कामों में भी बढ़ी भागीदारी

इंदौर | 15 अक्टूबर 2026

इंदौर में महिला अभियंता संभाल रहीं पारेषण लाइनों का रखरखाव, बीना में दिव्यांग इंजीनियर कर रहे ट्रांसफार्मर की टेस्टिंग

(SDNA) तकनीकी कार्यों में दक्षता और जिम्मेदारी निभाने के लिए शारीरिक स्थिति नहीं, बल्कि कौशल और कार्यक्षमता महत्वपूर्ण हैं। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) में महिला और दिव्यांग इंजीनियरों की भागीदारी इसका उदाहरण बन रही है। कंपनी में महिला अभियंता पारेषण लाइनों और एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों के रखरखाव का दायित्व संभाल रही हैं, वहीं बीना में दिव्यांग इंजीनियर ट्रांसफार्मर की जांच और तकनीकी रखरखाव में योगदान दे रहे हैं।

इंदौर में महिला इंजीनियरों के हाथों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

एमपी ट्रांसको की अतिरिक्त मुख्य अभियंता नीलम खन्ना मालवा क्षेत्र में पारेषण लाइनों के रखरखाव का काम देख रही हैं। कार्यपालन अभियंता नम्रता जैन ने भी इंदौर में त्योहारों के दौरान निर्बाध बिजली पारेषण बनाए रखने के लिए निर्धारित शटडाउन के दौरान लाइन संबंधी कार्यों की निगरानी की थी।

इंदौर के एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों में विनीता भावसार, नूतन शर्मा सहित अन्य महिला अभियंता उपकरणों की टेस्टिंग, रखरखाव और पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने में भूमिका निभा रही हैं।

बीना में दिव्यांग इंजीनियरों ने संभाला तकनीकी मोर्चा

बीना के 220 केवी सबस्टेशन में 200 एमवीए क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मर के मानसून-पश्चात रखरखाव कार्य में दो दिव्यांग इंजीनियरों ने अपने सहकर्मियों के साथ भाग लिया।

400 केवी टेस्टिंग डिवीजन, बीना में पदस्थ असिस्टेंट इंजीनियर ट्रेनी ऋषिकांत सेन, जिनका दाहिना हाथ नहीं है, और जूनियर इंजीनियर ट्रेनी शुभम श्रीवास्तव तकनीकी जांच एवं रखरखाव संबंधी कार्यों में भागीदारी कर रहे हैं।

कार्यपालन अभियंता अर्चित श्रीवास्तव के मार्गदर्शन और सहायक अभियंता रजत जैन के तकनीकी सहयोग से दोनों इंजीनियर नियमित रखरखाव, निवारक जांच और ब्रेकडाउन से जुड़े कार्यों में योगदान देते हैं।

अन्य विभागों में भी निभा रहे दायित्व

कंपनी के प्रोक्योरमेंट विभाग में कार्यपालन अभियंता विकास श्रीवास्तव, टेस्टिंग डिवीजन टीकमगढ़ में सहायक अभियंता जी.पी. राय और अकाउंट्स ऑफिसर नेहा गुप्ता सहित अन्य दिव्यांग अधिकारी भी अपने-अपने विभागों में जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

एमपी ट्रांसको में इन अभियंताओं की भागीदारी तकनीकी कार्यक्षेत्र में समावेशी अवसरों और कार्यक्षमता के महत्व को सामने लाती है। यह उदाहरण बताता है कि उचित प्रशिक्षण, सहयोग और अवसर मिलने पर महिला एवं दिव्यांग पेशेवर भी महत्वपूर्ण तकनीकी जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन कर सकते हैं।