छठ पर्व नजदीक, तिगरिया बादशाह तालाब पर स्थायी घाट का सपना अब भी अधूरा
मुख्यमंत्री की घोषणा और आईडीए के बजट में राशि के प्रावधान के बाद भी निर्माण की तस्वीर साफ नहीं; इस बार भी श्रद्धालुओं को अस्थायी इंतजामों के भरोसे रहना पड़ सकता है
इंदौर। लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा में अब महज 11 दिन शेष हैं, लेकिन इंदौर में स्थायी छठ घाट बनाने की योजना अब तक धरातल पर आकार नहीं ले सकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा और इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के बजट में तिगरिया बादशाह तालाब पर घाट निर्माण का प्रावधान होने के बावजूद परियोजना की मौजूदा स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में आशंका है कि इस वर्ष भी श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए अस्थायी व्यवस्थाओं का सहारा लेना पड़ेगा।
इस मुद्दे को लेकर पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान मध्य प्रदेश ने एक बार फिर मुख्यमंत्री को स्मरण-पत्र भेजा है। संस्थान ने निर्माण कार्य की प्रगति स्पष्ट करने और परियोजना को शीघ्र आगे बढ़ाने की मांग की है। संगठन का सवाल है कि जब मुख्यमंत्री स्तर से घोषणा हो चुकी है और आईडीए के बजट में भी इसके लिए प्रावधान किया गया है, तो फिर स्थायी घाट निर्माण की दिशा में अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?
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डेढ़ साल पहले हुई घोषणा, लेकिन काम की रफ्तार पर सवाल
गौरतलब है कि 22 मार्च 2025 को आयोजित बिहार दिवस समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के तीन तालाबों पर छठ पूजा के लिए घाट विकसित करने की घोषणा की थी। इसके बाद आईडीए के वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में सुपर कॉरिडोर के नजदीक स्थित तिगरिया बादशाह तालाब के सौंदर्यीकरण, पौधारोपण और छठ घाट निर्माण के लिए प्रावधान किया गया था।
हालांकि, घोषणा और बजट प्रावधान के बाद भी परियोजना कब शुरू होगी, निर्माण किस चरण में है और इसे पूरा करने की समय-सीमा क्या है, इन सवालों पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
कलेक्टर को पत्र और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद भी इंतजार
पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान ने 25 जून 2025 को तत्कालीन इंदौर कलेक्टर को पत्र लिखकर तिगरिया बादशाह तालाब पर स्थायी छठ घाट विकसित करने की मांग उठाई थी। अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर 17 सितंबर 2026 को संगठन ने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई।
अब मुख्यमंत्री को भेजे गए नए स्मरण-पत्र में संस्थान ने संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने और परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने का आग्रह किया है।
चार तालाबों पर स्थायी छठ घाट विकसित करने की मांग
संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर जगदीश सिंह और महासचिव के.के. झा ने कहा कि इंदौर में बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड से जुड़े बड़ी संख्या में परिवार निवास करते हैं। इन परिवारों के लिए छठ महापर्व केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है।
छठ के दौरान हजारों श्रद्धालु जलाशयों पर पहुंचकर अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। ऐसे बड़े आयोजन के लिए सुरक्षित घाट, स्वच्छ पानी, पर्याप्त रोशनी, महिलाओं के लिए जरूरी सुविधाएं, पेयजल और व्यवस्थित भीड़ प्रबंधन बेहद आवश्यक हैं।
संस्थान ने मांग की है कि आईडीए, इंदौर नगर निगम और जिला प्रशासन आपसी समन्वय से तिगरिया बादशाह, अन्नपूर्णा, पिपलियाहाना और निपानिया तालाबों पर स्थायी छठ घाट विकसित करें। तिगरिया बादशाह तालाब को विशेष रूप से छठ कॉरिडोर के रूप में तैयार किया जाए, जिससे आने वाले वर्षों में यहां बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन भी हो सकें।
छठ पूजा पर वैकल्पिक सार्वजनिक अवकाश की मांग भी दोहराई
संस्थान ने मध्य प्रदेश में छठ पूजा के अवसर पर कम से कम वैकल्पिक सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग फिर उठाई है। संगठन का कहना है कि अवकाश मिलने से पूर्वांचल के परिवार पर्व के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में आसानी से शामिल हो सकेंगे।
इस वर्ष छठ महापर्व का मुख्य संध्या अर्घ्य 15 नवंबर को और उषा अर्घ्य 16 नवंबर को दिया जाएगा। पर्व में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में शहर के श्रद्धालुओं की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
अब अहम सवाल यह है कि मुख्यमंत्री की घोषणा और बजट में प्रावधान के बावजूद स्थायी छठ घाट का निर्माण आखिर कब शुरू होगा? साथ ही, इस वर्ष छठ पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य सुविधाओं के लिए प्रशासन क्या विशेष इंतजाम करेगा?
(SDNA | सच के साथ, समाज की आवाज़)



