शिव तत्व को प्रबंधन शिक्षा में शामिल कर विद्यार्थी बनें भविष्य के सफल लीडर : प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता

सफल करियर की कुंजी स्वयं को लगातार पुनर्गठित करने की क्षमता : क्रिएटिव गुरु इंजी. पुनीत भटनागर

उज्जैन। पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान (जेएनआईबीएम), सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के दीक्षारंभ समारोह के प्रथम चरण का आयोजन पावन सावन माह के द्वितीय सोमवार को किया गया। समारोह में प्रख्यात क्रिएटिव गुरु एवं संस्थान के एल्युमनी इंजी. पुनीत भटनागर गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को बदलते तकनीकी दौर के अनुरूप स्वयं को लगातार विकसित करने का संदेश दिया।

इंजी. पुनीत भटनागर ने कहा कि जेनरेशन जी ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तेजी से प्रत्येक उद्योग को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि एआई और प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां केवल तकनीकी, मेडिकल या प्रबंधन विशेषज्ञता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके लिए जिम्मेदार और विवेकपूर्ण सोच की आवश्यकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि केवल रणनीति बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रभाव और जिम्मेदारी को भी समझना जरूरी है। किसी तकनीक का इस्तेमाल करने से पहले यह विचार करना चाहिए कि क्या उसका इस्तेमाल करना उचित है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज की प्रगति के लिए करने का आह्वान किया।

इंजी. भटनागर ने जेएनआईबीएम से अपने जुड़ाव और संस्थान में प्राप्त शिक्षा को याद करते हुए कहा कि संस्थान आज भी विद्यार्थियों को केवल ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि तेजी से बदलती एआई आधारित दुनिया की नई चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कौशल भी विकसित करता है।

विज्ञापन, क्रिएटिविटी और इनोवेशन के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक के अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि करियर कभी सीधा रास्ता नहीं होता। इसमें लगातार चुनौतियां, बदलाव और स्वयं को नए रूप में ढालने के अवसर आते हैं। वर्तमान तकनीकी बदलाव के दौर में सफल करियर की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी स्वयं को लगातार पुनर्गठित करने की क्षमता है।

नए तरीके से सोचने का आह्वान

प्रॉक्टर एंड गैंबल समूह से वरिष्ठ प्रबंधक के रूप में जुड़ी रहीं श्रीमती शैलजा भटनागर ने अपने आशीर्वचन में विद्यार्थियों से वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप नए तरीके से सोचने का आह्वान किया। उन्होंने इनोवेशन, उद्यमशील सोच और अकादमिक उत्कृष्टता के आधार पर भविष्य के लिए तैयार रोडमैप विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

संस्थान के निदेशक एवं संकाय अध्यक्ष प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता ने सावन सोमवार के अवसर पर दीक्षारंभ के संयोग को भगवान शिव के तत्वज्ञान से जोड़ते हुए कहा कि विद्यार्थियों को भगवान महाकाल के विशाल परिवार से प्रबंधन में समावेशिता और संगठनात्मक समरसता की सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विसर्जन से सृजन की सतत प्रक्रिया भी विद्यार्थियों को परिवर्तन और विकास की प्रेरणा देती है।

कुलगुरु ने दी शुभकामनाएं

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलगुरु प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने डॉ. धर्मेंद्र मेहता के नेतृत्व में संस्थान की अकादमिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए भविष्य की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप वर्सेटाइल और इनोवेटिव लीडर्स तैयार करने के लिए संस्थान के प्रयासों की प्रशंसा की।

समारोह की शुरुआत नवप्रवेशित विद्यार्थियों द्वारा भगवान महाकाल का स्मरण करते हुए शिव स्तुति और श्रीगणेश की आराधना से की गई। विद्यार्थियों ने भगवान शिव को पुष्प एवं बिल्व पत्र अर्पित किए।

कार्यक्रम में युवा संकाय सदस्य डॉ. नयनतारा डामोर ने आयोजन की जानकारी देते हुए अतिथियों का परिचय कराया। कार्यालय प्रमुख श्री गोविंद तोमर ने अंत में सभी अतिथियों, विद्यार्थियों और उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

(सद्वार्ता)