
5 लाख से अधिक पौधों के रोपण के बाद हुआ अध्ययन; शोध में पुनर्स्थापित और प्राकृतिक मैंग्रोव के मछली समुदायों में नहीं मिला महत्वपूर्ण अंतर
नई दिल्ली, 23 सितंबर (SDNA): समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने की कोशिशें कितनी प्रभावी हो सकती हैं, इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना से सामने आया है। गुयाना के तट पर बड़े पैमाने पर किए गए मैंग्रोव पुनर्स्थापना कार्यक्रम के वर्षों बाद किए गए अध्ययन में पाया गया कि बहाल किए गए मैंग्रोव क्षेत्रों में मछलियों का समुदाय प्राकृतिक रूप से विकसित मैंग्रोव क्षेत्रों के काफी करीब पहुंच गया था।
गुयाना के लगभग आठ किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र में 2010 से शुरू हुए पुनर्स्थापना कार्यक्रम के तहत 19 स्थानों पर पांच लाख से अधिक मैंग्रोव पौधे लगाए गए थे। बाद में किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण में पांच से 11 वर्ष पुराने पुनर्स्थापित मैंग्रोव क्षेत्रों की तुलना प्राकृतिक रूप से विकसित मैंग्रोव जंगलों से की गई।
कभी तेजी से घट गया था मैंग्रोव क्षेत्र
गुयाना में मैंग्रोव क्षेत्र को लंबे समय तक तटीय कटाव, पेड़ों की कटाई, अत्यधिक गाद जमने और प्रदूषण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। अध्ययन में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में मैंग्रोव क्षेत्र 1983 में लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर आंका गया था, जो 1992 तक घटकर करीब 81,000 हेक्टेयर और 2011 तक लगभग 22,000 हेक्टेयर रह गया था।
इस गिरावट के बीच गुयाना सरकार ने वर्ष 2010 में मैंग्रोव पुनर्स्थापना परियोजना शुरू की। इसके अंतर्गत मुख्य रूप से Avicennia germinans, जिसे ब्लैक मैंग्रोव के नाम से जाना जाता है, के पौधे लगाए गए।
वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक और पुनर्स्थापित जंगलों की तुलना की
अध्ययन के लिए कुल 10 मैंग्रोव क्षेत्र चुने गए। इनमें पांच पुनर्स्थापित और पांच प्राकृतिक रूप से विकसित क्षेत्र थे। शोधकर्ताओं ने 5, 6, 9, 10 और 11 वर्ष पुराने मैंग्रोव क्षेत्रों की तुलना की, ताकि समान आयु वाले आवासों के बीच अंतर को समझा जा सके।
प्राकृतिक मैंग्रोव उन क्षेत्रों में विकसित हुए थे जहां तटीय परिस्थितियों में बदलाव और मडफ्लैट के स्थिर होने के बाद मैंग्रोव के प्राकृतिक रूप से लौटने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनीं। इन क्षेत्रों में ब्लैक, व्हाइट और रेड मैंग्रोव की प्रजातियां मौजूद थीं।
शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक मैंग्रोव की उम्र और विकास की पुष्टि के लिए उपग्रह तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया। मछलियों के नमूने अलग-अलग मौसमों तथा दिन और रात के समय एकत्र किए गए।
559 मछलियों का किया गया अध्ययन
सर्वेक्षण के दौरान शोधकर्ताओं को 14 परिवारों और 18 प्रजातियों की कुल 559 मछलियां मिलीं। प्रत्येक क्षेत्र में मछलियों की संख्या, प्रजाति, लंबाई और वजन जैसे पहलुओं का अध्ययन किया गया।
अध्ययन में पुनर्स्थापित और प्राकृतिक मैंग्रोव क्षेत्रों के बीच मछलियों की संख्या में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। शोधकर्ताओं को मैंग्रोव की उम्र और वहां मौजूद मछलियों की संख्या के बीच भी कोई स्पष्ट सीधा संबंध नहीं मिला।
कुल पकड़ी गई मछलियों में करीब 94 प्रतिशत हिस्सा पांच प्रमुख प्रजातियों का था। इनमें Sciades couma सबसे अधिक पाई गई। इसके बाद Anableps anableps, Sciades herzbergii, Amphiarius rugispinis और Colomesus psittacus प्रमुख प्रजातियां रहीं।
पुनर्स्थापित क्षेत्रों में तेजी से लौटा मछली आवास
अध्ययन की एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि पुनर्स्थापित मैंग्रोव क्षेत्रों में प्राकृतिक मैंग्रोव में पाई जाने वाली मछली प्रजातियों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा मौजूद था।
शोधकर्ताओं के निष्कर्षों से संकेत मिला कि मछलियों ने नए विकसित किए गए मैंग्रोव आवासों का अपेक्षाकृत शुरुआती चरण में ही उपयोग करना शुरू कर दिया था। पुराने पुनर्स्थापित क्षेत्र में हमेशा अधिक मछलियां हों, ऐसा भी नहीं पाया गया।
उदाहरण के लिए, छह वर्ष पुराने पुनर्स्थापित क्षेत्र में कुल मछली समुदाय का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज हुआ, जबकि पांच वर्ष और 11 वर्ष पुराने क्षेत्रों में यह क्रमशः लगभग 26 प्रतिशत और 19.5 प्रतिशत था।
वनस्पति संरचना में भी आया विकास
पुनर्स्थापित क्षेत्रों में समय के साथ पर्याप्त वनस्पति विकास दर्ज किया गया। अध्ययन किए गए क्षेत्रों में Avicennia germinans, Laguncularia racemosa और Rhizophora mangle जैसी मैंग्रोव प्रजातियां पाई गईं।
पुनर्स्थापित क्षेत्रों में कुल वृक्षों की संख्या 894 दर्ज की गई, जबकि प्राकृतिक क्षेत्रों में 446 वृक्ष मिले। हालांकि, प्राकृतिक मैंग्रोव क्षेत्रों में Rhizophora mangle का घनत्व अधिक था।
प्राकृतिक मैंग्रोव के पेड़ औसतन थोड़े अधिक ऊंचे पाए गए। प्राकृतिक क्षेत्रों में औसत ऊंचाई लगभग 12.52 मीटर थी, जबकि पुनर्स्थापित क्षेत्रों में यह करीब 11 मीटर रही। तनों के औसत व्यास में भी अंतर दर्ज किया गया।
कम समय में उपयोगी बन सकता है बहाल किया गया मैंग्रोव
अध्ययन के निष्कर्षों से यह संकेत मिलता है कि मैंग्रोव की बहाली केवल पेड़ लगाने तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। यदि उपयुक्त तटीय परिस्थितियां उपलब्ध हों तो पुनर्स्थापित क्षेत्र अपेक्षाकृत कम समय में मछलियों के लिए उपयोगी आवास का रूप ले सकते हैं।
वनस्पति की संरचना में प्राकृतिक और पुनर्स्थापित क्षेत्रों के बीच कुछ अंतर मौजूद रहने के बावजूद, मछली समुदायों के उपयोग में महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। गुयाना का यह अनुभव तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और मैंग्रोव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संकेत प्रदान करता है।
— SDNA
