Sunday, October 11

त्वचा रोगों के आयुर्वेदिक प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने साझा किए उपचार के व्यावहारिक गुर

धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न, देशभर से पहुंचे करीब 30 चिकित्सक

उज्जैन। शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, उज्जैन में त्वक् रोग यानी त्वचा संबंधी रोगों के आयुर्वेदिक प्रबंधन को लेकर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को समापन हुआ। राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ, नई दिल्ली के सहयोग से 25 एवं 26 सितंबर 2026 को आयोजित इस प्रशिक्षण में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए करीब 30 चिकित्सकों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों को त्वचा रोगों की पहचान, आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों, उपचार प्रोटोकॉल तथा विभिन्न चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना रहा। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ प्रतिभागियों के लिए हैंड्स-ऑन सत्र भी आयोजित किए गए।

विशेषज्ञों ने साझा किया क्लीनिकल अनुभव

प्रशिक्षण के पहले दिन आयोजित उद्घाटन एवं स्वागत समारोह में डॉ. विनोद बैरागी मुख्य अतिथि रहे। चिकित्सालय अधीक्षक डॉ. मुकेश गुप्ता ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। राष्ट्रीय आयुर्वेद गुरु डॉ. एस.एन. पांडेय तथा एआईआईए, गोवा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिवानंद पाटिल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

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पहले दिन डॉ. शिवानंद पाटिल ने ‘क्लीनिकल ट्रिक्स इन डर्मेटोलॉजी : केस ड्रिवन स्ट्रेटेजीज फॉर एवरीडे प्रैक्टिस’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। उन्होंने दैनिक चिकित्सकीय अभ्यास में त्वचा रोगों से जुड़े मामलों को समझने और उनके आधार पर उपचार की रणनीति तैयार करने के व्यावहारिक पहलुओं पर जानकारी दी। इसके बाद प्रतिभागियों के लिए हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया।

डॉ. सुनील कुमार यादव ने ‘मैनेजमेंट ऑफ कॉमन स्किन डिसऑर्डर्स थ्रू आयुर्वेद—ए प्रैक्टिकल एप्रोच फॉर प्रैक्टिशनर्स’ विषय पर व्याख्यान देते हुए सामान्य त्वचा रोगों के आयुर्वेदिक प्रबंधन को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझाया।

उपचार प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दूसरे दिन डॉ. योगेश वाने ने ‘बेसिक्स ऑफ आयुर्वेदिक डर्मेटोलॉजी विद ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल एंड प्रोसीजर’ विषय पर आयुर्वेदिक त्वचा रोग विज्ञान, उपचार प्रोटोकॉल और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं से संबंधित जानकारी दी। सत्र के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।

महाविद्यालय के प्राचार्य एवं सीईओ डॉ. ओ.पी. व्यास सहित विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण की उपयोगिता पर विचार साझा किए।

इसके बाद राष्ट्रीय आयुर्वेद गुरु डॉ. एस.एन. पांडेय ने ‘आयुर्वेदिक मैनेजमेंट ऑफ श्वित्र (विटिलिगो) : ए क्लासिकल एंड एविडेंस बेस्ड एप्रोच’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने श्वित्र यानी विटिलिगो के आयुर्वेदिक प्रबंधन के शास्त्रीय आधार तथा उपलब्ध साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण पर प्रतिभागियों को जानकारी दी।

विशेषज्ञ प्रशिक्षण से चिकित्सकीय कौशल को मिला नया आयाम

दो दिनों तक चले प्रशिक्षण में चिकित्सकों को त्वक् रोगों से जुड़े विभिन्न चिकित्सकीय पहलुओं को विशेषज्ञों के अनुभव के माध्यम से समझने का अवसर मिला। व्याख्यानों के साथ आयोजित व्यावहारिक सत्रों ने प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए चिकित्सकीय अभ्यास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वैलेडिक्टरी एवं समापन समारोह में महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. जे.पी. चौरसिया, डॉ. एस.एन. पांडेय, डॉ. सिद्धेश्वर सतुआ, डॉ. अजयकीर्ति जैन, डॉ. नृपेंद्र मिश्रा, डॉ. सुनीता डी. राम, डॉ. वंदना सर्राफ, डॉ. मुकेश गुप्ता, डॉ. संतराम कुमावत, डॉ. हेमंत मालवीय, डॉ. कीर्तिवाला तावड़े, डॉ. सुधीर चौहान सहित महाविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

अतिथियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को चिकित्सकों के ज्ञान और कौशलवर्धन की दिशा में उपयोगी पहल बताया। उन्होंने त्वचा रोगों के क्षेत्र में आयुर्वेद की व्यावहारिक उपयोगिता तथा चिकित्सकों के निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वैलेडिक्टरी सत्र शाम 4 बजे से 4:30 बजे तक आयोजित हुआ।

दो संस्थाओं के समन्वय से कार्यक्रम सफल

पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वय एवं संचालन महाविद्यालय के रचना शरीर विभाग के अंतर्गत संचालित त्वचा रोग इकाई के प्रभारी डॉ. योगेश वाने ने किया। राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ, नई दिल्ली की ओर से समन्वय की जिम्मेदारी डॉ. गरिमा सिंह एवं डॉ. मनीषा रानी ने संभाली।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. विकास गुप्ता का भी सराहनीय सहयोग रहा। दोनों संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित रूपरेखा के अनुसार संपन्न हुआ।

महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी एवं रचना शरीर विभाग के प्रभारी एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रकाश जोशी ने बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागी चिकित्सकों को त्वक् रोगों के आयुर्वेदिक प्रबंधन, उपचार प्रोटोकॉल, प्रक्रियाओं तथा व्यावहारिक चिकित्सकीय दृष्टिकोण को विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण चिकित्सकों के सतत ज्ञानवर्धन और चिकित्सकीय कौशल के विकास में उपयोगी साबित होते हैं।

(SDNA)