
सरकारी इमारतों से लेकर गांवों और आम नागरिकों के घरों तक रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने की जरूरत, सब्सिडी और आसान ऋण से बन सकती है ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई राह
नई दिल्ली | SDNA
दुनिया तेजी से रिन्यूएबल और ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रही है। सौर ऊर्जा, छोटे स्तर की पवन ऊर्जा, रूफटॉप सोलर और अन्य आधुनिक तकनीकों ने बिजली उत्पादन के सामने कई नए विकल्प खोल दिए हैं। तकनीक लगातार विकसित हो रही है, लेकिन इन विकल्पों की सबसे बड़ी चुनौती आज भी उनकी प्रारंभिक लागत है।
महंगे सोलर पैनल, बैटरी, इनवर्टर, छोटे पवन ऊर्जा उपकरण और इंस्टॉलेशन का खर्च आम परिवारों के लिए अभी भी बड़ी बाधा है। यही कारण है कि ग्रीन एनर्जी की संभावनाएं जितनी बड़ी हैं, उसका लाभ उतनी तेजी से आम नागरिकों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
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सरकारी संपत्तियों को बनाया जाए ग्रीन एनर्जी का मॉडल
केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ जिला प्रशासन, जिला पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों को भी इस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए।
सरकारी स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, पंचायत भवन, नगर निकाय कार्यालय, सामुदायिक भवन, सरकारी आवास, बस स्टैंड, पार्किंग स्थल और अन्य सरकारी परिसरों की छतों एवं उपलब्ध स्थानों पर रूफटॉप सोलर तथा परिस्थितियों के अनुरूप छोटे स्तर के पवन ऊर्जा उपकरण लगाए जा सकते हैं।
इससे सरकारी संस्थानों की बिजली जरूरत का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर पूरा किया जा सकता है। साथ ही जनता के सामने यह एक व्यावहारिक उदाहरण भी होगा कि रिन्यूएबल एनर्जी केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों का हिस्सा बन सकती है।
24 घंटे बिजली उत्पादन की दिशा में स्थानीय मॉडल
सौर ऊर्जा की अपनी सीमाएं हैं—सूर्यास्त के बाद उत्पादन नहीं होता। वहीं, उपयुक्त स्थानों पर पवन ऊर्जा अलग समय पर उत्पादन में योगदान दे सकती है। यदि सोलर, छोटे पवन ऊर्जा सिस्टम, बैटरी स्टोरेज और ऊर्जा प्रबंधन तकनीक को स्थानीय जरूरत के अनुसार जोड़ा जाए, तो बिजली की उपलब्धता को अधिक स्थिर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
हर गांव, कस्बे और शहर की भौगोलिक परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए एक ही मॉडल हर जगह लागू करने के बजाय स्थानीय ऊर्जा मॉडल तैयार करने की आवश्यकता है।
केवल बड़े प्रोजेक्ट नहीं, छोटे परिवार भी बनें ऊर्जा उत्पादक
ग्रीन एनर्जी की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब इसका लाभ केवल बड़े उद्योगों या बड़े सोलर पार्कों तक सीमित न रहे, बल्कि आम नागरिक भी ऊर्जा उत्पादन में भागीदार बन सकें।
इसके लिए सरकारों को छोटे रूफटॉप सोलर सिस्टम, सौर जल पंप, सौर स्ट्रीट लाइट, छोटे पवन ऊर्जा उपकरण और बैटरी स्टोरेज जैसे विकल्पों के लिए आसान वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध कराने पर विचार करना चाहिए।
सब्सिडी के साथ आसान ऋण जरूरी
केवल सब्सिडी देना पर्याप्त नहीं हो सकता। अनेक परिवारों के लिए सब्सिडी के बाद बची राशि भी बड़ी हो सकती है। इसलिए सरकारों और वित्तीय संस्थानों को मिलकर ऐसे मॉडल विकसित करने चाहिए जिनमें—
- कम ब्याज पर ग्रीन एनर्जी लोन मिले।
- छोटे परिवारों के लिए आसान किस्तों की व्यवस्था हो।
- ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लिए विशेष वित्तीय सहायता हो।
- प्रमाणित उपकरणों की खरीद पर प्रोत्साहन दिया जाए।
- इंस्टॉलेशन और रखरखाव के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित तकनीशियन उपलब्ध हों।
- पंचायत स्तर पर सामूहिक सोलर प्रोजेक्ट विकसित किए जाएं।
पंचायत से महानगर तक बने स्थानीय ग्रीन एनर्जी मिशन
इस अभियान को केवल केंद्र सरकार की योजना मानने के बजाय बहु-स्तरीय जनभागीदारी अभियान बनाया जा सकता है।
ग्राम पंचायत अपने भवन और सार्वजनिक परिसरों से शुरुआत कर सकती है। नगर पंचायत और नगर पालिका सरकारी भवनों, स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक सुविधाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ सकती हैं। नगर निगम बड़े भवनों, अस्पतालों, स्कूलों, पार्किंग स्थलों और अन्य सार्वजनिक परिसरों पर रूफटॉप सोलर का विस्तार कर सकते हैं।
जिला पंचायत और जिला प्रशासन इन सभी योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित कर सकते हैं।
बिजली की खपत घटेगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ
रिन्यूएबल एनर्जी का विस्तार केवल बिजली उत्पादन का विषय नहीं है। इससे ऊर्जा खर्च में संभावित कमी, स्थानीय रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण, इंस्टॉलेशन एवं रखरखाव सेवाओं के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
यदि प्रत्येक जिले में स्थानीय युवाओं को सोलर इंस्टॉलेशन, इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस, बैटरी सिस्टम और ऊर्जा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए तो ग्रीन एनर्जी के साथ रोजगार का नया क्षेत्र भी विकसित हो सकता है।
सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन नहीं, पहुंच भी होना चाहिए
भारत में ग्रीन एनर्जी के विस्तार की चर्चा अक्सर बड़े निवेश और बड़े प्रोजेक्ट के संदर्भ में होती है। लेकिन अब आवश्यकता इस बात पर भी ध्यान देने की है कि रिन्यूएबल एनर्जी आम नागरिक की पहुंच में कैसे आए।
तकनीक उपलब्ध है, लेकिन यदि उसकी कीमत आम परिवार की पहुंच से बाहर है तो उसका व्यापक सामाजिक प्रभाव सीमित रहेगा।
इसलिए सरकारों को “बड़े प्रोजेक्ट + छोटे उपभोक्ता + स्थानीय उत्पादन + आसान वित्त” के संयुक्त मॉडल पर विचार करना चाहिए।
आने वाली पीढ़ियों के लिए ऊर्जा सुरक्षा
आज लिया गया ऊर्जा संबंधी निर्णय आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी को प्रभावित करेगा। यदि सरकारी संपत्तियों से शुरुआत करके गांवों, कस्बों और शहरों के घरों तक सौर एवं अन्य उपयुक्त रिन्यूएबल ऊर्जा तकनीकों को पहुंचाया जाता है, तो देश की ऊर्जा व्यवस्था को अधिक विविध और स्थानीय बनाने में मदद मिल सकती है।
ग्रीन एनर्जी को केवल पर्यावरण बचाने की मुहिम नहीं, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता, आर्थिक बचत, रोजगार और नागरिक सुविधा से जोड़ने का समय आ गया है।
सरकारें यदि सब्सिडी, आसान ऋण, तकनीकी सहायता और स्थानीय निकायों की सक्रिय भागीदारी का प्रभावी मॉडल तैयार करें, तो महंगे उपकरणों की मौजूदा बाधा धीरे-धीरे कम हो सकती है।
सवाल यह नहीं कि ग्रीन एनर्जी का भविष्य क्या है—सवाल यह है कि वह भविष्य आम नागरिक तक कितनी जल्दी और कितनी सस्ती पहुंचती है।



