कर्ज की वसूली हो, लेकिन कानून की हद में
सर्वोच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला : वाहन जब्ती में मनमानी, बलप्रयोग और अनुचित समय पर कार्रवाई पर कड़ा संदेश
— डॉ. सत्यवान सौरभ (SDNA)
कर्ज लेना एक आर्थिक अनुबंध है। कर्ज की राशि निर्धारित समय पर वापस न मिलने की स्थिति में बैंक या वित्तीय संस्था को अपनी बकाया राशि वसूलने का अधिकार है। लेकिन यह अधिकार असीमित नहीं है। कर्ज की वसूली के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया कानून, ऋण समझौते और भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए। किसी व्यक्ति के ऊपर कर्ज बकाया होने का अर्थ यह नहीं है कि वित्तीय संस्था उसके साथ बलपूर्वक, अपमानजनक या मनमाने तरीके से व्यवहार कर सकती है। सर्वोच्च न्यायालय का हालिया फैसला इसी महत्वपूर्ण सिद्धांत को रेखांकित करता है।
मामला उत्तर प्रदेश के हरि दत्ता शर्मा से संबंधित है। उन्होंने वर्ष 2019 में टाटा एसएफसी 407 ट्रक खरीदने के लिए चोलामंडलम इन्व...

