Friday, October 30

1. (SDNA) आधारताल तहसील में अनियमितताओं पर कलेक्टर सख्त, तहसीलदार को नोटिस और राजस्व निरीक्षक निलंबित

नामांतरण प्रकरणों की जांच में सामने आई गड़बड़ी, मामलों की पड़ताल के लिए दो सदस्यीय जांच दल गठित

(SDNA) जबलपुर। राजस्व मामलों में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। आधारताल तहसील कार्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान नजूल नामांतरण प्रकरणों में अनियमितताएं सामने आने पर संबंधित तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए, जबकि राजस्व निरीक्षक अंबकेश्वरधर बड़गैया को निलंबित कर दिया गया है।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने तहसीलदार न्यायालय और अनुविभागीय राजस्व अधिकारी न्यायालय में लंबित राजस्व प्रकरणों तथा उनके निराकरण की स्थिति की समीक्षा की। नजूल नामांतरण से संबंधित फाइलों की जांच में पाया गया कि निर्धारित समन शुल्क जमा कराए बिना नामांतरण की कार्रवाई की जा रही थी। कुछ मामलों में मात्र एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाकर बिना अनुज्ञप्ति के उल्लंघन से संबंधित नामांतरण किए जाने की बात भी सामने आई।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने नजूल नामांतरण प्रकरणों की विस्तृत जांच के लिए दल गठित किया है। इसमें डिप्टी कलेक्टर मोनिका बाघमारे और प्रगति गनवीर को शामिल किया गया है।

नियमों के अनुसार शुल्क जमा कराने के निर्देश

कलेक्टर ने पिछले महीने के कुछ प्रकरणों और निरस्त किए गए नामांतरण मामलों की भी जांच की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन मामलों में अनावेदक पहले से मौजूद हैं, उनमें नियमानुसार निर्धारित समन राशि के स्थान पर 0.5 प्रतिशत समन शुल्क जमा कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय राजस्व अधिकारी न्यायालय में संधारित अभिलेखों, लंबित फाइलों और राजस्व प्रकरणों के निराकरण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस दौरान अपर कलेक्टर रविशंकर राय, संयुक्त कलेक्टर ऋषभ जैन और एसडीएम आधारताल मदन सिंह रघुवंशी मौजूद रहे।

प्रशासन की इस कार्रवाई को राजस्व व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने और नामांतरण संबंधी प्रक्रियाओं में नियमों के पालन पर जोर देने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।

2. (SDNA) सोयाबीन और कोदो-कुटकी बेचने के लिए किसानों को कराना होगा पंजीयन, जानें अंतिम तारीख

सोयाबीन के लिए 17 अक्टूबर और कोदो-कुटकी के लिए 5 नवंबर तक मिलेगा मौका, जिले में बनाए गए पांच-पांच पंजीयन केंद्र

(SDNA) जबलपुर। किसानों को उनकी उपज के उपार्जन की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए जबलपुर जिले में सोयाबीन और कोदो-कुटकी का पंजीयन ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से जारी है। किसानों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पंजीयन कराने की सलाह दी गई है, ताकि वे उपार्जन प्रक्रिया में शामिल हो सकें।

कृषि विभाग के उप संचालक उमेश कुमार कटहरे के अनुसार, सोयाबीन के पंजीयन की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर 2026 निर्धारित है, जबकि कोदो-कुटकी के लिए किसान 5 नवंबर 2026 तक पंजीयन करा सकते हैं। शासन के निर्देशानुसार सोयाबीन का उपार्जन भावांतर योजना के अंतर्गत किया जाना है।

सोयाबीन पंजीयन के पांच केंद्र

जिले में सोयाबीन पंजीयन के लिए निम्नलिखित केंद्र निर्धारित किए गए हैं:

  • वृहताकार सेवा सहकारी संस्था, कुशनेर पिपरिया, पनागर।
  • सेवा सहकारी संस्था, गौरी कुंडम।
  • वृहताकार सेवा सहकारी संस्था, सहजपुर, शहपुरा।
  • सेवा सहकारी संस्था, बोरिया, पाटन।
  • वृहताकार सेवा सहकारी संस्था, पोंडा, मझौली।

कोदो-कुटकी के लिए भी पांच केंद्र

कोदो-कुटकी का पंजीयन कराने के लिए किसान इन केंद्रों पर संपर्क कर सकते हैं:

  • वृहताकार सेवा सहकारी संस्था, बरगी।
  • सेवा सहकारी संस्था, गौरी कुंडम।
  • वृहताकार सेवा सहकारी संस्था, बघराजी, कुंडम।
  • सेवा सहकारी संस्था, पडरिया, कुंडम।
  • सहकारी विपणन संस्था मर्यादित, सिहोरा।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय पर पंजीयन कराएं। पंजीयन संबंधी जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि संबंधित केंद्र से पहले ही कर लेना उपयोगी रहेगा।

3. (SDNA) जबलपुर के शिशु मंगल हॉस्पिटल पर कार्रवाई, 15 दिन के लिए पंजीयन और लाइसेंस निलंबित

अनमोल और पीसीपीएनडीटी पोर्टल पर प्रविष्टियों में कमी सहित कई खामियां मिलीं, निलंबन अवधि में नए मरीजों की भर्ती पर रोक

(SDNA) जबलपुर। स्वास्थ्य सेवाओं में निर्धारित मानकों और रिकॉर्ड संधारण के नियमों का पालन नहीं करने के मामले में जबलपुर के राइट टाउन स्थित शिशु मंगल हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने अस्पताल का पंजीयन और लाइसेंस 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 12 अक्टूबर को जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विनीता उप्पल, नोडल अधिकारी डॉ. आदर्श विश्नोई और पीसीपीएनडीटी शाखा के सौरभ चोटिल ने अस्पताल का संयुक्त निरीक्षण किया था। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

पोर्टल पर दर्ज नहीं थीं आवश्यक जानकारियां

निरीक्षण में पाया गया कि अस्पताल ने अनमोल पोर्टल पर एक भी प्रविष्टि नहीं की थी, जबकि यहां प्रतिदिन लगभग 8 से 10 गर्भवती महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। फरवरी 2026 से निरीक्षण की तारीख तक हुई 21 सोनोग्राफी जांचों में से केवल नौ मामलों के फॉर्म-एफ की प्रविष्टियां ही पीसीपीएनडीटी पोर्टल पर दर्ज थीं।

इसके अलावा, अस्पताल में योग्य एलोपैथिक चिकित्सक की अनुपलब्धता, नर्सिंग स्टाफ की योग्यता से जुड़े अभिलेखों का अभाव तथा बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा प्रशिक्षण और साफ-सफाई से संबंधित कमियां भी पाई गईं।

नए मरीजों की भर्ती पर प्रतिबंध

इन अनियमितताओं को देखते हुए अस्पताल का पंजीयन और लाइसेंस 15 दिनों के लिए निलंबित किया गया है। इस अवधि में नए मरीजों को भर्ती करने की अनुमति नहीं होगी। पहले से भर्ती मरीजों का समुचित उपचार करने और उनकी चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार सुरक्षित डिस्चार्ज अथवा आवश्यक होने पर किसी अन्य पंजीकृत अस्पताल में स्थानांतरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने स्पष्ट किया कि निजी अस्पतालों को अनमोल और पीसीपीएनडीटी पोर्टल पर निर्धारित जानकारी दर्ज करने के साथ मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी और अनियमितताएं पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से निजी चिकित्सा संस्थानों में रिकॉर्ड संधारण, चिकित्सकीय योग्यता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मानकों के पालन का महत्व एक बार फिर सामने आया है।