मध्यप्रदेश में 3,062 ग्रामीण आशा कार्यकर्ताओं की होगी भर्ती, 16 नवंबर से ऑनलाइन आवेदन
पांच साल बाद शुरू हो रही चयन प्रक्रिया, 16 दिसंबर तक एमपी ई-सेवा पोर्टल पर कर सकेंगी आवेदन; मार्च 2027 तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य
जबलपुर, 3 नवंबर 2026।
मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ने 3,062 नई आशा कार्यकर्ताओं के चयन की तैयारी शुरू कर दी है। करीब पांच साल के अंतराल के बाद होने जा रही इस चयन प्रक्रिया के लिए प्रदेश के सभी जिलों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आवेदन की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन रखी गई है, ताकि चयन में पारदर्शिता और समयबद्धता बनी रहे।
इच्छुक एवं पात्र महिलाएं 16 नवंबर से 16 दिसंबर 2026 तक एमपी ई-सेवा पोर्टल https://eseva.mp.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकेंगी। चयन के लिए केवल ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों को ही स्वीकार किया जाएगा।
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कलेक्टर की निगरानी में पूरी होगी चयन प्रक्रिया
आशा कार्यकर्ताओं का चयन जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला स्वास्थ्य समिति की निगरानी में किया जाएगा। चयनित ग्रामों और वहां निर्धारित पदों की संख्या के अनुसार ही नियुक्तियां होंगी। इससे सभी जिलों में चयन के लिए एक समान प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी।
ये महिलाएं कर सकेंगी आवेदन
चयन के लिए आवेदिका का संबंधित ग्राम की स्थायी निवासी और विवाहित होना जरूरी है। इसके साथ ही आयु 21 से 45 वर्ष के बीच तथा न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता दसवीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। चयन में निर्धारित शैक्षणिक एवं प्राथमिकता संबंधी नियमों का पालन किया जाएगा।
मार्च 2027 तक पूरी होगी प्रक्रिया
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चयन के विभिन्न चरण इस प्रकार होंगे:
- 16 नवंबर से 16 दिसंबर 2026: ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होंगे।
- 17 से 25 दिसंबर 2026: प्राप्त आवेदनों को ग्रामसभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
- 26 दिसंबर 2026 से 18 जनवरी 2027: ग्रामसभा चयन संबंधी प्रस्तावों का अनुमोदन कर भेजेगी।
- 19 जनवरी से 5 फरवरी 2027: विकासखंड स्तर पर दावे एवं आपत्तियों का निराकरण होगा।
- 6 से 25 फरवरी 2027: जिला स्तर पर अपील प्राप्त कर उनका निपटारा किया जाएगा।
- 26 फरवरी से 5 मार्च 2027: जिला स्वास्थ्य समिति से अंतिम अनुमोदन लिया जाएगा।
अंतिम अनुमोदन के बाद ही चयन आदेश जारी होंगे। इसके पश्चात 6 से 20 मार्च 2027 तक आशा पोर्टल के माध्यम से चयनित महिलाओं की आईडी बनाने के लिए अनुरोध भेजे जाएंगे। राज्य मुख्यालय में आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन एवं अनुमोदन के बाद संबंधित आशा कार्यकर्ताओं की आईडी तैयार की जाएगी।
त्योहारों पर पटाखे जलाते समय बरतें सावधानी, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सुरक्षा गाइडलाइन
बच्चों को अकेले आतिशबाजी करने से रोकने की अपील, जलने या आंखों में चोट लगने पर तत्काल अपनाएं प्राथमिक उपचार
जबलपुर, 3 नवंबर 2026।
त्योहारों की खुशियों के बीच आतिशबाजी से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने पटाखे जलाने से लेकर उनके सुरक्षित निपटान और दुर्घटना की स्थिति में प्राथमिक उपचार तक के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पटाखों का इस्तेमाल हमेशा खुले और सुरक्षित स्थान पर ही करना चाहिए। घरों, वाहनों, सूखी घास, पेड़-पौधों तथा ज्वलनशील वस्तुओं के आसपास आतिशबाजी करने से बचना जरूरी है। पटाखे जलाते समय सूती कपड़े और बंद जूते पहनें। बच्चों को कभी भी बिना किसी बड़े की निगरानी के पटाखे न दें और उन्हें पटाखे जेब में रखने से भी रोकें।
आतिशबाजी के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान
- पटाखे जलाने के स्थान पर पानी या रेत से भरी बाल्टी जरूर रखें।
- एक समय में केवल एक ही पटाखा जलाएं।
- पटाखा जलाते समय हाथ और चेहरे को उससे दूर रखें।
- अनार, चकरी और बम को हाथ में पकड़कर न जलाएं। इन्हें समतल जमीन पर रखकर ही इस्तेमाल करें।
- रॉकेट को हाथ से या क्षैतिज दिशा में न छोड़ें।
- पटाखों को टिन के डिब्बे, कांच की बोतल अथवा किसी बंद बर्तन में रखकर न जलाएं।
- जो पटाखा नहीं फूटे, उसके पास तुरंत न जाएं। कम से कम 20 मिनट बाद उस पर पानी डालकर निष्क्रिय करें।
- किसी व्यक्ति या पशु की ओर पटाखे न फेंकें।
धुएं और तेज आवाज से भी हो सकता है नुकसान
पटाखों से निकलने वाला धुआं और रासायनिक तत्व सांस तथा हृदय संबंधी परेशानियों को बढ़ा सकते हैं। अस्थमा और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे मरीज आतिशबाजी के दौरान घर के अंदर रहें और तेज ध्वनि वाले पटाखों से दूरी बनाए रखें। अधिक आवाज से सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
आतिशबाजी समाप्त होने के बाद जले और बिना फटे पटाखों को खुले में न छोड़ें। उनका सुरक्षित निपटान करें तथा साबुन-पानी से हाथ अच्छी तरह साफ करें।
दुर्घटना होने पर तुरंत करें प्राथमिक उपचार
पटाखे से जलने पर प्रभावित हिस्से को सामान्य तापमान के साफ बहते पानी से तुरंत ठंडा करें। सूजन आने से पहले अंगूठी, घड़ी और कंगन सावधानी से हटा दें। आंख में चोट लगने पर उसे बिल्कुल न रगड़ें और तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें। गंभीर जलने, गहरे घाव या विस्फोट से चोट लगने की स्थिति में मरीज को बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि त्योहारों का आनंद लेते समय अपनी और दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
दीपावली पर बर्न वार्ड से लेकर एम्बुलेंस तक रहेंगी स्वास्थ्य सेवाएं अलर्ट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिए निर्देश, जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में 24 घंटे उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने की तैयारी
कार्बाइड गन के खतरों को लेकर विशेष जागरूकता अभियान, गंभीर मरीजों के लिए रेफरल और एयर एम्बुलेंस तक की व्यवस्था के निर्देश
जबलपुर, 3 नवंबर 2026।
आगामी त्योहारों के दौरान पटाखों और आतिशबाजी से होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य संस्थानों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को शासकीय अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में संचालित बर्न वार्ड एवं बर्न यूनिट की तैयारियों का निरीक्षण कर नियमित निगरानी करने को कहा गया है।
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सभी शासकीय चिकित्सालयों और चिकित्सा महाविद्यालयों को उपचार संबंधी आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्रीमती रश्मि अरुण शमी ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
अस्पतालों में चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगे चिकित्सकीय संसाधन
सरकार ने अस्पतालों में चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है। बर्न इंजरी, आंखों की चोट, हाथ-पैर में घाव, कानों को नुकसान तथा पटाखों के धुएं से होने वाली सांस संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए जरूरी दवाएं, उपकरण और चिकित्सा सामग्री उपलब्ध रखी जाएगी।
बर्न वार्ड में पर्याप्त बिस्तर, मानव संसाधन और उपचार सुविधाओं की उपलब्धता की नियमित समीक्षा होगी। निजी एवं सरकारी अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों में भर्ती मरीजों की स्थिति पर भी प्रतिदिन नजर रखी जाएगी।
कार्बाइड गन से बच्चों को विशेष खतरा
विभाग ने अवैध रूप से बनाई जाने वाली कार्बाइड गन के इस्तेमाल को लेकर विशेष चेतावनी जारी की है। ऐसी गन के विस्फोट से प्लास्टिक और धातु के छोटे-छोटे टुकड़े आंख, चेहरे और त्वचा में गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं। इससे निकलने वाली एसीटिलीन गैस आग और जलने की घटनाओं का कारण भी बन सकती है।
विशेषकर बच्चों और किशोरों में पलक, कंजंक्टाइवा तथा कॉर्निया को नुकसान पहुंचने के साथ स्थायी रूप से आंखों की रोशनी जाने का खतरा रहता है। नागरिकों को कार्बाइड गन और असुरक्षित आतिशबाजी से दूर रहने के लिए जागरूक किया जाएगा।
गंभीर मरीजों के लिए रेफरल और एम्बुलेंस व्यवस्था मजबूत होगी
गंभीर रूप से घायल मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजने से पहले प्राथमिक उपचार देकर उनकी स्थिति स्थिर करने के निर्देश दिए गए हैं। रेफरल के दौरान मरीज के उपचार, जांच और आगे की चिकित्सा संबंधी जानकारी भी दर्ज करनी होगी। संबंधित अस्पताल को पहले से सूचना देने और मरीज के उपचार का फॉलोअप लेने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
अस्पतालों में आकस्मिक ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों, एम्बुलेंस चालकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के नाम एवं मोबाइल नंबर प्रदर्शित किए जाएंगे। 108 एम्बुलेंस में ऑक्सीजन तथा आवश्यक उपकरण उपलब्ध रखे जाएंगे। जरूरत पड़ने पर जिला कलेक्टर की अनुमति से मरीजों को दूसरे जिले या अन्य राज्य में भेजा जा सकेगा। अति गंभीर मरीजों के लिए नियमानुसार एयर एम्बुलेंस का भी उपयोग किया जाएगा।
आंख में चोट लगने पर न करें ये गलतियां
आतिशबाजी के दौरान आंख में बारूद, चिंगारी, रसायन अथवा धातु के कण चले जाने पर आंख को रगड़ने या खुद से बाहरी वस्तु निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह आई ड्रॉप का इस्तेमाल भी न करें।
रासायनिक पदार्थ आंख में जाने पर 15 से 20 मिनट तक साफ पानी या नॉर्मल सलाइन से धोने की सलाह दी गई है। इसके बाद हल्के से स्टेराइल गॉज से ढककर नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। आंख पर दबाव नहीं डालना चाहिए।
कॉर्निया में जलन, बाहरी वस्तु फंसने या गंभीर चोट की स्थिति में विशेषज्ञ जांच के साथ जरूरत के अनुसार स्लिट लैम्प, एक्स-रे अथवा सीटी स्कैन की व्यवस्था की जाएगी। गंभीर नेत्र चोट के मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल निकटतम शासकीय मेडिकल कॉलेज भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
पीएम आवास योजना 2.0 के लाभार्थियों के लिए विशेष शिविर, होम लोन पर मिलेगी ₹1.80 लाख तक की सब्सिडी
हर शुक्रवार नगरीय निकायों में आमने-सामने होंगे बैंक, बिल्डर और आवेदक; पात्र परिवारों को गृह ऋण एवं ब्याज अनुदान की मिलेगी सुविधा
जबलपुर, 3 नवंबर 2026।
मध्यप्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अपना घर बनाने या खरीदने का सपना देख रहे पात्र परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के अंतर्गत विशेष पहल शुरू की जा रही है। योजना के ब्याज अनुदान घटक (Interest Subsidy Scheme-ISS) के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को गृह ऋण पर अधिकतम 1.80 लाख रुपये तक की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी।
इस सुविधा का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) और मध्यम आय वर्ग (MIG) के पात्र परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार मिलेगा। योजना के तहत 1 सितंबर 2024 या उसके बाद स्वीकृत और वितरित किए गए पात्र गृह ऋण भी शामिल होंगे।
हर शुक्रवार लगेगा क्रेता-विक्रेता शिविर
योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रदेश के प्रत्येक नगरीय निकाय में हर शुक्रवार विशेष क्रेता-विक्रेता शिविर आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किसी अन्य निर्धारित दिन भी शिविर लगाए जा सकेंगे।
इन शिविरों में बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां तथा सरकारी एवं निजी बिल्डर्स और डेवलपर्स एक ही मंच पर मौजूद रहेंगे। इससे पात्र परिवारों को गृह ऋण की प्रक्रिया समझने, आवेदन करने और ब्याज अनुदान का लाभ लेने के लिए मौके पर ही मार्गदर्शन एवं सहायता मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान-2026 के तहत आयोजित होने वाले शिविरों में भी ISS घटक को शामिल किया जाएगा।
बड़े शहरों के लिए तय किए गए आवेदन लक्ष्य
यूनिफाइड वेब पोर्टल पर ब्याज अनुदान योजना के नए आवेदन बढ़ाने के लिए नगरीय निकायों को अलग-अलग लक्ष्य दिए गए हैं।
- इंदौर नगर निगम – 50,000 आवेदन।
- भोपाल नगर निगम – 50,000 आवेदन।
- ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन नगर निगम – प्रत्येक 25,000 आवेदन।
- शेष 11 नगर निगम – प्रत्येक 10,000 आवेदन।
- नगर पालिका परिषद – प्रत्येक 500 आवेदन।
- नगर परिषद – प्रत्येक 100 आवेदन।
इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 1 सितंबर 2024 के बाद भवन अनुज्ञा प्राप्त करने वाले नागरिकों से संपर्क कर उन्हें योजना से जोड़ने की कार्यवाही की जाएगी।
हर महीने होगी बैंकिंग व्यवस्था की समीक्षा
योजना में तेजी लाने और आवेदनों की स्वीकृति में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए जिला मुख्यालयों पर जिला स्तरीय बैंकर्स समिति (DLBC) की बैठक हर महीने आयोजित होगी। जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन में होने वाली इन बैठकों में बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर हितग्राहियों के आवेदनों का जल्द निराकरण करने पर जोर दिया जाएगा।
सहजपुर मटर मंडी तक किसानों की राह आसान करने की कवायद, वैकल्पिक रास्तों का निरीक्षण
विधायक नीरज सिंह के साथ कलेक्टर और एसपी ने शहपुरा क्षेत्र में देखे संपर्क मार्ग; रोजाना 300 से 400 ट्रैक्टर पहुंचते हैं मंडी
जबलपुर, 3 नवंबर 2026।
सहजपुर मटर मंडी में किसानों और कृषि वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों की तलाश तेज कर दी है। मंगलवार को विधायक श्री नीरज सिंह, कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने शहपुरा क्षेत्र के विभिन्न मार्गों का संयुक्त निरीक्षण किया।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य शहपुरा, चरगवां, बेलखेड़ा और गोटेगांव से सहजपुर मंडी तक मटर लेकर पहुंचने वाले किसानों एवं ट्रैक्टर चालकों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध कराना है।
कई वैकल्पिक रास्तों का लिया जायजा
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने टोल नाका से किसरौद होते हुए घुंसौर तथा पाटन रोड से शहपुरा बाईपास तक पहुंचने वाले मार्ग की स्थिति देखी। इसके अलावा कैथरा फाटक के समीप रेलवे के पुराने अंडरब्रिज और शहपुरा मंडी के पीछे से भिटौनी रेलवे स्टेशन तक जाने वाले रास्ते का भी निरीक्षण किया गया।
इस दौरान सहजपुर मटर मंडी में उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लेकर आवागमन से जुड़ी संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टरों की आवाजाही
शहपुरा क्षेत्र में चरगवां, शहपुरा, बेलखेड़ा और गोटेगांव की ओर से मटर लेकर आने वाले कृषि ट्रैक्टरों की संख्या काफी अधिक रहती है। अधिकारियों के अनुसार प्रतिदिन लगभग 300 से 400 ट्रैक्टर सहजपुर मटर मंडी तक पहुंचते हैं।
ऐसे में वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था होने से किसानों को मंडी तक पहुंचने में सुविधा मिलने के साथ यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
जनसुनवाई में मिली त्वरित राहत, डूबने से मृत व्यक्ति के परिवार को चार लाख की सहायता मंजूर
पति की असामयिक मृत्यु के बाद आर्थिक संकट से जूझ रही पार्वती कोल को प्रशासन ने दी मदद; स्वीकृति पत्र घर पहुंचकर सौंपा
जबलपुर, 3 नवंबर 2026।
जनसुनवाई में सामने आई एक पीड़ित परिवार की समस्या पर जबलपुर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि स्वीकृत की है। सिहोरा के वार्ड क्रमांक-01 निवासी पार्वती कोल के पति स्वर्गीय कमलेश कोल की 29 जनवरी 2026 को मुहारी डेम में डूबने से मृत्यु हो गई थी।
पति की असामयिक मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक सहायता की आवश्यकता थी। पार्वती कोल ने जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखी।
कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल हुई कार्रवाई
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने एसडीएम ग्रामीण को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के तहत प्रकरण पर त्वरित कार्रवाई की गई।
प्रशासन ने मृतक के परिवार के लिए चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि स्वीकृत कर दी है। कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित अधिकारी ने पीड़ित परिवार के निवास पर पहुंचकर सहायता राशि का स्वीकृति पत्र सौंपा।
प्रशासन की इस पहल से आर्थिक संकट का सामना कर रहे परिवार को राहत मिली है।
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