एल-नीनो की आशंका के बीच पशुओं के चारे की तैयारी पर जोर, साइलेज निर्माण के लिए मिलेगी आर्थिक सहायता
हरे चारे की उपलब्धता के दौरान भंडारण करने की अपील; राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत पात्र इकाइयों को 50 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान
इंदौर, 4 नवंबर 2026। संभावित एल-नीनो प्रभाव के कारण आगामी समय में मानसून प्रभावित होने, सूखे और अत्यधिक गर्मी की स्थिति बनने की आशंका को देखते हुए पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को पहले से चारे का इंतजाम करने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में हरे चारे की कमी पशुओं के पोषण, दुग्ध उत्पादन और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। इससे बचने के लिए साइलेज निर्माण और सुरक्षित भंडारण को प्रभावी वैज्ञानिक विकल्प बताया गया है।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग इंदौर संभाग के संयुक्त संचालक डॉ. मनीष इंगोले ने पशुपालकों से अपील की है कि हरा चारा उपलब्ध रहने के दौरान पर्याप्त मात्रा में साइलेज तैयार कर लें। उन्होंने बताया कि साइलेज बनाने की प्रक्रिया में हरे चारे को वायु रहित वातावरण में किण्वन के माध्यम से संरक्षित किया जाता है। इससे वर्षभर पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध कराया जा सकता है। खासकर सूखे अथवा चारे की कमी के समय यह तकनीक पशुपालकों के लिए उपयोगी साबित होती है।
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इन फसलों से तैयार किया जा सकता है साइलेज
अच्छी गुणवत्ता का साइलेज बनाने के लिए मक्का, ज्वार, बाजरा, जई सहित अन्य उपयुक्त चारा फसलों का उपयोग किया जा सकता है। फसल को सही अवस्था में काटकर छोटे टुकड़ों में तैयार किया जाता है। इसके बाद साइलेज बंकर, गड्ढे या विशेष प्लास्टिक बैग में परतों के रूप में भरकर अच्छी तरह दबाया जाता है, ताकि अंदर की हवा निकल जाए। आवश्यकता के अनुसार गुड़, नमक और उपयुक्त जैविक कल्चर मिलाकर इसे पॉलीथिन से पूरी तरह वायुरहित बंद किया जाता है।
इस प्रक्रिया में लाभकारी जीवाणुओं के माध्यम से किण्वन होता है, जिससे चारा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। साइलेज को इस्तेमाल करने से पहले कम से कम 45 दिन तक वायुरहित अवस्था में रखना आवश्यक है। उचित निर्माण और भंडारण की स्थिति में इसे लगभग दो वर्ष तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
छोटे बैग से लेकर बड़े बंकर तक की व्यवस्था
साइलेज निर्माण के लिए बंकर, एचडीपीई बैग, प्लास्टिक शीट, ट्रैक्टर, ट्रॉली, चारा कटाई मशीन, पावर कुट्टी मशीन और जरूरत के अनुसार चारा हार्वेस्टर जैसे उपकरणों की आवश्यकता होती है। बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपयुक्त क्षमता वाली कटाई और पैकिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
भंडारण के लिए कंक्रीट के स्थायी बंकर, प्लास्टिक बैग और पॉलीथिन कवर वाली बेलर व्यवस्था उपयोगी है। छोटे पशुपालक 50 से 1,000 किलोग्राम क्षमता वाले बैग अपना सकते हैं, जबकि बड़े स्तर पर 3 से 500 मीट्रिक टन क्षमता के साइलेज बंकर स्थापित किए जा सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावना
डॉ. इंगोले के अनुसार साइलेज निर्माण केवल पशु आहार को सुरक्षित रखने की तकनीक नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता का अवसर भी है। किसान, युवा, किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी संस्थाएं और स्वयं सहायता समूह साइलेज निर्माण इकाइयां स्थापित कर स्थानीय पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध करा सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर चारे की उपलब्धता बढ़ने के साथ आय और रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत अनुदान का प्रावधान
संयुक्त संचालक ने बताया कि केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) योजना के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत पात्र साइलेज प्लांट परियोजनाओं की लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम 50 लाख रुपये तक अनुदान देने का प्रावधान है। शेष राशि बैंक ऋण अथवा स्वयं के निवेश से जुटाई जा सकती है। व्यक्तिगत उद्यमी, FPO, सहकारी संस्थाएं, स्वयं सहायता समूह और अन्य पात्र संस्थाएं इसके लिए आवेदन कर सकती हैं। अनुदान SIDBI के माध्यम से संबंधित बैंक अथवा वित्तीय संस्था के जरिए उपलब्ध कराया जाता है।
इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश MSME विकास नीति 2021, जिसमें सितंबर 2023 में संशोधन किया गया था, के तहत पात्र सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को निवेश प्रोत्साहन सहित विभिन्न वित्तीय सुविधाएं मिल सकती हैं।
डॉ. इंगोले ने पशुपालकों, किसानों और युवाओं से साइलेज निर्माण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे पशुओं को पूरे वर्ष पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने, दुग्ध उत्पादन बनाए रखने और प्रतिकूल मौसम से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। तकनीक, इकाई स्थापना, NLM और MSME योजनाओं की जानकारी के लिए नजदीकी पशु चिकित्सालय अथवा जिला पशुपालन एवं डेयरी विभाग कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
डिप्टी कलेक्टर चरणजीत सिंह हुड्डा को सहायक सत्कार अधिकारी का अतिरिक्त दायित्व
कलेक्टर शिवम वर्मा ने प्रशासनिक कार्य सुविधा के लिए जारी किया आदेश
इंदौर, 4 नवंबर 2026। जिला प्रशासन ने प्रशासनिक कार्यों के बेहतर संचालन की दृष्टि से डिप्टी कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), देपालपुर श्री चरणजीत सिंह हुड्डा को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है।
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री शिवम वर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार श्री हुड्डा अपने वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ कलेक्टोरेट इंदौर की सत्कार शाखा में सहायक सत्कार अधिकारी का कार्य भी संभालेंगे। यह व्यवस्था आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी।
गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता के नतीजे घोषित, इंदौर के 12 पशुपालक सम्मानित होंगे
बनेड़िया, दतोदा, रंगवासा और शिवनी के तीन-तीन पशुपालकों का चयन; प्रथम पुरस्कार एक लाख रुपये का
इंदौर, 4 नवंबर 2026। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने और उन्नत नस्ल की अधिक दूध देने वाली गायों के पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। इंदौर जिले के चार चयनित वृंदावन ग्रामों से कुल 12 पशुपालकों को पुरस्कार के लिए चुना गया है।
उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. दिनकर राव पाटिल ने बताया कि चयनित पशुपालकों को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे।
ग्रामवार चयनित पशुपालक
- बनेड़िया: बालाराम रामचंद्र को प्रथम, अमित सुरेश पटले को द्वितीय और राहुल हरिराम चौधरी को तृतीय पुरस्कार के लिए चुना गया है।
- दतोदा: अलकेश छोटे लाल पटेल को प्रथम, नारायण भीमा उज्जीवाल को द्वितीय और धर्मेन्द्र लक्ष्मीनारायण गौड़ को तृतीय स्थान मिला है।
- रंगवासा: दिनेश नंदकिशोर को प्रथम, धर्मेन्द्र बद्रीलाल को द्वितीय और राहुल छगनलाल को तृतीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।
- शिवनी: उदयसिंह बंशीलाल ठाकुर को प्रथम, सचिन महेश चौधरी को द्वितीय और समंदर राजाराम चौधरी को तृतीय पुरस्कार मिलेगा।
सभी चयनित पशुपालकों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।
डॉ. पाटिल ने बताया कि मुख्यमंत्री की पहल पर इंदौर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में 27 से 31 अक्टूबर तक इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। जिले के बनेड़िया, दतोदा, रंगवासा और शिवनी को वृंदावन ग्राम के रूप में चयनित किया गया था।
योजना के अंतर्गत भारतीय नस्ल की ऐसी उन्नत गायों के पालकों का पंजीयन किया गया, जिनकी प्रतिदिन दूध देने की क्षमता छह लीटर या उससे अधिक है। प्रतियोगिता में सर्वाधिक दूध देने वाली गायों के पशुपालकों को पुरस्कार के लिए चुना गया।
योजना का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ बेहतर नस्ल की गायों की पहचान करना और पशुपालकों को उन्नत पशुपालन के लिए प्रोत्साहित करना है।
51 साल तक बिजली व्यवस्था को रोशन करने वाला ट्रांसफार्मर सेवानिवृत्त, एमपी ट्रांसको ने दी भावभीनी विदाई
इछावर के 132 केवी सबस्टेशन में 20 एमवीए के पुराने ट्रांसफार्मर की जगह लगाया गया 50 एमवीए क्षमता का नया उपकरण
इंदौर, 4 नवंबर 2026। मध्यप्रदेश की बिजली व्यवस्था में लगभग आधी सदी तक अपनी सेवाएं देने वाले एक पुराने पावर ट्रांसफार्मर को आखिरकार सेवानिवृत्त कर दिया गया। सीहोर जिले के इछावर स्थित 132 केवी सबस्टेशन में स्थापित 20 एमवीए क्षमता के इस ट्रांसफार्मर को हटाकर अब 50 एमवीए क्षमता का नया ट्रांसफार्मर लगाया गया है। पुराने उपकरण की विदाई के समय एमपी ट्रांसको के कर्मचारियों और अभियंताओं ने उसके लंबे सेवाकाल को याद करते हुए भावुक विदाई दी।
मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के अनुसार वर्ष 1975 में भारत बिजली लिमिटेड द्वारा निर्मित यह ट्रांसफार्मर पहली बार मध्यप्रदेश विद्युत मंडल के नेटवर्क में शामिल हुआ था। इसके बाद विभिन्न सबस्टेशनों पर सेवाएं देते हुए इसने प्रदेश की बदलती विद्युत जरूरतों और बढ़ते बिजली भार के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2016 में इसे इछावर के 132 केवी सबस्टेशन में स्थापित कर ऊर्जीकृत किया गया था।
कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता और रखरखाव का परिणाम
ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ट्रांसफार्मर के लगभग पांच दशक लंबे सेवाकाल के लिए मध्यप्रदेश विद्युत मंडल और बाद में एमपी ट्रांसको के अभियंताओं एवं रखरखाव कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नियमित देखरेख, समय पर परीक्षण और आवश्यक मेंटेनेंस के कारण यह उपकरण अपनी निर्धारित कार्यशील अवधि से कहीं अधिक समय तक काम करता रहा।
मंत्री ने पुराने और वर्तमान कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि बदलती तकनीक और परिस्थितियों के बीच किसी उपकरण को इतने लंबे समय तक कार्यशील बनाए रखना कर्मचारियों के अनुभव, तकनीकी दक्षता और समर्पण को दर्शाता है। यह उपलब्धि केवल एक मशीन की नहीं, बल्कि उससे जुड़े तकनीकी अमले की मेहनत की भी कहानी है।
बदलती बिजली जरूरतों का रहा साक्षी
एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री राजेश शांडिल्य ने बताया कि 1975 में जब यह ट्रांसफार्मर बिजली नेटवर्क का हिस्सा बना था, उस समय प्रदेश की विद्युत आवश्यकताएं वर्तमान से काफी अलग थीं। पिछले पांच दशकों में आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और कृषि एवं घरेलू बिजली की मांग में लगातार वृद्धि हुई। इस दौरान ट्रांसफार्मर ने अपनी निर्धारित क्षमता के अनुरूप विद्युत पारेषण व्यवस्था में योगदान दिया।
विभिन्न सबस्टेशनों में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद इसे वर्ष 2016 में इछावर सबस्टेशन में स्थापित किया गया था।
25 वर्ष निर्धारित आयु, बेहतर रखरखाव से 51 वर्ष तक सेवा
विद्युत क्षेत्र के निर्धारित मानकों के अनुसार सामान्यतः पावर ट्रांसफार्मर की कार्यशील आयु 25 वर्ष मानी जाती है। लेकिन नियमित प्रिवेंटिव मेंटेनेंस, परीक्षण और उचित रखरखाव के चलते इस ट्रांसफार्मर ने लगभग 51 वर्षों तक काम किया। इस तरह यह अपनी निर्धारित कार्यशील आयु से दोगुने से भी अधिक समय तक बिजली व्यवस्था का हिस्सा बना रहा।
प्रदेश की ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 85,708 एमवीए
एमपी ट्रांसको वर्तमान में प्रदेश में 418 अति उच्च दाब सबस्टेशनों के माध्यम से बिजली का पारेषण कर रही है। इनमें 400 केवी के 14, 220 केवी के 88 और 132 केवी के 316 सबस्टेशन शामिल हैं। कंपनी के कुल 1,060 पावर ट्रांसफार्मरों की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता नए ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के बाद बढ़कर 85,708 एमवीए हो गई है।
विदेश में उच्च शिक्षा के लिए पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का अवसर, ऑनलाइन आवेदन शुरू
सत्र 2026-27 में 50 विद्यार्थियों का होगा चयन; 10 अभ्यर्थियों की प्रतीक्षा सूची भी बनेगी
इंदौर, 4 नवंबर 2026। विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले पिछड़ा वर्ग के पात्र विद्यार्थियों के लिए मध्यप्रदेश शासन के पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह आवेदन मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के वर्ष 2026-27 के लिए मांगे गए हैं।
इच्छुक विद्यार्थी विभागीय पोर्टल https://mpom.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन से पहले अभ्यर्थियों को योजना की पात्रता, शैक्षणिक योग्यता, जरूरी दस्तावेज और अन्य शर्तों की जानकारी पोर्टल पर जारी विज्ञप्ति से अच्छी तरह जांचने की सलाह दी गई है।
विभाग के अनुसार विज्ञप्ति जारी होने की तारीख से एक माह तक ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके बाद प्राप्त आवेदनों को क्रमवार सूचीबद्ध कर विभागीय स्तर पर जांच की जाएगी। पहले चरण में अभ्यर्थियों की पात्रता और प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण होगा। निर्धारित नियमों के अनुसार चयन प्रक्रिया पूरी करने के साथ प्रतीक्षा सूची भी तैयार की जाएगी।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना में कुल 50 सीटें निर्धारित की गई हैं। इसके अतिरिक्त 10 अभ्यर्थियों को प्रतीक्षा सूची में रखा जाएगा।
तकनीकी सहायता के लिए हेल्पलाइन उपलब्ध
ऑनलाइन आवेदन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी या तकनीकी समस्या आने पर विद्यार्थी विभागीय हेल्पलाइन नंबर 0755-2553329 और 0755-2675521 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा nodalofficerobc@mp.gov.in पर ई-मेल भेजकर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
इंदौर जिले के इच्छुक विद्यार्थी सहायक संचालक, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, कक्ष क्रमांक 303, द्वितीय तल, सेटेलाइट भवन, कलेक्टोरेट इंदौर में संपर्क कर सकते हैं। विभाग का ई-मेल पता adbmwind@mp.gov.in है।
सहायक संचालक श्री अनिल कुमार सोनी ने पात्र विद्यार्थियों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित समय-सीमा में आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
सर्दियों में वायु और ध्वनि प्रदूषण से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सलाह
सुबह जल्दी और देर रात खुले में व्यायाम से बचें; सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या आंखों में जलन होने पर चिकित्सकीय परामर्श लें
इंदौर, 4 नवंबर 2026। सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण का प्रभाव बढ़ने और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह जारी की है। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की हेल्थ एडवाइजरी के अनुरूप आमजन को वायु और ध्वनि प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की गई है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि थोड़ी सी सतर्कता और दैनिक आदतों में जरूरी बदलाव करके सर्दियों में प्रदूषण से होने वाली कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।
खुले में व्यायाम और घरेलू ईंधन के इस्तेमाल में सावधानी
स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि सर्दियों में बहुत सुबह या देर रात खुले वातावरण में दौड़ने, जॉगिंग और अन्य शारीरिक गतिविधियों से बचें। घरों में खाना पकाने के लिए लकड़ी, कोयला, गोबर के कंडे, उपले और केरोसिन के बजाय स्वच्छ ईंधन, गैस या बिजली से चलने वाले स्टोव का उपयोग करें।
घर को गर्म रखने के लिए लकड़ी और कोयले की अंगीठी जलाने से भी परहेज करें। इससे कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस बन सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।
बंद कमरों में अत्यधिक रूम फ्रेशनर, अगरबत्ती और मच्छर भगाने वाली क्वायल के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है। घरों या आसपास के क्षेत्रों में लकड़ी, पत्तियां, फसल अवशेष, कचरा और प्लास्टिक जलाना भी हानिकारक है। घर के अंदर सफाई के लिए सूखी झाड़ू के स्थान पर गीले पोछे का उपयोग बेहतर बताया गया है।
आंखों और गले की देखभाल भी जरूरी
स्वास्थ्य विभाग ने आंखों को समय-समय पर साफ पानी से धोने और गले में खुश्की या खराश होने पर कुनकुने पानी से गरारे करने की सलाह दी है। भोजन में संतुलित आहार, ताजे फल-सब्जियां और स्वच्छ पेय पदार्थ शामिल करने चाहिए। इससे शरीर को आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
डॉ. हासानी ने कहा कि सांस लेने में कठिनाई, चक्कर, खांसी, सीने में बेचैनी, दबाव या दर्द, आंखों में जलन, पानी आना अथवा आंखें लाल होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
ध्वनि प्रदूषण से भी स्वास्थ्य को खतरा
स्वास्थ्य विभाग ने ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति भी सतर्क रहने की अपील की है। तेज आवाज के लगातार संपर्क में रहने से तनाव, उच्च रक्तचाप, बातचीत में परेशानी, सुनने की क्षमता में कमी और नींद संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा कानों में घंटी बजने (टिनिटस), तेज आवाज का अनुभव होने या ध्वनियों के विकृत रूप में सुनाई देने जैसी दिक्कतें भी उत्पन्न हो सकती हैं।
नागरिकों से तेज आवाज वाले पटाखों और अन्य शोर के स्रोतों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है। विभाग ने कहा है कि प्रदूषण से बचाव के उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर स्वयं और परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है।
आईडीए की योजनाओं में बकाया लीज रेंट और कंपाउंडिंग फीस की वसूली तेज करने के निर्देश
संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार ने विकास कार्यों की समीक्षा की; खाली संपत्तियों के विक्रय के लिए प्रॉपर्टी मेला आयोजित करने को कहा
इंदौर, 4 नवंबर 2026। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) की विकास योजनाओं और विभिन्न शाखाओं के कामकाज की समीक्षा के लिए प्राधिकरण कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। संभागायुक्त एवं आईडीए अध्यक्ष श्री भास्कर लाक्षाकार की अध्यक्षता में हुई बैठक में बकाया लीज रेंट, कंपाउंडिंग फीस, संपत्तियों के विक्रय और न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की स्थिति पर चर्चा की गई।
संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत जिन लीजधारकों पर लीज रेंट और कंपाउंडिंग फीस की राशि बकाया है, उन्हें तत्काल नोटिस जारी किए जाएं। लीज की शर्तों का उल्लंघन करने वाले मामलों में नियमानुसार लीज निरस्तीकरण की संभावित कार्रवाई की जानकारी भी संबंधित लीजधारकों को दी जाए, ताकि निर्धारित समय-सीमा में बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित हो सके।
खाली संपत्तियों के विक्रय की प्रक्रिया जल्द शुरू हो
बैठक में संभागायुक्त ने प्राधिकरण की सभी योजनाओं में व्ययन योग्य खाली संपत्तियों की सूची तैयार करने और उनके विक्रय की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संपत्तियों की जानकारी अधिक से अधिक इच्छुक लोगों तक पहुंचाने के लिए जल्द ही प्रॉपर्टी मेला आयोजित किया जाए। इससे संपत्तियों के विक्रय को गति मिल सकेगी।
न्यायालयीन मामलों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने पर जोर
संभागायुक्त ने विधि शाखा के लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन मामलों का स्पष्ट और व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए। प्रत्येक प्रकरण की अद्यतन स्थिति की नियमित जानकारी संधारित की जाए, ताकि मामलों की प्रभावी निगरानी हो सके।
बैठक में मुख्य रूप से संपदा शाखा और विधि शाखा के कार्यों की समीक्षा की गई। इस अवसर पर आईडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप कैरकटा सहित सभी कार्यपालन यंत्री और विभिन्न शाखाओं के प्रभारी अधिकारी उपस्थित थे।
विमानतल के आसपास लेजर गतिविधियों पर रोक सुनिश्चित करें : संभागायुक्त
पर्यावरण प्रबंधन समिति की बैठक में खुले में कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई, ऊंची इमारतों और रनवे के आसपास पेड़ों को लेकर भी दिए निर्देश
इंदौर, 4 नवंबर 2026। देवी अहिल्या होलकर विमानतल की पर्यावरण सुरक्षा और विमान संचालन की सुरक्षित परिस्थितियां बनाए रखने के लिए संभागायुक्त श्री भास्कर लाक्षाकार की अध्यक्षता में पर्यावरण प्रबंधन समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विमानतल के आसपास सफाई व्यवस्था, पक्षियों से उत्पन्न संभावित खतरे, लेजर गतिविधियों और भवनों की ऊंचाई जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
संभागायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इंदौर-पीथमपुर मार्ग और सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर जाने वाले मार्ग पर खुले में कचरा जमा न होने दिया जाए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में गंदगी और कचरे के ढेर पक्षियों को आकर्षित कर सकते हैं, जिससे विमान संचालन और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
उन्होंने संबंधित विभागों को नियमित सफाई सुनिश्चित करने और निर्धारित स्थानों के अलावा अन्य जगहों पर कचरा फेंकने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
लेजर गतिविधियों पर सख्ती से निगरानी
विमान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संभागायुक्त ने विमानतल के आसपास किसी भी प्रकार की लेजर गतिविधि नहीं होने देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विमानतल के निकट इस तरह की गतिविधियां प्रतिबंधित श्रेणी में आती हैं और इन पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है।
उन्होंने विमानतल के आसपास हाईराइज इमारतों के निर्माण की अनुमति नहीं देने तथा विशेष रूप से रनवे के आसपास पेड़ों की कटाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के निदेशक श्री विक्रम कुमार शिवराज भाई ठक्कर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हिमांशु प्रजापति, अपर कलेक्टर श्री रिंकेश वैश्य, प्राधिकरण के असिस्टेंट डायरेक्टर श्री जी.एल. वर्मा, एडिशनल डीसीपी श्री सुमित केरकट्टा, डीएफओ श्री लाल सुधाकर सिंह सहित बीएसएफ, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
दीपावली पर सुरक्षा, सफाई और जरूरी सुविधाओं में न हो कोई कमी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
अवैध शराब, प्रतिबंधित पटाखों और मादक पदार्थों के कारोबार पर सख्ती के निर्देश; खाद की कमी होने पर कलेक्टर होंगे जिम्मेदार
इंदौर, 4 नवंबर 2026। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सभी जिलों में दीपावली और आगामी त्योहारों के दौरान कानून व्यवस्था तथा नागरिक सुविधाओं को लेकर प्रशासन और पुलिस को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि लोग दीपावली हर्षोल्लास के साथ मनाएं, लेकिन कहीं भी असामाजिक गतिविधियां न हों। अवैध शराब की बिक्री, प्रतिबंधित पटाखों और कार्बाइड गन एवं लैंप के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
मुख्यमंत्री बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से प्रदेश के सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दीपावली के साथ यह समय किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है। खाद-उर्वरक की उपलब्धता और वितरण में किसी जिले में परेशानी आई तो संबंधित कलेक्टर जिम्मेदार माने जाएंगे। प्रशासनिक अमला त्योहार और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलर्ट मोड में काम करे।
छोटे दुकानदारों को अनावश्यक परेशान न करें
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि दीपावली के दौरान बड़े बाजारों में फल, फूल, दीये-बाती और झालर जैसी सामग्री बेचने के लिए अस्थायी दुकानें लगाने वाले छोटे व्यापारियों को तहबाजारी से छूट दी जाए। उन्हें बेवजह परेशान नहीं किया जाए।
उन्होंने प्रतिबंधित और अवैध पटाखों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के साथ मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप के उपयोग को भी नियंत्रित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे दीपावली के दिन गरीब बस्तियों, अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में जाकर बच्चों और जरूरतमंदों के साथ त्योहार मनाएं।
अवैध शराब के निर्माण और परिवहन पर कठोर कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और परिवहन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने जहरीली और नकली शराब बनाने के ठिकानों की पहचान कर संबंधित लोगों पर कठोर वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अवैध शराब बिक्री में एजेंटी, पैकारी और डायरी व्यवस्था जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने, शराब परिवहन करने वाले वाहनों का भौतिक सत्यापन करने और लाइसेंसी दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली नहीं होने देने को कहा। पुलिस और आबकारी विभाग को समय-समय पर शराब के नमूने लेने तथा मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व मिलने पर संबंधित लाइसेंसधारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
मादक पदार्थों के अवैध कारोबार का नेटवर्क तोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत गांजा, अफीम सहित अन्य मादक पदार्थों की अवैध खेती पर प्रभावी रोक लगाई जाए। मादक पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लैब बंद कराई जाएं और नारकोटिक्स नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए विशेष कॉम्बैट टीम सक्रिय की जाए।
उन्होंने पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराधियों पर कार्रवाई, पुलिस और नारकोटिक्स टीम द्वारा सघन जांच तथा जिला स्तरीय एन्कोर कमेटी की नियमित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग सेंटरों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे स्थानों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनजातीय और अन्य वर्गों के विद्यार्थियों के छात्रावास गोद लेकर बच्चों को गुटखा, तंबाकू और खैनी जैसे नशीले पदार्थों से दूर रहने के लिए प्रेरित करने को कहा। उन्होंने सभी जिलों में नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित करने, सामाजिक संस्थाओं द्वारा संचालित केंद्रों को केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से अनुदान दिलाने और जहां केंद्र नहीं हैं वहां स्थापना के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। नशामुक्ति के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले जिलों की ग्रेडिंग भी की जाएगी।
9 नवंबर को प्रदेशभर में गोवर्धन पूजा के आयोजन
मुख्यमंत्री ने बताया कि 9 नवंबर को प्रदेशभर में गोवर्धन पूजा के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भोपाल में भी बड़ा आयोजन होगा। उन्होंने सभी जिलों की गौशालाओं में गौपूजन, गाय के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व पर कार्यक्रम तथा भोपाल के आयोजन का सीधा प्रसारण दिखाने की व्यवस्था करने को कहा।
गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता में चयनित वृंदावन ग्रामों के विजेता पशुपालकों को नजदीकी गौशालाओं में आमंत्रित कर शाल, श्रीफल, पगड़ी और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। राज्य स्तरीय कार्यक्रम में योजना के छह विजेताओं को पुरस्कार दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने और सरकार की योजनाओं, अनुदान एवं तकनीकी सहायता का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने गोवर्धन पूजा के दिन बैलगाड़ी प्रतियोगिता आयोजित करने की संभावना पर भी विचार करने को कहा।
धनतेरस पर अधिक से अधिक स्वामित्व रजिस्ट्री कराने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्लॉट और मकानों के कच्चे पट्टाधारकों को पक्की रजिस्ट्री नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए चल रहे मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना (स्वामित्व रजिस्ट्री) अभियान की समीक्षा की। उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि धनतेरस के दिन अधिक से अधिक गांवों में स्थानीय सांसदों और विधायकों के साथ पहुंचकर शत-प्रतिशत रजिस्ट्री सुनिश्चित कराएं।
उन्होंने इस कार्य में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पटवारियों और तहसीलदारों को आगामी 26 जनवरी को सम्मानित करने तथा उनकी उपलब्धि सर्विस बुक में दर्ज करने के निर्देश दिए।
खाद-उर्वरक की उपलब्धता पर विशेष निगरानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरक उपलब्ध होना चाहिए। कलेक्टर से लेकर कृषि एवं विपणन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी वितरण व्यवस्था पर लगातार नजर रखें। बैठक में कृषि विभाग के सचिव ने बताया कि प्रदेश में खाद की आपूर्ति को लेकर कोई परेशानी नहीं है।
मुख्यमंत्री ने सामान्य वर्षा वाले प्रदेश के 12 जिलों में आनावारी के आंकड़े आने के बाद शीघ्र सर्वे कराने और पात्र किसानों को सरकारी योजनाओं के तहत राहत राशि उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
बैठक में मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह श्री संजय कुमार शुक्ल, अपर मुख्य सचिव संस्कृति श्री शिव शेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त श्री केसी गुप्ता, पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुखबीर सिंह, प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय श्रीमती सोनाली वायंगणकर और एडीजी इंटेलिजेंस श्री अंशुमन यादव सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में इंदौर से संभागायुक्त श्री भास्कर लाक्षाकार, आईजी श्री अनुराग, डीआईजी श्री मनोज कुमार सिंह, आबकारी उपायुक्त श्री इंदर सिंह जामोद, कृषि विभाग के संयुक्त संचालक श्री जितेंद्र सिंह, सहकारिता उपायुक्त श्रीमती वर्षा श्रीवास और कलेक्टर श्री शिवम वर्मा सहित संबंधित अधिकारी शामिल हुए।
कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने बताया कि इंदौर जिले में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता के लिए लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नशे के अवैध कारोबार और नशाखोरी में शामिल लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। स्कूलों, कॉलेजों और छात्रावासों में रोकथाम के लिए शिक्षकों सहित विभिन्न समितियां गठित की गई हैं, जो नियमित रिपोर्ट तैयार कर निगरानी कर रही हैं। छात्रावासों में नशे के विरुद्ध अभिलाषा अभियान भी संचालित किया जा रहा है।
यात्री बसों की सुरक्षा जांच में 11 पर कार्रवाई, 1.20 लाख रुपये जुर्माना वसूला
बिना परमिट इंदौर से गोरखपुर जा रही बस जब्त; इमरजेंसी एग्जिट, अग्निशमन व्यवस्था, फिटनेस और किराया वसूली की हुई जांच
इंदौर, 4 नवंबर 2026। यात्री बसों में सुरक्षा मानकों और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की जांच के लिए परिवहन विभाग ने अभियान तेज कर दिया है। कलेक्टर श्री शिवम वर्मा के निर्देश पर बुधवार को आरटीओ की टीम ने स्टार चौराहे पर विशेष जांच अभियान चलाया। इस दौरान लोक परिवहन वाहनों, विशेषकर ऑल इंडिया टूरिस्ट बसों की जांच की गई।
अभियान में बसों के इमरजेंसी एग्जिट, फायर सेफ्टी सिस्टम और आपात स्थिति में यात्रियों के सुरक्षित बाहर निकलने की व्यवस्था का निरीक्षण किया गया। इसके अलावा ओवरलोडिंग, निर्धारित दर से अधिक किराया वसूली, परमिट, फिटनेस और अन्य जरूरी दस्तावेजों की भी जांच की गई।
जांच के दौरान अलग-अलग बसों में अनियमितताएं, परमिट शर्तों का उल्लंघन और यात्रियों से अधिक किराया वसूले जाने के मामले सामने आए। इन मामलों में 11 बसों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए कुल 1 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। वहीं, इंदौर से गोरखपुर के बीच बिना परमिट संचालित की जा रही एक बस को जब्त कर लिया गया।
चालक-परिचालकों को सुरक्षा नियमों का पालन करने की हिदायत
कार्रवाई के दौरान आरटीओ श्री प्रदीप शर्मा, एआरटीओ श्री राजेश गुप्ता और विभागीय उड़नदस्ता टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने बस चालकों और परिचालकों को यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की समझाइश दी।
उन्हें निर्देश दिए गए कि बसों में किसी भी तरह का ज्वलनशील पदार्थ न ले जाएं। वाहन के सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे रखें और तकनीकी रूप से पूरी तरह दुरुस्त होने पर ही बस का संचालन करें।
परिवहन विभाग द्वारा वाहनों की गति, स्पीड गवर्नर, एचएसआरपी नंबर प्लेट, परमिट और अन्य दस्तावेजों की नियमित जांच की जा रही है। स्कूल और कॉलेज वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग ने वाहन संचालकों से यातायात नियमों और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की है।
(SDNA | सच के साथ, समाज की आवाज़)



