नई दिल्ली। अब तक आपने ट्रेन को बिजली खाते हुए देखा होगा, लेकिन आने वाले समय में कहानी कुछ उलटी हो सकती है। ट्रेन जैसे ही पटरी पर दौड़ेगी, उसके वजन और कंपन से बिजली पैदा होगी। वैज्ञानिकों ने रेलवे ट्रैक की थरथराहट को विद्युत ऊर्जा में बदलने वाली तकनीक विकसित की है। खास बात यह है कि इस बिजली का इस्तेमाल रेलवे ट्रैक की निगरानी करने वाले छोटे-छोटे सेंसरों को चलाने में किया जा सकता है।
ट्रेन के झटके अब नहीं जाएंगे बेकार!
जब कोई भारी ट्रेन पटरी से गुजरती है तो ट्रैक में तेज कंपन और ऊपर-नीचे होने वाली हलचल पैदा होती है। अब तक इस ऊर्जा का अधिकांश हिस्सा बेकार चला जाता था। नई तकनीक इसी कंपन को पकड़कर उसे बिजली में बदलने का काम करती है।
यानी ट्रेन जितनी बार पटरी से गुजरेगी, उतनी बार ट्रैक से ऊर्जा हासिल करने का मौका मिलेगा।
झटके से रोटेशन और रोटेशन से बिजली
इस तकनीक में पटरी की ऊपर-नीचे होने वाली गति को विशेष मैकेनिज्म के जरिए घूर्णन गति में बदला जाता है। इसके बाद यह रोटेशन जनरेटर को चलाता है और बिजली पैदा होती है।
पूरे सिस्टम में मुख्य रूप से वाइब्रेशन कन्वर्जन मॉड्यूल, जनरेटर मॉड्यूल और पावर स्टोरेज मॉड्यूल शामिल हैं। तैयार बिजली को रेक्टिफिकेशन और फिल्टरिंग के बाद सुपरकैपेसिटर में स्टोर किया जा सकता है।
7.44 वॉट तक बिजली, 73.38% एफिशिएंसी
शोध के दौरान इस तकनीक का परीक्षण किया गया। टेस्ट में सिस्टम ने 73.38 प्रतिशत एफिशिएंसी दिखाई और अधिकतम 7.44 वॉट का पीक पावर आउटपुट दर्ज किया गया।
यह मात्रा पूरी ट्रेन या रेलवे स्टेशन को चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और लो-पावर सेंसरों के लिए उपयोगी हो सकती है।
ट्रैक की सुरक्षा पर रहेगी 24 घंटे नजर
रेलवे ट्रैक की निगरानी के लिए लगाए गए सेंसरों को लगातार बिजली की जरूरत होती है। ऐसे में बैटरी बदलने या लंबी वायरिंग की जरूरत कम करने में यह तकनीक मदद कर सकती है।
ट्रेन के गुजरने से पैदा होने वाली ऊर्जा से सेंसरों को पावर देकर ट्रैक से जुड़ा डेटा लगातार निगरानी केंद्र तक भेजा जा सकता है। इससे ट्रैक की स्थिति पर रियल-टाइम नजर रखने की क्षमता बढ़ सकती है।
धूप न हवा, ट्रेन ही बनेगी ऊर्जा का स्रोत!
सोलर पैनल के लिए धूप और विंड टर्बाइन के लिए हवा जरूरी होती है। लेकिन इस तकनीक में ऊर्जा का स्रोत खुद चलती ट्रेन और उससे पैदा होने वाला कंपन है।
हालांकि इसे ट्रेन चलाने के लिए मुख्य बिजली स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने की बात नहीं है। इसका संभावित उपयोग रेलवे के सेंसर, मॉनिटरिंग सिस्टम और छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को ऊर्जा देने में है।
अगर इस तकनीक को बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो रेलवे ट्रैक की निगरानी व्यवस्था में बाहरी बिजली और बैटरी पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह एक नया कदम साबित हो सकता है।
(सद्वार्ता)
ट्रेन दौड़ेगी तो बिजली बनेगी! पटरी के हर झटके में छिपी है ऊर्जा, वैज्ञानिकों ने खोज निकाला कमाल का तरीका
