Tuesday, September 22

न्यूयॉर्क पहुंचते ही अराघची का विरोध, UNGA में ईरान की कूटनीतिक परीक्षा

अमेरिका के साथ तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरानी विदेश मंत्री की मौजूदगी; सीमित आवाजाही और कड़ी निगरानी के बीच दुनिया के सामने तेहरान अपना पक्ष रखने की तैयारी में

न्यूयॉर्क, 22 सितंबर। (SDNA) अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। हालांकि, अमेरिकी धरती पर कदम रखते ही उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। अराघची ईरानी राजनयिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं और महासभा के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों तथा विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत करेंगे।

ईरानी विदेश मंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देशों के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा ईरान के लिए केवल एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं, बल्कि अपनी स्थिति दुनिया के सामने रखने और कूटनीतिक समर्थन जुटाने का महत्वपूर्ण मंच भी बन गई है।

युद्ध के बीच कूटनीति का रास्ता

न्यूयॉर्क पहुंचने से पहले अराघची ने तेहरान में कहा था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल का प्रमुख उद्देश्य दुनिया के सामने ईरान का पक्ष रखना और हालिया हमलों के बाद देश के अधिकारों तथा हितों का बचाव करना है।

ईरान संयुक्त राष्ट्र को ऐसा मंच मानता है, जहां वह अपनी बात वैश्विक समुदाय के सामने रख सकता है। तेहरान की कोशिश है कि सैन्य टकराव के बीच उसकी राजनीतिक और कूटनीतिक स्थिति भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बने।

अराघची के अनुसार, महासभा के मंच का इस्तेमाल ईरानी जनता पर हुए कथित अत्याचारों को दुनिया के सामने रखने और संघर्ष में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी किया जाएगा।

पेजेश्कियान भी पहुंचेंगे न्यूयॉर्क

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचने की उम्मीद है। वह महासभा में ईरान का प्रतिनिधित्व करेंगे और अपने संबोधन में अमेरिका तथा इजरायल के साथ जारी संघर्ष पर तेहरान का पक्ष रख सकते हैं।

राष्ट्रपति का संबोधन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे ईरान की ओर से सीधे वैश्विक समुदाय को राजनीतिक संदेश देने का अवसर मिलेगा। ऐसे में अराघची की कूटनीतिक बैठकों और पेजेश्कियान के संभावित संबोधन को एक ही व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।

वीजा मिला, लेकिन आवाजाही पर कड़ी पाबंदी

ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका ने 17 सितंबर को वीजा मंजूर किया था, लेकिन यह अनुमति सामान्य यात्रा जैसी नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार प्रतिनिधिमंडल की आवाजाही पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं।

ईरानी अधिकारियों को मुख्य रूप से हवाई अड्डे से होटल और वहां से संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय तक सीमित आवाजाही की अनुमति है। प्रतिनिधिमंडल के ठहरने की व्यवस्था मिलेनियम हिल्टन होटल में की गई है।

इस तरह ईरानी प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में मौजूद तो है, लेकिन उसकी गतिविधियों का दायरा बेहद सीमित रखा गया है। यह स्थिति अमेरिका-ईरान संबंधों में मौजूद गहरे अविश्वास को भी दर्शाती है।

विरोध ने बढ़ाई राजनीतिक संवेदनशीलता

अराघची के न्यूयॉर्क पहुंचने के साथ ही विरोध का सामने आना उनके दौरे को और संवेदनशील बना देता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा दुनिया के नेताओं और राजनयिकों के लिए संवाद का मंच है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी अपने आप में राजनीतिक संदेश बन गई है।

एक ओर ईरान अंतरराष्ट्रीय मंच से अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका में उसके प्रतिनिधिमंडल की गतिविधियों पर प्रतिबंध यह संकेत देते हैं कि दोनों देशों के बीच संवाद की गुंजाइश अभी भी बेहद सीमित और तनावपूर्ण है।

UNGA में ईरान की असली चुनौती क्या?

ईरान के सामने चुनौती केवल अपना पक्ष रखने की नहीं है। उसे यह भी दिखाना होगा कि युद्ध और तनाव के बीच वह अंतरराष्ट्रीय समर्थन किस हद तक जुटा सकता है।

अराघची की विभिन्न देशों के अधिकारियों से संभावित मुलाकातें इसी लिहाज से महत्वपूर्ण होंगी। ईरान के लिए यह जरूरी होगा कि वह अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ-साथ उन देशों तक भी पहुंचे जो अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर संतुलित रुख रखते हैं।

दूसरी ओर, अमेरिका भी यह सुनिश्चित करना चाहेगा कि संयुक्त राष्ट्र का मंच ईरान के लिए केवल एकतरफा राजनीतिक प्रचार का माध्यम न बन जाए।

महासभा बना कूटनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच

संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच अक्सर सैन्य शक्ति से अलग कूटनीतिक शक्ति का प्रदर्शन करने का अवसर देता है। ईरान इस मंच के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर सकता है कि सैन्य दबाव के बावजूद वह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और बहुपक्षीय कूटनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

अराघची की मौजूदगी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह सीधे तौर पर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के संपर्क में रहेंगे। वहीं राष्ट्रपति पेजेश्कियान का संभावित संबोधन ईरान की राजनीतिक लाइन को और स्पष्ट कर सकता है।

फिलहाल न्यूयॉर्क में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी एक विरोधाभास को सामने लाती है—एक तरफ संयुक्त राष्ट्र का संवाद और कूटनीति का मंच है, तो दूसरी तरफ उसी मंच तक पहुंचने वाले प्रतिनिधियों पर कड़ी पाबंदियां और सुरक्षा-संबंधी सीमाएं हैं।

ऐसे में इस महासभा में ईरान की सबसे बड़ी परीक्षा यह होगी कि वह युद्ध की परिस्थितियों के बीच अपनी आवाज कितनी प्रभावी ढंग से दुनिया तक पहुंचा पाता है और क्या उसकी कूटनीतिक पहल तनाव कम करने की किसी संभावित राह को खोल सकती है।

(SDNA)