
कैराना की सपा सांसद बोलीं- महिला आगे बढ़ती है तो उसकी काबिलियत से पहले चरित्र, पहनावे और पहचान पर सवाल उठते हैं
शामली, 22 सितंबर। (SDNA) राजनीति में किसी महिला का आगे बढ़ना सिर्फ चुनाव जीतने या पद हासिल करने तक सीमित नहीं होता। सार्वजनिक जीवन में कदम रखने के बाद उसे सामाजिक सोच, लैंगिक पूर्वाग्रह और निजी पहचान से जुड़े सवालों का भी सामना करना पड़ता है। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने महिलाओं के साथ संवाद के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए इसी संघर्ष की ओर ध्यान खींचा।
इकरा हसन ने कहा कि उनकी पहचान एक मुस्लिम महिला और ओबीसी के रूप में भी है और इस वजह से उन्हें कई स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष उनके लिए नया नहीं है, बल्कि राजनीति में आने के बाद भी अलग-अलग रूपों में जारी है।
‘महिला आगे बढ़े तो सवाल उसके काम पर नहीं, चरित्र पर उठते हैं’
सपा सांसद ने कहा कि किसी पुरुष के सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने पर आमतौर पर उसके पहनावे या निजी जीवन को चर्चा का केंद्र नहीं बनाया जाता। लेकिन जब कोई महिला अपनी पहचान बनाती है और आगे बढ़ती है तो उसके काम और उपलब्धियों के बजाय उसके चरित्र, कपड़ों, पहचान और वैवाहिक स्थिति पर सवाल उठने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को कमजोर करने का यह एक ऐसा तरीका है, जिसमें उनकी पेशेवर क्षमता के बजाय उनकी निजी जिंदगी को बहस का विषय बना दिया जाता है।
राजनीति में महिला प्रतिनिधियों के सामने अलग चुनौती
इकरा हसन ने प्रशासनिक व्यवस्था में महिला जनप्रतिनिधियों के साथ होने वाले व्यवहार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई बार महिला प्रतिनिधि जब किसी अधिकारी को निर्देश देती हैं तो अधिकारी सीधे जवाब देने के बजाय किसी अधीनस्थ कर्मचारी से पूछताछ करते हैं।
उनके मुताबिक, यह व्यवहार देखने में मामूली लग सकता है, लेकिन इसके पीछे महिलाओं के नेतृत्व और अधिकारों को लेकर बनी मानसिकता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि समाज को इस सोच से आगे बढ़ने की जरूरत है कि नेतृत्व और निर्णय लेने का अधिकार मुख्य रूप से पुरुषों तक सीमित है।
‘पहले रोकने की कोशिश, फिर चरित्र पर हमला’
सांसद ने अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में किसी महिला को रोकने के लिए कई तरह के हथियार इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें सबसे आसान तरीका उसके चरित्र पर सवाल उठाना होता है।
उन्होंने कहा कि महिला की राजनीतिक भूमिका और उसके निजी जीवन को अलग-अलग देखने की जरूरत है। किसी महिला की वैचारिक या राजनीतिक गतिविधियों का मूल्यांकन उसके काम के आधार पर होना चाहिए, न कि उसके पहनावे या व्यक्तिगत पहचान के आधार पर।
बयान ने फिर छेड़ी पुरानी बहस
इकरा हसन का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर बहस तेज हो गई है। उनके बयान को जहां कुछ लोग महिलाओं के वास्तविक अनुभवों की अभिव्यक्ति बता रहे हैं, वहीं इस पर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
इकरा हसन अपने बेबाक अंदाज और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रुख के लिए जानी जाती हैं। लेकिन इस बार उनका बयान किसी राजनीतिक दल या चुनावी मुद्दे से ज्यादा उस सामाजिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है, जिसमें किसी महिला की योग्यता से पहले उसकी पहचान और निजी जीवन को परखा जाता है।
महिला प्रतिनिधित्व बढ़ने के बावजूद राजनीति और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के सामने मौजूद ऐसी चुनौतियां बताती हैं कि केवल संख्या बढ़ना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक बदलाव तब माना जाएगा, जब महिलाओं के काम, नेतृत्व और निर्णय क्षमता को उनकी पहचान और निजी जीवन से अलग करके देखा जाए।
