Tuesday, September 22

मानसून सत्र का 40 दिन बाद भी औपचारिक समापन नहीं, संसद के इतिहास में बना नया रिकॉर्ड

13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए थे दोनों सदन, अब तक सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र खत्म हुए 40 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इसका औपचारिक समापन अब तक नहीं हुआ है। लोकसभा और राज्यसभा को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, मगर राष्ट्रपति की ओर से सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। लंबे समय तक सत्रावसान लंबित रहने को संसद के कामकाज के लिहाज से असामान्य स्थिति माना जा रहा है।

लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. टी. आचारी के मुताबिक, दोनों सदनों का 40 दिन तक सत्रावसान नहीं होना एक नया रिकॉर्ड है। इससे पहले 2015 में संसद के दोनों सदनों के सत्र का 28 दिन बाद औपचारिक समापन किया गया था। उस समय सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े कानून पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रही थी।

क्या सरकार की कोई बड़ी तैयारी है?

मानसून सत्र का औपचारिक समापन नहीं होने के कारण राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि सरकार बिना नया सत्र बुलाए किसी महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की रणनीति पर विचार कर सकती है।

इसी कड़ी में महिला आरक्षण कानून में संभावित संशोधन को लेकर भी चर्चा सामने आई है। माना जा रहा है कि सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।

परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों में संभावित कमी को लेकर विपक्षी दलों की चिंताएं भी इस बहस का अहम हिस्सा हैं। ऐसी स्थिति में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लोकसभा सीटों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत तक वृद्धि करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है।

सत्रावसान और स्थगन में क्या अंतर?

संसद की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना और सत्र का औपचारिक समापन यानी सत्रावसान, दोनों अलग प्रक्रियाएं हैं। 13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था। आमतौर पर इसके कुछ दिनों के भीतर सत्रावसान की अधिसूचना जारी कर दी जाती है।

मगर इस बार 22 सितंबर की सुबह तक ऐसी अधिसूचना जारी नहीं हुई थी। इससे मानसून सत्र के औपचारिक रूप से समाप्त होने की स्थिति बनी हुई है।

बजट सत्र में भी जल्दी हुआ था सत्रावसान

इससे पहले बजट सत्र 18 अप्रैल को समाप्त हुआ था और केवल दो दिन बाद, 20 अप्रैल को उसका सत्रावसान कर दिया गया था। इसके मुकाबले मानसून सत्र के मामले में 40 दिनों का अंतर असाधारण माना जा रहा है।

संवैधानिक व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति, केंद्र सरकार की सिफारिश पर संसद का सत्र बुलाते हैं और उसका सत्रावसान करते हैं। सामान्य तौर पर संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के अंतिम सप्ताह के आसपास शुरू होता है और क्रिसमस से पहले समाप्त हो जाता है।

ऐसे में मानसून सत्र के औपचारिक समापन में हो रही देरी ने संसद की प्रक्रिया के साथ-साथ सरकार की आगामी विधायी रणनीति को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है।

(SDNA)