Tuesday, September 22

रेजीनगर उपचुनाव से RSP उम्मीदवार ने वापस लिया नाम, पारंपरिक चुनाव चिह्न न मिलने पर आयोग पर उठाए सवाल

‘कुदाल-फावड़ा’ सिंबल की अनुमति नहीं मिलने का दावा, RSP ने लगाया तकनीकी आपत्ति की आड़ में भेदभाव का आरोप

कोलकाता। (SDNA) पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में वाम मोर्चे के भीतर चुनावी समीकरण अचानक बदल गया है। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) ने अपने उम्मीदवार विकास चंद्र मिश्रा का नाम चुनाव मैदान से वापस ले लिया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग की ओर से उसके पारंपरिक ‘कुदाल और फावड़ा’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिलने के कारण यह फैसला लेना पड़ा।

रेजीनगर सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। नामांकन पत्रों की जांच के बाद RSP को कथित तौर पर बताया गया कि वह अपने पारंपरिक चुनाव चिह्न पर चुनाव नहीं लड़ सकती। पार्टी के अनुसार, इसके स्थान पर उसे ‘बाल्टी’ चुनाव चिह्न आवंटित करने की बात कही गई थी।

‘तकनीकी खामी’ का दिया गया हवाला

RSP के वरिष्ठ नेता मनोज बंदोपाध्याय ने कहा कि पार्टी को एक तकनीकी कमी का हवाला देकर उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न से वंचित किया गया। उनका कहना है कि उम्मीदवार का नाम ईवीएम पर मौजूद रहने के बावजूद पार्टी ऐसे चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना नहीं चाहती, जिसे उसके मतदाता पारंपरिक तौर पर पहचानते नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि उम्मीदवार विकास चंद्र मिश्रा ने प्रचार भी शुरू कर दिया था, लेकिन चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद के बाद नाम वापस लेने का निर्णय लिया गया।

RSP ने लगाया पक्षपात का आरोप

पार्टी के राज्य सचिव तपन होरे ने चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों पर पक्षपात और साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

RSP का कहना है कि ‘कुदाल और फावड़ा’ उसके लिए महज एक चुनावी निशान नहीं है, बल्कि लंबे राजनीतिक संघर्ष और संगठनात्मक पहचान से जुड़ा प्रतीक है। इसलिए इस चिह्न के बिना चुनाव लड़ना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से उचित नहीं होगा।

पार्टी ने पूरे मामले में कानूनी सलाह लेने की बात कही है। RSP के नेताओं के अनुसार, जरूरत पड़ने पर इस मामले को अदालत में भी चुनौती दी जा सकती है।

सीट को लेकर पहले से था वाम दलों में मतभेद

रेजीनगर विधानसभा सीट पर वाम मोर्चे के भीतर शुरुआत से ही स्थिति सहज नहीं थी। RSP इस सीट पर अपना दावा कर रही थी, जबकि वाम मोर्चे की प्रमुख सहयोगी CPI(M) ने यहां अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया।

इसके बाद RSP ने विकास चंद्र मिश्रा को उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतार दिया था। इससे मुकाबला विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ खेमे के बीच रहने के बजाय वाम दलों के बीच भी दिलचस्प हो गया था।

अब RSP उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद रेजीनगर में CPI(M) वाम मोर्चे की ओर से औपचारिक रूप से चुनाव मैदान में बची प्रमुख पार्टी है। ऐसे में RSP के फैसले से उपचुनाव की राजनीतिक तस्वीर और समीकरण दोनों बदलने की संभावना है।

(पीटीआई इनपुट के साथ)