Sunday, October 11

OTT पर अश्लील सामग्री को लेकर सवाल, डिजिटल मीडिया नियमों के प्रभावी पालन की मांग

Nivrah Foundation ने केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से OTT प्लेटफॉर्म पर Digital Media Ethics Code के अनुपालन की प्रभावी निगरानी और शिकायतों पर कार्रवाई की मांग की

इंदौर, 24 सितंबर। (SDNA)
OTT प्लेटफॉर्म के तेजी से विस्तार के साथ मनोरंजन के विकल्प तो बढ़े हैं, लेकिन डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध अश्लील, यौन-संबंधी और आयु-अनुपयुक्त सामग्री को लेकर सामाजिक चिंता भी बढ़ रही है। इसी मुद्दे को लेकर Nivrah Foundation ने केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के समक्ष डिजिटल मीडिया नियमों के प्रभावी अनुपालन और OTT प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित सामग्री की निगरानी को लेकर अपनी चिंता दर्ज कराई है।

फाउंडेशन की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संस्था के संस्थापक डॉ. विनायक अशोक लूनिया ने डिजिटल सामग्री से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के Digital Media Division के अधिकारियों से ई-मेल के माध्यम से पत्राचार किया है। इसमें OTT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऐसी सामग्री के संबंध में कानून और Digital Media Ethics Code के तहत प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

OTT के लिए पहले से मौजूद है नियामक ढांचा

भारत में Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के Part III के अंतर्गत OTT प्लेटफॉर्म यानी Online Curated Content के लिए व्यवस्था निर्धारित है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के Digital Media Division के अनुसार, इन नियमों में OTT प्लेटफॉर्म के लिए Code of Ethics और तीन-स्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था का प्रावधान है।

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नियमों के तहत OTT सामग्री को पांच आयु-आधारित श्रेणियों में वर्गीकृत करने, कंटेंट के साथ संबंधित descriptor प्रदर्शित करने और दर्शकों को सामग्री की प्रकृति के बारे में जानकारी देने की व्यवस्था है। अधिक आयु-सीमा वाली सामग्री तक बच्चों की पहुंच रोकने के लिए उचित access-control measures अपनाने का भी प्रावधान है।

मंत्रालय की Digital Media Division ही इन नियमों के उस हिस्से का प्रशासन करती है जो OTT प्लेटफॉर्म और डिजिटल समाचार प्रकाशकों से संबंधित है। नियमों के उल्लंघन के लिए तीन स्तरों वाली grievance redressal व्यवस्था भी निर्धारित है।

सवाल नियमों की मौजूदगी का नहीं, पालन की प्रभावशीलता का

Nivrah Foundation का कहना है कि डिजिटल मीडिया के लिए नियम और आचार संहिता मौजूद होने के बावजूद यदि आयु-अनुपयुक्त या कानून के दायरे में आने वाली सामग्री दर्शकों तक पहुंचती है, तो उसके नियमन और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

संस्था ने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि OTT प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित सामग्री में भारतीय कानूनों और निर्धारित Code of Ethics का प्रभावी पालन हो तथा शिकायतों पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाए।

मंत्रालय द्वारा जून 2026 में जारी एक advisory में भी डिजिटल मीडिया प्रकाशकों से भारतीय कानूनों और IT Rules, 2021 के Code of Ethics के अनुपालन का पालन करने की बात दोहराई गई है। मंत्रालय ने इसी अवधि में promotional और publicity material में classification rating से संबंधित अलग advisory भी जारी की थी।

IT Act में भी अश्लील इलेक्ट्रॉनिक सामग्री पर प्रावधान

डिजिटल सामग्री से संबंधित कानूनी ढांचे में Information Technology Act, 2000 भी महत्वपूर्ण है। अधिनियम की धारा 67 इलेक्ट्रॉनिक रूप में obscene material के प्रकाशन या transmission से संबंधित दंड का प्रावधान करती है। वहीं धारा 67A sexually explicit act या conduct वाली सामग्री के प्रकाशन अथवा transmission से संबंधित प्रावधान करती है।

इसलिए OTT पर उपलब्ध प्रत्येक आपत्तिजनक सामग्री को स्वतः अवैध मानना उचित नहीं होगा। किसी सामग्री पर कानूनी कार्रवाई उसकी प्रकृति, लागू कानून, संबंधित नियमों और परिस्थितियों के आधार पर निर्धारित होती है। लेकिन जहां सामग्री कानून का उल्लंघन करती हो, वहां नियामक और कानूनी व्यवस्था के प्रभावी उपयोग का प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है।

बच्चों तक पहुंच को लेकर विशेष चिंता

Nivrah Foundation ने डिजिटल मनोरंजन के बच्चों और किशोरों पर संभावित प्रभाव को भी महत्वपूर्ण विषय बताया है। मोबाइल फोन और इंटरनेट की आसान उपलब्धता के कारण बच्चे ऐसी सामग्री के संपर्क में आ सकते हैं, जिसे नियमों के अनुसार अधिक आयु वर्ग के लिए वर्गीकृत किया गया हो।

IT Rules, 2021 में भी बच्चे को 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है तथा उच्च आयु-वर्ग वाली OTT सामग्री तक बच्चों की पहुंच सीमित करने के लिए access-control mechanism का प्रावधान किया गया है।

फाउंडेशन का मानना है कि केवल कंटेंट को वर्गीकृत कर देना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखा जाना चाहिए कि आयु-आधारित नियंत्रण वास्तविक उपयोग में कितने प्रभावी हैं और शिकायतों के सामने आने पर संबंधित प्लेटफॉर्म कितनी तेजी से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हैं।

Nivrah Foundation ने निगरानी मजबूत करने की मांग उठाई

Nivrah Foundation के निदेशक विशाल जैन ने बताया कि डॉ. विनायक अशोक लूनिया लंबे समय से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। उनके अनुसार डिजिटल माध्यमों पर तेजी से बढ़ती सामग्री को देखते हुए मौजूदा कानूनी और नियामक व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य किसी विशेष OTT प्लेटफॉर्म या किसी एक प्रकार की मनोरंजन सामग्री को निशाना बनाना नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों पर लागू कानून और आचार संहिता के पालन को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।

फाउंडेशन की मांग है कि सरकार OTT प्लेटफॉर्मों पर लागू Digital Media Ethics Code के अनुपालन की निगरानी को और प्रभावी बनाए, शिकायतों की प्रक्रिया को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाए तथा जहां सामग्री भारतीय कानूनों का उल्लंघन करती हो, वहां कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करे।

डिजिटल मनोरंजन के विस्तार के साथ बढ़ी जिम्मेदारी

OTT प्लेटफॉर्म ने दर्शकों को भाषाई, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनोरंजन की बड़ी दुनिया उपलब्ध कराई है। इसके साथ रचनात्मक स्वतंत्रता, दर्शकों की पसंद और डिजिटल सुरक्षा के बीच संतुलन भी महत्वपूर्ण हो गया है।

ऐसे में आवश्यकता केवल सामग्री पर रोक लगाने की बहस तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि आयु-आधारित वर्गीकरण, प्रभावी parental control, स्पष्ट content descriptors, शिकायत निवारण और कानून के समान अनुपालन जैसे उपायों को मजबूत करने की है।

Nivrah Foundation का पत्राचार इसी व्यापक मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करता है कि डिजिटल मनोरंजन के बढ़ते प्रभाव के दौर में नियमों का निर्माण जितना आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण उनका निष्पक्ष और प्रभावी क्रियान्वयन भी है।

(SDNA)