
नई दिल्ली | 24 सितंबर 2026 | SDNA
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूचियों को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़कर गंभीर आरोप लगाए।
‘वोट चोरी’ के आरोप को फिर उठाया
राहुल गांधी ने अपने पुराने ‘वोट चोरी’ के आरोप को दोहराते हुए कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाताओं के वोट की सुरक्षा करना है। उनका आरोप था कि यदि चुनाव में वोटों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं तो उसका असर केवल चुनाव परिणाम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे संविधान, कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
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उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए कुछ विधानसभा चुनावों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। राहुल गांधी ने इन दावों के आधार पर मौजूदा व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की मांग की। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती।
एंटी-इंकम्बेंसी पर उठाया सवाल
राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति में सत्ता-विरोधी रुझान यानी एंटी-इंकम्बेंसी का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकप्रियता के दौर के बावजूद कुछ समय बाद सरकारों को सत्ता-विरोधी माहौल का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के राजनीतिक इतिहास में सत्ता परिवर्तन और सत्ता-विरोधी रुझान देखने को मिले हैं, तो मौजूदा परिस्थितियों में यह प्रवृत्ति कुछ राजनीतिक दलों के मामले में अलग क्यों दिखाई देती है। उन्होंने इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी का भी उल्लेख किया।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से सवाल उठाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
चुनाव आयोग की ओर से हालांकि कहा गया है कि आयोग के भीतर लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक समीक्षा नियमित प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR समेत उसके फैसलों को कानूनी आधार प्राप्त है और आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
‘वोट से कानून और संस्थाओं तक’ की कड़ी
राहुल गांधी ने अपने तर्क को वोट, संविधान, कानून और संस्थाओं के बीच संबंध से जोड़ते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की शुरुआत नागरिक के वोट से होती है। उनके मुताबिक, यदि मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं तो उसका असर आगे बनने वाले कानूनों और संस्थागत फैसलों पर भी पड़ता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कथित तौर पर गलत तरीके से चुने गए सांसद यदि कानून बनाते हैं तो उस पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े होते हैं। राहुल गांधी ने इसे ‘वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी’ की कड़ी के रूप में पेश किया।
लोकतंत्र पर गंभीर चिंता का दावा
राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा विवाद को केवल राजनीतिक दलों के बीच मतभेद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह हर नागरिक के मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़ा विषय है।
इस बीच चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं और पिछली SIR मतदाता सूची में नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध है। आयोग स्वयं को चुनाव प्रक्रिया संचालित करने वाली स्वायत्त संवैधानिक संस्था बताता है।
SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब विवाद का केंद्र चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुद्धता और आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया बना हुआ है।



