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शी जिनपिंग के भव्य स्वागत पर ब्रह्मा चेलानी की टिप्पणी, ट्रंप की चीन नीति पर उठे सवाल

नई दिल्ली | 24 सितंबर 2026 | SDNA

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए असामान्य और भव्य स्वागत ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा तेज कर दी है। करीब एक दशक से अधिक समय बाद अमेरिका पहुंचे शी जिनपिंग का ट्रंप ने ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। इस दौरान रेड कार्पेट, सम्मान गार्ड, दोनों देशों के राष्ट्रगान और सैन्य फ्लाईपास्ट जैसे कार्यक्रम हुए।

इसी घटनाक्रम पर भारतीय रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने ट्रंप की विदेश नीति को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में चीन के राष्ट्रपति के स्वागत को ट्रंप की कूटनीतिक शैली से जोड़ते हुए कहा कि इससे उनके आलोचकों द्वारा लगाए जाने वाले आरोपों को बल मिलता है। यह चेलानी का आकलन है, न कि अमेरिका की आधिकारिक नीति पर कोई निष्कर्ष।

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ट्रंप ने खुद एयरबेस पहुंचकर किया स्वागत

शी जिनपिंग 23 सितंबर को अमेरिका पहुंचे। प्रोटोकॉल के लिहाज से खास बात यह रही कि ट्रंप उनके व्हाइट हाउस पहुंचने का इंतजार करने के बजाय ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पहुंचे और वहां चीनी राष्ट्रपति तथा उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। अमेरिकी प्रशासन ने पहले ही इस विशेष स्वागत कार्यक्रम की घोषणा की थी।

शी की यात्रा का मुख्य कार्यक्रम 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ बातचीत है। दोनों देशों के बीच व्यापार, दुर्लभ खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ताइवान और अन्य वैश्विक मुद्दे चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल हैं।

ब्रह्मा चेलानी ने ट्रंप की शैली पर उठाए सवाल

ब्रह्मा चेलानी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि ट्रंप ऐसे नेताओं के प्रति अलग रुख अपनाते हैं, जिनके साथ अमेरिका के रणनीतिक मतभेद हैं। उनके अनुसार, शी जिनपिंग के लिए किया गया स्वागत इस व्यापक विदेश नीति की मिसाल के तौर पर देखा जा सकता है।

चेलानी ने ट्रंप की कूटनीति को प्रभाव और दबाव के इस्तेमाल से जोड़ते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति उन देशों और नेताओं के साथ अलग-अलग तरीके से व्यवहार करते हैं, जिनसे अमेरिका के हित जुड़े हैं। हालांकि, ये टिप्पणियां चेलानी का विश्लेषण हैं और इन्हें अमेरिकी सरकार की आधिकारिक स्थिति के रूप में नहीं देखा जा सकता।

अमेरिका-चीन रिश्तों में तनाव के बीच अहम मुलाकात

ट्रंप और शी के बीच मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और चीन के रिश्तों में व्यापार, तकनीक, एआई, दुर्लभ खनिज और ताइवान जैसे मुद्दों पर प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। इसके बावजूद दोनों देश संवाद के जरिए रिश्तों को स्थिर रखने की कोशिश कर रहे हैं। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, दोनों पक्ष प्रतिस्पर्धा के बीच संवाद बनाए रखने और रिश्तों में और गिरावट रोकने पर जोर दे रहे हैं।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप का लक्ष्य चीन के साथ व्यापार और अन्य आर्थिक मुद्दों पर प्रगति करना है, जबकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता अब भी कायम है।

भारत के संदर्भ में भी ट्रंप की नीतियों पर टिप्पणी

चेलानी ने अपनी टिप्पणी में भारत के साथ ट्रंप प्रशासन के व्यवहार का भी संदर्भ दिया। उन्होंने भारत से जुड़े टैरिफ और रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिकी दबाव का उल्लेख करते हुए इसे चीन के प्रति अमेरिकी रुख से तुलना के संदर्भ में देखा।

हालांकि, अमेरिका-भारत संबंधों और अमेरिका-चीन संबंधों की परिस्थितियां अलग हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, तकनीक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के साथ-साथ कई मुद्दों पर मतभेद भी मौजूद हैं। इसलिए किसी एक कूटनीतिक घटना से दोनों रिश्तों की पूरी तस्वीर निकालना उचित नहीं होगा।

शी की यात्रा का मकसद क्या?

शी जिनपिंग की इस यात्रा को अमेरिका-चीन संबंधों में संवाद बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। चीनी राष्ट्रपति ने अमेरिका पहुंचने के बाद दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार के रूप में काम करने की जरूरत बताई। वहीं अमेरिकी पक्ष व्यापार और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत के जरिए अपने हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

ऐसे में शी का भव्य स्वागत जहां कूटनीतिक प्रतीकवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं वास्तविक महत्व दोनों नेताओं की बैठकों में व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर होने वाली बातचीत के नतीजों का रहेगा।