
नई दिल्ली, 27 सितंबर 2026। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज और उसके भीतर कथित मतभेदों की खबरों ने एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है। इसी पूरे मामले को लेकर पत्रकार रितिका चोपड़ा ने कई अहम पहलुओं पर बात की है। जनसत्ता द्वारा प्रकाशित वीडियो में उन्होंने SIR से जुड़े घटनाक्रम और चुनाव आयोग के भीतर उठे कथित सवालों की पूरी पृष्ठभूमि सामने रखी।
रितिका चोपड़ा की रिपोर्टिंग के बाद यह सवाल चर्चा में आया कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच SIR सहित कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद सामने आए थे।
कई फैसलों पर कथित तौर पर दर्ज हुई आपत्तियां
रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से पिछले कुछ महीनों के दौरान कई मामलों में आधिकारिक तौर पर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इनमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने के साथ-साथ चुनावी डेटा तथा मतदाता सूची से जुड़े तकनीकी एवं प्रशासनिक विषय शामिल बताए गए।
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SIR को लेकर भी आयोग के भीतर प्रक्रिया और उससे जुड़े कुछ निर्णयों पर सवाल उठने की बात सामने आई। खास तौर पर नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े Form-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी कथित तौर पर आपत्ति दर्ज होने की बात कही गई।
चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर पर भी चर्चा
पूरे मामले में चुनावी सॉफ्टवेयर, मतदाता डेटा और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल सामने आए। रिपोर्टिंग के दौरान सामने आए दस्तावेजों और घटनाक्रम के आधार पर चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए गए।
बताया गया कि कुछ मामलों में आपत्तियां उच्च स्तर तक पहुंचाई गईं। इसी वजह से आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया और आपसी समन्वय को लेकर राजनीतिक एवं सार्वजनिक स्तर पर चर्चा तेज हुई।
कई महीने बाद हुई पूर्ण बैठक
मामले में उस समय और चर्चा बढ़ गई, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण बैठक होने की जानकारी सामने आई। बैठक में SIR सहित आयोग के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि SIR से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय आयोग ने सामूहिक रूप से लिए हैं। आयोग ने आंतरिक मतभेद की खबरों को लेकर अपनी स्थिति भी सामने रखी है और कहा है कि प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
SIR पर क्यों बढ़ी बहस?
SIR का सीधा संबंध मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण से है। इसी कारण इसके दायरे, प्रक्रिया, दस्तावेजों की आवश्यकता और मतदाताओं के नामों से जुड़े निर्णयों को लेकर राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठते रहे हैं।
ऐसे में चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति की खबरों ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है। एक तरफ रिपोर्टिंग में अधिकारियों की कथित आपत्तियों का उल्लेख किया गया है, वहीं आयोग ने महत्वपूर्ण फैसलों में सामूहिक सहमति की बात कही है।
जनसत्ता द्वारा प्रकाशित वीडियो में रितिका चोपड़ा ने SIR से जुड़े इसी पूरे घटनाक्रम, आयोग की कार्यप्रणाली और सामने आए कथित मतभेदों की पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा की है।
(SDNA)



