
UNGA में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख करने पर विदेश मंत्रालय ने जताई आपत्ति; रणधीर जायसवाल बोले- मामला भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा
नई दिल्ली, 29 सितंबर। (SDNA) संयुक्त राष्ट्र महासभा में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने को लेकर भारत ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन की टिप्पणी पर स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़े मामलों में किसी बाहरी पक्ष की भूमिका का कोई आधार नहीं है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान एर्दोगन की टिप्पणी से जुड़े सवाल पर कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्की के राष्ट्रपति द्वारा भारत और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों को खारिज करता है। उन्होंने इसे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से संबंधित विषय बताया।
22 सितंबर को UNGA में किया था कश्मीर का उल्लेख
एर्दोगन ने 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के संबोधन में दक्षिण एशिया के विवादों का उल्लेख करते हुए कश्मीर मुद्दे को भी उठाया था। उन्होंने कहा था कि क्षेत्र में विवादों का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए और इसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा संबंधित प्रस्तावों के दायरे में संवाद जरूरी है।
📢 SD News Agency से जुड़ें और पाएं हर खबर का अपडेट अपने मोबाइल पर!
देश-दुनिया, राजनीति, समाज, व्यापार, प्रदेश और स्थानीय समाचारों की ताजा एवं महत्वपूर्ण खबरें सीधे अपने मोबाइल WhatsApp पर प्राप्त करते रहें।
📰 SD News Agency के WhatsApp ग्रुप से जुड़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और ग्रुप से जुड़ जाएं।
👉 WhatsApp Group से जुड़ने के लिए क्लिक करें:
SD News Agency WhatsApp Group से जुड़ें
SD News Agency — खबर वही, जो आपके लिए जरूरी है।
भारत लंबे समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करने की स्थिति व्यक्त करता रहा है। इसी संदर्भ में विदेश मंत्रालय की ताजा प्रतिक्रिया में भी भारत ने बाहरी हस्तक्षेप के प्रति अपना रुख दोहराया है।
भारत ने संप्रभुता को बताया मुख्य आधार
जायसवाल की प्रतिक्रिया का केंद्र भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता रही। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित विषय भारत के अधिकार क्षेत्र और संप्रभुता से जुड़े हैं, इसलिए इस मामले पर किसी बाहरी पक्ष की भूमिका स्वीकार्य नहीं है।
तुर्की के रुख पर पहले भी सामने आ चुका है मतभेद
कश्मीर मुद्दे पर तुर्की की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर की गई टिप्पणियां पहले भी भारत की आपत्ति का विषय रही हैं। मौजूदा घटनाक्रम में एक बार फिर दोनों देशों के रुख में अंतर सामने आया है। तुर्की की ओर से कश्मीर पर बातचीत और बहुपक्षीय संदर्भों की बात की गई, जबकि भारत ने इसे अपनी संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा विषय बताते हुए बाहरी पक्ष की भूमिका को अस्वीकार किया है।
इस घटनाक्रम के बीच भारत-तुर्की संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति पर भी नजर बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र में विभिन्न देशों के नेताओं की ओर से दक्षिण एशिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं।



