
इंडिया पोस्ट और कूरियर कंपनियों के नाम पर फर्जी SMS-WhatsApp भेजकर बनाया जा रहा दबाव; ₹10 से ₹50 के मामूली शुल्क के बहाने कार्ड, नेट बैंकिंग और UPI की गोपनीय जानकारी हासिल करने का खेल
जयपुर | SDNA
आपके मोबाइल पर अगर अचानक “आपका पार्सल गलत पते के कारण होल्ड पर है”, “एड्रेस अपडेट नहीं किया तो पार्सल वापस चला जाएगा” या “डिलीवरी रोक दी गई है, तुरंत लिंक पर क्लिक करें” जैसा संदेश आए तो जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं।
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा R4C ने इंडिया पोस्ट, स्पीड पोस्ट और प्रमुख कूरियर एजेंसियों के नाम पर चल रहे ऐसे ही एक साइबर फ्रॉड को लेकर आमजन को विशेष रूप से सतर्क किया है। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी फर्जी SMS, WhatsApp मैसेज, ईमेल और फोन कॉल के जरिए लोगों को भरोसे में लेकर उन्हें फिशिंग लिंक या संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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शुरुआत सिर्फ कुछ रुपये से, निशाना बैंक खाते पर
इस साइबर ठगी का तरीका बेहद साधारण दिखाई देता है। ठग पहले पीड़ित को बताते हैं कि उसका पार्सल गलत पते के कारण रोक दिया गया है। इसके बाद एड्रेस अपडेट या डिलीवरी दोबारा शुरू कराने के नाम पर ₹10, ₹25 या ₹50 जैसी छोटी राशि का भुगतान करने को कहा जाता है।
यही छोटी रकम असल जाल का हिस्सा होती है।
भुगतान प्रक्रिया के दौरान यदि कोई व्यक्ति डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर, CVV, नेट बैंकिंग पासवर्ड, OTP या UPI PIN जैसी गोपनीय जानकारी साझा कर देता है, तो उसके बैंक खाते से बड़ी रकम निकाले जाने का खतरा पैदा हो सकता है।
असली वेबसाइट जैसी दिखती है फर्जी साइट
R4C के अनुसार ठग ऐसे लिंक भेजते हैं जो देखने में वास्तविक डाक या कूरियर कंपनी की वेबसाइट जैसे लग सकते हैं। लिंक खोलने पर व्यक्ति से पता अपडेट करने या शुल्क जमा करने को कहा जाता है।
कुछ मामलों में संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करवाने की कोशिश भी की जाती है। ऐसी फाइल मोबाइल में इंस्टॉल होने पर डिवाइस की सुरक्षा और निजी जानकारी के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।
इसलिए केवल यह देखकर कि वेबसाइट या संदेश पर किसी प्रसिद्ध डाक या कूरियर कंपनी का नाम और लोगो दिखाई दे रहा है, उसे वास्तविक नहीं माना जाना चाहिए।
एक क्लिक से मोबाइल की सुरक्षा खतरे में
साइबर अपराधियों का अगला हथियार संदिग्ध मोबाइल ऐप हो सकता है। किसी अनजान लिंक से APK डाउनलोड कर इंस्टॉल करना मोबाइल की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
पुलिस ने आमजन को सलाह दी है कि किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर AnyDesk, TeamViewer जैसे रिमोट एक्सेस या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें।
पार्सल ट्रैक करना हो तो खुद वेबसाइट खोलें
संदिग्ध संदेश में दिए लिंक पर क्लिक करने के बजाय संबंधित डाक या कूरियर सेवा की आधिकारिक वेबसाइट खुद ब्राउजर में खोलकर पार्सल की स्थिति जांचना सुरक्षित तरीका है।
इंडिया पोस्ट की सेवा से संबंधित जानकारी के लिए पुलिस ने आधिकारिक वेबसाइट indiapost.gov.in का उपयोग करने की सलाह दी है।
किसी वेबसाइट का URL ध्यान से देखना भी जरूरी है। केवल वेबसाइट का नाम या लोगो देखकर भरोसा करने के बजाय उसके वास्तविक डोमेन और वेबसाइट की प्रामाणिकता जांचनी चाहिए।
‘एड्रेस अपडेट फीस’ के नाम पर सावधान
पुलिस की एडवाइजरी में खास तौर पर छोटे ऑनलाइन भुगतान वाले इस पैटर्न से सावधान रहने को कहा गया है। किसी संदेश में मामूली रकम की मांग होना इस बात की गारंटी नहीं है कि संदेश वास्तविक है।
छोटी रकम मांगना ही ठगी की सबसे बड़ी चाल हो सकती है, क्योंकि कम राशि देखकर व्यक्ति सामान्यतः ज्यादा जांच-पड़ताल नहीं करता।
बैंकिंग जानकारी का मतलब चाबी सौंपना
किसी भी परिस्थिति में अनजान व्यक्ति या संदिग्ध वेबसाइट को OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV, कार्ड डिटेल या नेट बैंकिंग पासवर्ड नहीं देना चाहिए।
विशेष रूप से यह समझना जरूरी है कि बैंकिंग लेन-देन के लिए आने वाला OTP और UPI PIN अत्यंत संवेदनशील जानकारी है। इन्हें साझा करने के बाद ठगी होने की स्थिति में नुकसान तेजी से बढ़ सकता है।
कॉल फॉरवर्डिंग पर भी नजर रखें
राजस्थान पुलिस ने मोबाइल में कॉल फॉरवर्डिंग स्टेटस की समय-समय पर जांच करने की सलाह दी है। किसी अनजान नंबर या संदिग्ध संदेश के बाद मोबाइल की सेटिंग्स में किसी असामान्य बदलाव की जानकारी मिले तो उसे गंभीरता से लें।
संदिग्ध नंबरों और संदेशों को ब्लॉक और रिपोर्ट करना भी उपयोगी सुरक्षा कदम हो सकता है।
ठगी हो जाए तो ‘बाद में’ नहीं, तुरंत शिकायत
अगर किसी व्यक्ति के खाते से साइबर ठगी के जरिए रकम निकल गई है, तो शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
राजस्थान पुलिस ने तत्काल सहायता के लिए:
- साइबर हेल्पलाइन : 1930
- साइबर हेल्पडेस्क : 9256001930 / 9257510100
- नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल : cybercrime.gov.in
पर शिकायत करने की सलाह दी है। इसके अलावा नजदीकी पुलिस स्टेशन में भी सूचना दी जा सकती है।
खबर के पीछे का अर्थ : साइबर ठगी अब डर से नहीं, भरोसे से खेल रही है
इस पूरे फ्रॉड का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ठग लोगों को सीधे बैंक या निवेश के नाम पर संपर्क नहीं करते। वे पहले एक सामान्य रोजमर्रा की स्थिति पैदा करते हैं—पार्सल, डिलीवरी और पता सुधार।
यही कारण है कि व्यक्ति को संदेश असामान्य नहीं लगता।
इसके बाद ₹10 या ₹20 जैसी छोटी रकम भरोसा और जल्दबाजी पैदा करने का माध्यम बनती है। वास्तविक खतरा भुगतान की रकम से कहीं बड़ा हो सकता है, क्योंकि इसी प्रक्रिया में ठग संवेदनशील बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
आने वाले समय में डिजिटल सावधानी ही पहली सुरक्षा
मोबाइल पर आने वाला हर संदेश वास्तविक नहीं है और किसी प्रसिद्ध संस्था का नाम दिखाई देना उसकी प्रामाणिकता की गारंटी नहीं है।
डिजिटल दुनिया में सुरक्षित व्यवहार का सबसे सरल नियम यही है—संदेश में दिए लिंक से सेवा लेने के बजाय आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक ऐप स्वयं खोलें।
यदि पार्सल वास्तव में आपके नाम है तो उसकी जानकारी आधिकारिक माध्यम से भी उपलब्ध होगी। कुछ सेकंड की जांच आपको बड़ी वित्तीय परेशानी से बचा सकती है।
(SDNA)



