Friday, October 9

रूसी तेल से दूरी या बाजार की मजबूरी? महंगी कीमतों के बीच भारत ने बदला खरीद का रुख

नवंबर डिलीवरी के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने घटाई खरीद; चीन की बढ़ती मांग और खाड़ी देशों से प्रतिस्पर्धी आपूर्ति बनी बड़ी वजह

नई दिल्ली। (SDNA) रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अलग पहचान बनाने वाला भारत अब अपनी खरीद रणनीति में बदलाव करता दिखाई दे रहा है। भारतीय रिफाइनरियों ने नवंबर में डिलीवरी के लिए रूसी क्रूड की खरीद में कटौती की है। हालांकि इसे सीधे तौर पर अमेरिका के दबाव या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ संबंधी चेतावनियों का परिणाम मानना जल्दबाजी होगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसके पीछे सबसे बड़ी वजह रूसी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैकल्पिक स्रोतों से मिल रही प्रतिस्पर्धी आपूर्ति है।

जब छूट कम हुई तो आकर्षण भी घटा

रूस का यूराल्स क्रूड लंबे समय से भारतीय रिफाइनरियों के लिए आकर्षक रहा है, क्योंकि यह कई मौकों पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में भारी छूट पर उपलब्ध हुआ। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। सूत्रों के मुताबिक, रूसी तेल की कीमत डेटेड ब्रेंट के मुकाबले 10 डॉलर प्रति बैरल से अधिक के प्रीमियम तक पहुंच गई है।

इससे रूस से मिलने वाला आर्थिक फायदा काफी कम हो गया है। दूसरी ओर, मध्य पूर्व के उत्पादक अपेक्षाकृत कम दूरी और कम परिवहन लागत के कारण भारतीय खरीदारों के लिए फिर से आकर्षक विकल्प बन रहे हैं।

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चीन की बढ़ती मांग ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा

रूसी कच्चे तेल के बाजार में भारत को अब चीन से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। चीन की ओर से रूसी क्रूड की खरीद बढ़ने के कारण उन बैरल के लिए मुकाबला तेज हुआ है, जो पहले भारतीय रिफाइनरियों को आसानी से उपलब्ध हो जाते थे।

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की ईरानी तेल तक सीमित होती पहुंच ने भी रूसी क्रूड की मांग बढ़ाने में भूमिका निभाई है। इसका सीधा असर एशियाई बाजार में रूसी तेल की कीमतों पर पड़ा है।

आयात में रूस की हिस्सेदारी घटी

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और रूस लंबे समय से उसका सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है। लेकिन हाल के महीनों में रूसी तेल की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में भारतीय क्रूड आयात में रूस की हिस्सेदारी जुलाई के करीब 56 प्रतिशत से घटकर लगभग 35 प्रतिशत रह गई। वहीं, 4 अक्टूबर तक के चार सप्ताह में रूस से भारत आने वाली औसत आपूर्ति करीब 3.10 लाख बैरल प्रतिदिन रही, जो मार्च 2022 के बाद सबसे निचले स्तरों में बताई जा रही है।

क्या यह अमेरिका के दबाव का असर है?

रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका और भारत के बीच लगातार चर्चा होती रही है। अमेरिकी प्रतिबंधों और संभावित दंडात्मक टैरिफ के जोखिम ने भारतीय कंपनियों के लिए रूस से तेल खरीदने के जोखिम को जरूर बढ़ाया है।

लेकिन मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, नई दिल्ली ने भारतीय रिफाइनरियों को अमेरिकी टैरिफ के डर से रूस से तेल खरीद घटाने का कोई सीधा निर्देश नहीं दिया है। ऐसे में मौजूदा बदलाव को केवल राजनीतिक दबाव का परिणाम मानने के बजाय बाजार आधारित निर्णय के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

खाड़ी के तेल की फिर बढ़ी मांग

मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए विकल्प और बढ़ा दिए हैं। फारस की खाड़ी से आने वाले तेल को अपेक्षाकृत कम दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे शिपिंग लागत भी नियंत्रित रहती है।

ऐसे समय में जब टैंकरों का फ्रेट महंगा हो रहा है, कम दूरी से आने वाला गल्फ क्रूड भारतीय खरीदारों के लिए आर्थिक रूप से अधिक आकर्षक हो सकता है।

2022 के बाद पूरी तरह बदला था तेल बाजार

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यूरोपीय बाजार से हटकर एशिया की ओर चला गया था। भारत ने इस मौके का फायदा उठाते हुए रूसी तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई और मॉस्को के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बन गया।

अब तस्वीर फिर बदल रही है। भारत मध्य पूर्व के साथ-साथ अमेरिका और अन्य स्रोतों से भी क्रूड खरीद बढ़ाकर अपने आयात स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।

नीति में ‘टर्न’ से ज्यादा कारोबारी गणित

मौजूदा परिस्थितियों से संकेत मिलता है कि भारत की रणनीति किसी एक देश से तेल खरीदने की नीति पर निर्भर रहने के बजाय कीमत, उपलब्धता, परिवहन लागत और जोखिम के आधार पर विकल्प चुनने की है।

रूसी तेल की छूट घटने, चीन की मांग बढ़ने और खाड़ी देशों से प्रतिस्पर्धी आपूर्ति उपलब्ध होने के कारण भारतीय रिफाइनरियां फिलहाल अपने खरीद समीकरण को फिर से संतुलित कर रही हैं। इसलिए रूस से खरीद में मौजूदा गिरावट को तत्काल किसी बड़े भू-राजनीतिक पॉलिसी टर्न के बजाय बाजार की बदलती परिस्थितियों और कारोबारी गणित का परिणाम माना जा सकता है।