
न्यूयॉर्क में OIC के जम्मू-कश्मीर संपर्क समूह ने आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन दोहराया; भारत ने संगठन की टिप्पणियों को अनुचित और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया
नई दिल्ली, 23 सितंबर। (SDNA) जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत और ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के बीच कूटनीतिक मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में OIC के जम्मू-कश्मीर संपर्क समूह की बैठक हुई, जिसमें संगठन ने कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के समर्थन को दोहराया।
OIC की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, संगठन के महासचिव इस्माइल औल्द शेख अहमद ने जम्मू-कश्मीर के संबंध में OIC की पूर्ववर्ती स्थिति को दोहराते हुए इसे दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। OIC ने क्षेत्र की मानवीय, मानवाधिकार और सुरक्षा स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की तथा 2019 के बाद उठाए गए कदमों को वापस लेने की मांग दोहराई।
भारत ने OIC की टिप्पणियों पर जताई आपत्ति
भारत के विदेश मंत्रालय ने OIC संपर्क समूह की संयुक्त विज्ञप्ति में भारत से संबंधित टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से खारिज किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, OIC को ऐसे मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है, जो भारत के आंतरिक विषय हैं। भारत ने इन टिप्पणियों को अनुचित और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है।
भारतीय पक्ष ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि राजनीतिक दावों या बार-बार दोहराए जाने वाले बयानों से भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस तरह के बयानों को लगातार समर्थन दिए जाने से OIC की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठते हैं।
OIC ने क्या कहा था?
OIC के जम्मू-कश्मीर संपर्क समूह की बैठक 21 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर न्यूयॉर्क में हुई थी। संगठन ने अपने आधिकारिक बयान में कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के समर्थन को दोहराया और इस रुख को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों से जोड़ा।
OIC ने क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को बढ़ाने, घटनाक्रम का पारदर्शी दस्तावेजीकरण करने और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर बनाए रखने की भी अपील की।
पाकिस्तान को लेकर भी भारत का जवाब
भारतीय प्रतिक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका का भी उल्लेख किया गया। भारत ने कहा कि OIC को पाकिस्तान की ओर से किए जाने वाले दावों के लिए मंच उपलब्ध कराने के बजाय आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान को आत्मनिरीक्षण की सलाह देनी चाहिए।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगाता रहा है, जबकि पाकिस्तान इन आरोपों को खारिज करता है। जम्मू-कश्मीर को लेकर दोनों देशों के बीच यह विवाद दशकों से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
पुराना विवाद, फिर सामने आई कूटनीतिक खींचतान
जम्मू-कश्मीर पर OIC की स्थिति नई नहीं है। संगठन ने पूर्व में भी अपने विभिन्न प्रस्तावों और बैठकों में कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया है। 2025 में भी OIC के संपर्क समूह ने इसी रुख को दोहराया था।
हालिया घटनाक्रम से एक बार फिर स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ व्यापक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत OIC की इस भूमिका को स्वीकार नहीं करता, जबकि OIC अपने आधिकारिक बयानों में जम्मू-कश्मीर पर अपनी पूर्व निर्धारित स्थिति को दोहराता रहा है।
