
भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान ने कहा—वर्तमान ढांचा बदलती वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं; स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की जरूरत
न्यूयॉर्क, 23 सितंबर (SDNA): संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधार की मांग को लेकर भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के विदेश मंत्रियों ने एक बार फिर साझा रुख सामने रखा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान हुई G4 बैठक में चारों देशों ने सुरक्षा परिषद के प्रतिनिधित्व, वैधता और प्रभावशीलता से जुड़े सवालों को उठाते हुए परिषद में जल्द सुधार की आवश्यकता बताई। जापान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में हुई और इसके बाद G4 मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी किया।
बदलती दुनिया के अनुरूप सुधार की मांग
G4 देशों का कहना है कि वर्तमान सुरक्षा परिषद का ढांचा कई दशक पुराना है और आज की भू-राजनीतिक परिस्थितियों को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करता। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों के बीच परिषद की संरचना में बदलाव आवश्यक हो गया है।
चारों देशों ने सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वकारी, जवाबदेह तथा प्रभावी बनाने पर जोर दिया। G4 पहले भी संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन को लेकर साझा मॉडल और प्रस्तावों का समर्थन करता रहा है।
स्थायी और अस्थायी दोनों सदस्य बढ़ाने पर जोर
G4 ने सुरक्षा परिषद की सदस्यता में विस्तार को सुधार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। समूह का रुख है कि विस्तार केवल अस्थायी सदस्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए।
चारों देशों ने विशेष रूप से अफ्रीका, एशिया-प्रशांत तथा लैटिन अमेरिका और कैरेबियन जैसे अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों की भूमिका बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। G4 के प्रस्तावित मॉडल में भी दोनों श्रेणियों के विस्तार और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का प्रावधान रखा गया है।
अफ्रीकी मॉडल का समर्थन
बैठक में G4 ने संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद सुधार को लेकर अफ्रीकी समूह द्वारा प्रस्तुत मॉडल का समर्थन भी दोहराया। अप्रैल 2026 में G4 ने अफ्रीकी मॉडल को आगे की चर्चा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा था कि इससे विभिन्न प्रस्तावों को मिलाकर एक ठोस सुधार मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
G4 ने अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) में अब तक हुई प्रगति की गति पर चिंता जताई है। समूह का कहना है कि लंबे समय से चल रही वार्ताओं को अब अधिक ठोस और परिणामोन्मुख प्रक्रिया में बदलने की आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद के सुधार को लेकर IGN प्रक्रिया में सदस्य देशों के बीच सदस्यता की श्रेणियों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और वीटो सहित कई मुद्दों पर अलग-अलग मत बने हुए हैं।
टेक्स्ट आधारित वार्ता आगे बढ़ाने की तैयारी
G4 देशों ने सुधार प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए विभिन्न समूहों और सदस्य देशों के साथ मिलकर साझा आधार तलाशने की बात कही। उनका जोर ठोस प्रस्तावों के आधार पर टेक्स्ट-आधारित बातचीत शुरू करने पर है, ताकि सुरक्षा परिषद के संभावित नए स्वरूप पर व्यावहारिक चर्चा हो सके।
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के विस्तार और अधिक संतुलित क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है। G4 के प्रस्तावित मॉडल में कुल 11 स्थायी और 14-15 अस्थायी सीटों का ढांचा प्रस्तावित किया गया है, जिसमें नए स्थायी सदस्यों के लिए अफ्रीका, एशिया-प्रशांत, लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन तथा पश्चिमी यूरोप एवं अन्य क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व का प्रावधान है।
वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर बढ़ती चर्चा
सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग ऐसे समय में सामने आई है जब संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और उसकी संस्थागत संरचना को बदलती वैश्विक शक्ति-संरचना के अनुरूप बनाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी हाल में कहा है कि 1945 की तुलना में आज दुनिया काफी बदल चुकी है और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है।
G4 की ताजा बैठक से स्पष्ट है कि भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान सुरक्षा परिषद सुधार की वार्ता को अधिक ठोस चरण में ले जाने और व्यापक क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व वाले ढांचे के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखने के पक्ष में हैं।
