
बड़े बैंकों ने जताई चिंता, AI एजेंट से शॉपिंग में धोखाधड़ी और डेटा लीक का जोखिम; ग्राहकों की सुरक्षा के लिए नए नियमों की मांग
नई दिल्ली, 23 सितंबर।
ऑनलाइन शॉपिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अब AI एजेंट केवल सामान की जानकारी देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे यूजर की जरूरत समझकर प्रोडक्ट खोजने और खरीदारी की प्रक्रिया में भी मदद कर सकते हैं। हालांकि, इसी बढ़ती सुविधा के साथ बैंकिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े नए खतरे भी सामने आने लगे हैं।
दुनिया के कई बड़े बैंकों ने AI आधारित शॉपिंग एजेंट्स को लेकर ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत बताई है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक NatWest, Bank of America, ING, Capital One, Commonwealth Bank of Australia और न्यूजीलैंड के ASB Bank समेत कई बैंकों ने AI आधारित ‘एजेंटिक कॉमर्स’ से जुड़े संभावित जोखिमों पर चिंता जताई है।
AI को खरीदारी की जिम्मेदारी देना कितना सुरक्षित?
AI शॉपिंग एजेंट का उद्देश्य ग्राहक की ओर से प्रोडक्ट तलाशना, विकल्पों की तुलना करना और कुछ मामलों में खरीदारी की प्रक्रिया को पूरा करना है। लेकिन बैंक अधिकारियों की चिंता यह है कि अगर AI ने गलत प्रोडक्ट चुन लिया, जरूरत से ज्यादा रकम खर्च कर दी या किसी संदिग्ध वेबसाइट अथवा भुगतान माध्यम का इस्तेमाल कर लिया, तो नुकसान ग्राहक को उठाना पड़ सकता है।
रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि ग्राहकों को अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि AI एजेंट से जुड़ी किसी गलती, धोखाधड़ी या विवाद की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी।
AI से आने वाली शॉपिंग बढ़ी
AI के जरिए ऑनलाइन खरीदारी की दिशा में लोगों की दिलचस्पी बढ़ने का संकेत ब्रिटिश रिटेलर John Lewis के आंकड़ों से भी मिलता है। कंपनी के अनुसार AI एजेंट्स से आने वाली सर्च का हिस्सा एक साल में 0.3 प्रतिशत से बढ़कर 2.5 प्रतिशत हो गया है। इससे संकेत मिलता है कि ग्राहक पारंपरिक सर्च के बजाय AI से सीधे खरीदारी संबंधी सलाह लेने की ओर बढ़ रहे हैं।
असली चिंता सिर्फ गलत प्रोडक्ट नहीं
बैंकों की चिंता केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि AI गलत सामान खरीद सकता है। इससे कहीं बड़ा मुद्दा पेमेंट और निजी वित्तीय जानकारी की सुरक्षा है।
रिपोर्ट के मुताबिक AI एजेंट ग्राहक से कार्ड संबंधी जानकारी मांगकर उसे सीधे किसी वेबसाइट पर दर्ज कर सकता है। इसके अलावा AI किसी ऐसे भुगतान विकल्प की ओर भी ले जा सकता है, जिसमें अपेक्षाकृत कमजोर उपभोक्ता सुरक्षा हो। ऐसी स्थिति में धोखाधड़ी होने पर ग्राहक के लिए पैसा वापस पाना या विवाद सुलझाना मुश्किल हो सकता है।
कंपनियां AI की सिफारिशों को प्रभावित करने की दौड़ में
AI शॉपिंग के बढ़ते इस्तेमाल ने रिटेल कंपनियों के बीच एक नई प्रतिस्पर्धा भी पैदा कर दी है। पहले कंपनियां Google जैसे सर्च इंजन में ऊपर आने के लिए SEO पर जोर देती थीं। अब उनका ध्यान इस बात पर भी है कि AI चैटबॉट जब किसी ग्राहक को खरीदारी की सलाह दे तो उनके प्रोडक्ट को प्राथमिकता मिले।
यानी आने वाले समय में ऑनलाइन बाजार में मुकाबला सिर्फ ग्राहक तक पहुंचने का नहीं, बल्कि AI के निर्णय तक पहुंचने का भी हो सकता है।
बैंक चाहते हैं AI लेनदेन की स्पष्ट पहचान
बैंकों के समूह ने AI आधारित कॉमर्स को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ उपायों की जरूरत बताई है। इनमें AI एजेंट के जरिए होने वाले लेनदेन की स्पष्ट जानकारी, AI द्वारा लिए गए खरीदारी संबंधी फैसलों में ज्यादा पारदर्शिता और ग्राहकों के डेटा की बेहतर सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
बैंकों का यह भी कहना है कि ग्राहकों और व्यापारियों को यह तय करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वे किस AI शॉपिंग सिस्टम का इस्तेमाल करना चाहते हैं। अलग-अलग AI आधारित कॉमर्स सिस्टम के बीच बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
सुविधा के साथ सावधानी भी जरूरी
AI एजेंट ऑनलाइन खरीदारी को तेज और आसान बना सकते हैं, लेकिन फिलहाल यह तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है और उसके अनुरूप उपभोक्ता सुरक्षा के मानक तथा नियम विकसित होने की प्रक्रिया में हैं। बैंकों की चेतावनी का मूल मुद्दा यही है कि AI को खरीदारी की जिम्मेदारी देने से पहले ग्राहक को यह समझना होगा कि AI को कौन-सी जानकारी दी जा रही है, वह किस वेबसाइट पर ले जा रहा है और भुगतान किस माध्यम से किया जा रहा है।
ऐसे में AI से शॉपिंग करने वाले ग्राहकों के लिए तकनीक की सुविधा के साथ वित्तीय और डेटा सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना भी महत्वपूर्ण होगा।
(SDNA)
