Saturday, October 10

24 घंटे में तीन मैचों का दबाव, फिर क्वार्टर फाइनल में उतरना पड़ा; पीवी सिंधु ने एशियाई खेलों के शेड्यूल पर उठाए सवाल

ओलंपिक पदक विजेता ने कहा- सिर्फ मानसिक तैयारी काफी नहीं, शरीर को भी रिकवरी के लिए समय चाहिए; हॉक-आई सुविधा नहीं मिलने पर भी जताई निराशा

नई दिल्ली। एशियाई खेलों में भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु का अभियान क्वार्टर फाइनल में चीन की चेन यूफेई के खिलाफ हार के साथ समाप्त हो गया। मुकाबले के बाद सिंधु ने टूर्नामेंट के शेड्यूल और खिलाड़ियों को मिलने वाले रिकवरी समय को लेकर अपनी चिंता खुलकर जाहिर की।

सिंधु के मुताबिक लगातार मुकाबलों के बीच पर्याप्त अंतर नहीं होने से खिलाड़ियों के लिए शारीरिक रूप से खुद को तैयार करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने खास तौर पर 24 घंटे के भीतर तीन मैच खेलने की स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताया।

एक दिन में दो मुकाबले, फिर क्वार्टर फाइनल

सिंधु ने शनिवार को दूसरे दौर का मुकाबला खेला था। इसके बाद तीसरे दौर का मैच रविवार तड़के करीब एक बजे समाप्त हुआ। इसके कुछ ही घंटों बाद रविवार दोपहर लगभग डेढ़ बजे उन्हें क्वार्टर फाइनल में कोर्ट पर उतरना पड़ा।

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इस तरह बेहद कम अंतराल में लगातार मुकाबले खेलने पड़े। सिंधु ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति को केवल मानसिक मजबूती के आधार पर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि लंबे और कठिन मुकाबलों के बाद शरीर को भी पर्याप्त आराम और रिकवरी की जरूरत होती है।

‘रिकवरी सबसे बड़ी प्राथमिकता’

सिंधु ने कहा कि एक दिन में दो मैच खेलने के बाद देर रात तक जागना और फिर अगली सुबह दोबारा कोर्ट पर उतरना खिलाड़ियों के लिए आसान नहीं होता। उनके अनुसार, जब मुकाबलों में लंबी रैलियां होती हैं तो मांसपेशियों और पैरों पर दबाव बढ़ता है और अगले मैच से पहले रिकवरी का समय महत्वपूर्ण हो जाता है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि खिलाड़ी मानसिक तौर पर अगले मुकाबले के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसका शरीर भी उसी स्तर पर प्रदर्शन के लिए तैयार हो।

प्रदर्शन पर पड़ा शेड्यूल का दबाव?

सिंधु ने मुकाबले को लेकर कहा कि कुल मिलाकर उनका खेल अच्छा रहा, लेकिन टूर्नामेंट का कार्यक्रम खिलाड़ियों की जरूरतों के हिसाब से बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकता था।

उनकी टिप्पणी का मुख्य बिंदु यह रहा कि बड़े बहु-खेल आयोजनों में केवल मुकाबलों की संख्या और आयोजन स्थल तय करना पर्याप्त नहीं है। खिलाड़ियों के बीच पर्याप्त अंतर, नींद, यात्रा और रिकवरी जैसे पहलू भी प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

हॉक-आई की सुविधा नहीं मिलने से भी नाराजगी

क्वार्टर फाइनल में कुछ लाइन कॉल बेहद करीबी रहे। सिंधु के कोर्ट पर हॉक-आई सुविधा उपलब्ध नहीं थी, इसलिए ऐसे फैसलों को चुनौती देने का विकल्प भी खिलाड़ियों के पास नहीं था।

बताया गया कि आयोजन स्थल के केवल कोर्ट नंबर एक और दो पर हॉक-आई की सुविधा लगाई गई थी, जबकि सिंधु का मुकाबला कोर्ट नंबर चार पर हुआ।

सिंधु ने इस व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें लगा कि कुछ शॉट लाइन पर गिरे थे और ऐसे महत्वपूर्ण मुकाबले में खिलाड़ियों को तकनीकी समीक्षा की सुविधा मिलनी चाहिए थी।

सिंधु की बात का व्यापक मतलब

सिंधु की प्रतिक्रिया केवल उनके व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं है। इसका संबंध बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में खिलाड़ियों के वर्कलोड, मैचों के बीच रिकवरी अंतराल और तकनीकी सुविधाओं के समान वितरण से भी जुड़ता है।

बैडमिंटन जैसे तेज खेल में लगातार मुकाबलों के बीच कम समय मिलने पर शारीरिक थकान प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। वहीं, करीबी लाइन कॉल के मामलों में तकनीकी समीक्षा उपलब्ध होने से निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ सकती है।

एशियाई खेलों जैसे बड़े मंच पर सिंधु की टिप्पणियां इस बहस को सामने लाती हैं कि प्रतियोगिता का शेड्यूल बनाते समय खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धात्मक तैयारी के साथ उनकी रिकवरी और आवश्यक तकनीकी सुविधाओं को कितना महत्व दिया जाना चाहिए।

(SDNA)