Saturday, October 10

500 किमी दूर तक वार की क्षमता! आर्मेनिया की ‘दिव्यास्त्र’ में दिलचस्पी से अजरबैजान क्यों परेशान?

भारतीय रक्षा तकनीक की बढ़ती चर्चा के बीच संभावित खरीद की खबर; Hoverit के मुताबिक ड्रोन 5 घंटे तक उड़ सकता है और 15 किलो पेलोड ले जाने में सक्षम

नई दिल्ली। भारत की स्वदेशी ड्रोन तकनीक को लेकर दक्षिण काकेशस क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। आर्मेनिया के भारतीय Divyastra Mk-1 लोइटरिंग म्यूनिशन में रुचि लेने की रिपोर्ट सामने आने के बाद अजरबैजान के रक्षा क्षेत्र से जुड़े मीडिया में इस संभावित सौदे के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक भारत या आर्मेनिया की सरकार की ओर से इस संभावित खरीद पर कोई आधिकारिक करार सार्वजनिक नहीं किया गया है।

आर्मेनिया ने किन देशों के ड्रोन पर विचार किया?

आर्मेनियाई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वहां की रक्षा व्यवस्था लंबी दूरी तक काम करने वाले हमलावर ड्रोन की क्षमता बढ़ाने के विकल्प तलाश रही है। इस प्रक्रिया में अमेरिका, फ्रांस, ईरान, यूक्रेन, इजरायल, भारत, चीन और रूस के ड्रोन सिस्टम पर विचार किए जाने की बात कही गई है।

इन्हीं रिपोर्टों में भारतीय Divyastra Mk-1 को उपयुक्त विकल्पों में शामिल किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि यह दावा अभी आधिकारिक खरीद आदेश या अनुबंध से पुष्ट नहीं हुआ है।

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क्या है Divyastra Mk-1 की खासियत?

लखनऊ स्थित Hoverit अपनी वेबसाइट पर Divyastra Mk-1 को एक स्वायत्त टैक्टिकल स्ट्राइक सिस्टम के रूप में प्रस्तुत करती है। कंपनी के अनुसार इसके प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • ऑपरेशनल रेंज: 500 किलोमीटर तक
  • फ्लाइट एंड्योरेंस: 5 घंटे तक
  • पेलोड क्षमता: 15 किलोग्राम तक
  • हमले की गति: 300 से 400 किलोमीटर प्रति घंटा
  • सिस्टम: ऑटोनॉमस
  • AI और स्वार्म क्षमता: उपलब्ध
  • भूमिका: निगरानी, टोही और सटीक स्ट्राइक सहित विभिन्न मिशन

कंपनी ने यह भी बताया है कि Divyastra Mk-1 का परीक्षण भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में किया जा चुका है।

अजरबैजान में क्यों उठ रहे सवाल?

अजरबैजान की रक्षा वेबसाइट Armiya.az ने आर्मेनिया की संभावित रुचि को लेकर एक विश्लेषण प्रकाशित किया है। रिपोर्ट में मुख्य चिंता इस बात को लेकर बताई गई है कि यदि 500 किलोमीटर तक की घोषित क्षमता वाला ऐसा सिस्टम आर्मेनियाई सैन्य ढांचे में शामिल होता है, तो क्षेत्र में लंबी दूरी के ड्रोन आधारित स्ट्राइक विकल्पों का दायरा बढ़ सकता है।

हालांकि, किसी हथियार प्रणाली की वास्तविक रणनीतिक उपयोगिता केवल उसकी अधिकतम रेंज से तय नहीं होती। उपलब्ध जानकारी के अनुसार तैनाती की जगह, खरीदी जाने वाली संख्या, कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क, खुफिया और लक्ष्य निर्धारण क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का वातावरण तथा पेलोड जैसे कारक भी उसके वास्तविक प्रभाव को प्रभावित करेंगे।

भारत-आर्मेनिया रक्षा सहयोग का नया अध्याय?

भारत और आर्मेनिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है। आर्मेनिया भारतीय पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सहित अन्य भारतीय रक्षा प्रणालियों का ग्राहक बन चुका है। ऐसे में Divyastra Mk-1 को लेकर सामने आई रिपोर्ट दोनों देशों के बढ़ते रक्षा-तकनीकी संपर्क की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है।

Hoverit Divyastra परिवार पर आगे भी काम कर रही है। कंपनी की ओर से Mk-1 और अन्य प्लेटफॉर्म को लेकर परीक्षण एवं विकास गतिविधियों की जानकारी सार्वजनिक की गई है।

अर्थ और विश्लेषण

इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू फिलहाल कोई पक्का रक्षा सौदा नहीं, बल्कि भारतीय स्वदेशी ड्रोन तकनीक की अंतरराष्ट्रीय मांग और दक्षिण काकेशस में उसकी रणनीतिक चर्चा है।

अगर भविष्य में आर्मेनिया और भारत के बीच Divyastra Mk-1 की वास्तविक खरीद का समझौता होता है, तो यह भारत के निजी रक्षा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात अवसर हो सकता है। दूसरी ओर, अजरबैजान की चिंता यह दिखाती है कि लंबी दूरी और स्वार्म क्षमता वाले ड्रोन अब क्षेत्रीय सैन्य संतुलन की चर्चा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि आर्मेनिया की संभावित खरीद की रिपोर्ट मौजूद है, लेकिन आधिकारिक अनुबंध, संख्या और डिलीवरी की पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस खबर को फिलहाल संभावित रक्षा सौदे के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि अंतिम खरीद के रूप में।

(SDNA)