Sunday, October 11

पन्ना के चिता सत्याग्रह के समर्थन में उतरी जनसंघर्ष समन्वय समिति

पुलिस कार्रवाई की जांच, मुआवजे और पुनर्वास को लेकर उठाई आवाज; प्रभावित परिवारों से तत्काल संवाद की मांग

भोपाल/पन्ना, 28 सितंबर 2026। पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों द्वारा चलाए जा रहे चिता सत्याग्रह को जनसंघर्ष समन्वय समिति, मध्यप्रदेश ने समर्थन दिया है। समिति ने केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय एवं रूंझ बांध और ललितपुर-सिंगरौली रेलमार्ग से प्रभावित परिवारों के मुद्दों को लेकर सरकार से न्यायपूर्ण मुआवजा, पारदर्शी पुनर्वास और तत्काल वार्ता की मांग की है।

समिति ने आरोप लगाया कि 27 सितंबर की देर रात पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई के दौरान आंदोलनकारियों को हटाने और हिरासत में लेने का प्रयास किया गया। समिति ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। समिति के मुताबिक, शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने वाले प्रभावित परिवारों के साथ बल प्रयोग के बजाय प्रशासन को बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

मुआवजे से आगे पुनर्वास की मांग

जनसंघर्ष समन्वय समिति का कहना है कि विस्थापन का असर केवल जमीन और मकान तक सीमित नहीं रहता। इससे परिवारों की आजीविका, सामाजिक संबंध, सामुदायिक जीवन और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान भी प्रभावित होती है। इसलिए पुनर्वास की प्रक्रिया को केवल आर्थिक मुआवजे तक सीमित न रखते हुए प्रभावित परिवारों के जीवन और रोजगार की पुनर्स्थापना से जोड़ा जाना चाहिए।

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समिति ने मांग की है कि सभी प्रभावित परिवारों का ग्रामसभा की भागीदारी से दोबारा सर्वे कराया जाए और परिवारवार तथा गांववार सूची सार्वजनिक की जाए। लंबित मुआवजा राशि का भुगतान करने के साथ भूमि की श्रेणी, परिसंपत्तियों के मूल्यांकन और पात्रता सूची से जुड़े मामलों की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए।

सुविधाओं के बिना विस्थापन पर आपत्ति

समिति ने कहा कि वैकल्पिक आवास के साथ पेयजल, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका की पर्याप्त व्यवस्था किए बिना परिवारों को विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए। खेती, पशुपालन, रोजगार और छोटे व्यवसायों से जुड़े परिवारों के लिए आजीविका बहाली की ठोस योजना तैयार करने की मांग भी की गई है।

मुआवजा, स्वामित्व और भुगतान से जुड़े विवादों के समाधान के लिए स्वतंत्र अपीलीय व्यवस्था बनाने तथा पात्र परिवारों को ग्रामसभा की खुली बैठक में शामिल करने की मांग भी समिति ने उठाई है।

पर्यावरणीय प्रभावों के आकलन पर जोर

परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी समिति ने सवाल उठाए हैं। उसने पन्ना टाइगर रिजर्व, जंगल, नदियों, जलस्रोतों और वन्यजीव गलियारों पर संभावित प्रभाव का स्वतंत्र एवं सार्वजनिक आकलन कराने की मांग की। साथ ही पर्यावरण और वन्यजीव संबंधी स्वीकृतियों में निर्धारित शर्तों के पालन की सामाजिक निगरानी की व्यवस्था किए जाने की बात कही है।

समिति ने आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने, आंदोलन स्थल पर बिजली, पानी, भोजन और चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रखने तथा सरकार, प्रभावित परिवारों और जनसंगठनों के बीच तत्काल त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित करने की मांग की है।

स्वतंत्र जांच समिति बनाने की मांग

जनसंघर्ष समन्वय समिति ने पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा है। समिति के अनुसार इसमें सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, भूमि-अधिकार विशेषज्ञ, पर्यावरणविद, महिला एवं आदिवासी प्रतिनिधि तथा प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और सिफारिशों के क्रियान्वयन के लिए समयसीमा तय करने की मांग भी की गई है।

प्रदेशभर में जनअभियान का आह्वान

समिति ने किसान, आदिवासी, महिला, श्रमिक, छात्र-युवा और पर्यावरण संगठनों से चिता सत्याग्रह के समर्थन में शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन, धरना, जनसुनवाई और प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया है।

समिति के विजय कुमार ने कहा कि परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के अधिकारों और पुनर्वास के सवालों का समाधान संवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों की मांगों पर बातचीत करे और मुआवजा, आवास तथा आजीविका से जुड़े मुद्दों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करे।

समिति ने यह भी मांग की है कि जब तक प्रभावित परिवारों के मुआवजे, वैकल्पिक आवास, आजीविका और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक जबरन विस्थापन और निर्माण संबंधी कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए।