Sunday, October 11

INDIA ब्लॉक की बैठक से अखिलेश यादव की दूरी, यूपी में सीट बंटवारे की तस्वीर पर बढ़ी नजर

30 सितंबर की दिल्ली बैठक में सपा अध्यक्ष नहीं होंगे शामिल; पार्टी प्रतिनिधि करेगा शिरकत, कांग्रेस-सपा के बीच सीटों को लेकर मतभेद चर्चा में

लखनऊ/नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का मुद्दा लगातार चर्चा में है। इसी बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का 30 सितंबर को दिल्ली में होने वाली INDIA ब्लॉक की बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अखिलेश की जगह समाजवादी पार्टी का वरिष्ठ प्रतिनिधि बैठक में शामिल होगा।

यह बैठक मुख्य रूप से चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों की संयुक्त रणनीति पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। ऐसे में अखिलेश की गैरमौजूदगी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ रही हैं।

व्यस्तता बताई गई वजह, सीट शेयरिंग पर भी नजर

रिपोर्टों के मुताबिक अखिलेश यादव ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपनी व्यस्तता की जानकारी दी है। राज्यसभा चुनाव से जुड़ी गतिविधियों और उत्तर प्रदेश में पार्टी के कार्यक्रमों के बीच उन्होंने बैठक में खुद शामिल होने के बजाय पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेजने का निर्णय लिया है।

📢 SD News Agency से जुड़ें और पाएं हर खबर का अपडेट अपने मोबाइल पर!

देश-दुनिया, राजनीति, समाज, व्यापार, प्रदेश और स्थानीय समाचारों की ताजा एवं महत्वपूर्ण खबरें सीधे अपने मोबाइल WhatsApp पर प्राप्त करते रहें।

📰 SD News Agency के WhatsApp ग्रुप से जुड़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और ग्रुप से जुड़ जाएं।

👉 WhatsApp Group से जुड़ने के लिए क्लिक करें:
SD News Agency WhatsApp Group से जुड़ें

SD News Agency — खबर वही, जो आपके लिए जरूरी है।

हालांकि, इसी समय कांग्रेस और सपा के बीच उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत भी महत्वपूर्ण दौर में है। कांग्रेस की ओर से अक्टूबर तक सीट शेयरिंग को अंतिम रूप देने की बात कही गई है, जबकि सपा की ओर से उम्मीदवारों की जीत की संभावना और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता देने की बात सामने आई है।

राहुल गांधी की भूमिका को लेकर भी चर्चा

अखिलेश यादव के बैठक में शामिल न होने के बाद कांग्रेस और सपा के शीर्ष नेतृत्व की संभावित आमने-सामने बातचीत को लेकर भी अटकलें तेज हुई हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे सीट बंटवारे पर जारी मतभेदों से जोड़कर देखा गया है। हालांकि, यह कहना कि अखिलेश का बैठक में नहीं जाना विशेष रूप से राहुल गांधी से मुलाकात से बचने के कारण है, अभी एक राजनीतिक अटकल है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हालिया रिपोर्टों में अखिलेश की ओर से व्यस्तता को कारण बताए जाने की बात सामने आई है।

कांग्रेस की सीटों को लेकर तैयारी

कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से बड़ी संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी के संकेत दिए गए हैं। कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि सीट बंटवारे पर अक्टूबर में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है और पार्टी कम से कम 150 सीटों पर दावा रखती है।

दूसरी ओर, सपा नेतृत्व उम्मीदवारों की जीत की संभावना और संबंधित क्षेत्रों में संगठनात्मक स्थिति को सीट बंटवारे का महत्वपूर्ण आधार मान रहा है। इसी वजह से दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या और चयन के फार्मूले को लेकर बातचीत अहम बनी हुई है।

2024 के साथ 2027 का गठबंधन समीकरण

सपा और कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। दोनों दलों ने मिलकर राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 43 सीटें जीती थीं—सपा को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। अब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच सीटों का नया फार्मूला तय होना बाकी है।

हाल के दिनों में दोनों दलों के नेताओं के बयानों से भी सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस की ओर से जल्द सीट समझौते की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है, जबकि सपा अपने संगठन और संभावित उम्मीदवारों के आधार पर सीटों पर चर्चा चाहती है।

अब आगे की बातचीत पर नजर

30 सितंबर की INDIA ब्लॉक बैठक में सपा की मौजूदगी रहेगी, लेकिन अखिलेश यादव स्वयं शामिल नहीं होंगे। ऐसे में बैठक के दौरान चुनाव आयोग और SIR जैसे मुद्दों पर विपक्षी दलों की संयुक्त रणनीति के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर भी नजर रहेगी।

अखिलेश यादव और कांग्रेस नेतृत्व के बीच आगे होने वाली बातचीत से ही यह स्पष्ट होगा कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दल सीट बंटवारे को किस फार्मूले पर आगे बढ़ाते हैं। फिलहाल सीटों की संख्या, उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति को लेकर बातचीत जारी है।