Saturday, October 10

PM DHARA: 1.86 लाख करोड़ से मजबूत होगा ग्रीन एनर्जी नेटवर्क, 135 GW नवीकरणीय ऊर्जा पहुंचाने की तैयारी

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III को मिला नया नाम; 50 GWh बैटरी स्टोरेज के साथ 51,126 सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइनों की योजना

(SDNA) नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026। देश में नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती क्षमता को बिजली ग्रिड से जोड़ने और उसके प्रभावी वितरण के लिए केंद्र सरकार ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (GEC-III) को नया नाम देते हुए PM DHARA के रूप में मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर को करीब 1,86,405 करोड़ रुपये की इस योजना को स्वीकृति दी।

PM DHARA यानी Developing Harmonized and Accelerated Renewable Energy Access का प्रमुख उद्देश्य देश में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए आवश्यक ट्रांसमिशन ढांचे को मजबूत करना है। योजना के तहत देशभर में 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

क्यों जरूरी हुई नई योजना?

सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन पारंपरिक बिजली संयंत्रों की तरह लगातार एक समान नहीं रहता। सौर ऊर्जा मुख्य रूप से दिन के समय उपलब्ध होती है, जबकि पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम और हवा की गति पर निर्भर करता है। ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ बिजली ग्रिड को भी अधिक लचीला और सक्षम बनाने की जरूरत बढ़ी है।

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योजना के तहत नई ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण के साथ मौजूदा नेटवर्क को अपग्रेड किया जाएगा। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों से बिजली को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाना है, जहां नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की क्षमता अधिक है।

51,126 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनें होंगी विकसित

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, योजना के तहत ग्रिड को आधुनिक बनाने, मौजूदा ट्रांसमिशन ढांचे को मजबूत करने और नई लाइनों के निर्माण पर जोर दिया जाएगा।

नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार, GEC-III के अंतर्गत 51,126 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनें, 2,28,903 MVA सबस्टेशन क्षमता और 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) विकसित करने की योजना है।

1.86 लाख करोड़ का बजट, 54,082 करोड़ की केंद्रीय सहायता

PM DHARA के लिए कुल 1,86,405 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें राज्य के भीतर ट्रांसमिशन सिस्टम विकसित करने के लिए 1,36,378 करोड़ रुपये और 50 GWh बैटरी स्टोरेज सिस्टम के लिए 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।

योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य राज्य के भीतर ट्रांसमिशन शुल्क का बोझ कम करने में मदद करना और नवीकरणीय बिजली की लागत को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है।

योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बैटरी स्टोरेज से मिलेगी अतिरिक्त बिजली संभालने में मदद

PM DHARA में शामिल 50 GWh का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से ऐसे समय में अतिरिक्त नवीकरणीय बिजली को संग्रहित किया जा सकेगा, जब उत्पादन मांग से अधिक हो।

बाद में सौर ऊर्जा का उत्पादन कम होने या बिजली की मांग बढ़ने पर इस संग्रहित ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे पीक आवर में बिजली आपूर्ति को संतुलित करने, ट्रांसमिशन नेटवर्क पर दबाव घटाने और नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने में मदद मिलने की उम्मीद है।

राजस्थान-गुजरात जैसे राज्यों से बिजली पहुंचाने पर जोर

देश में राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में सौर एवं पवन ऊर्जा की बड़ी क्षमता विकसित हुई है। इन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क पर दबाव भी बढ़ा है। PM DHARA का एक प्रमुख उद्देश्य उत्पादन वाले क्षेत्रों से बिजली की मांग वाले क्षेत्रों तक नवीकरणीय ऊर्जा के सुचारु हस्तांतरण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करना है।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर की अगली कड़ी

PM DHARA को पहले से चल रही ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर पहलों की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। GEC-I और GEC-II के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा वाले राज्यों में राज्य के भीतर ट्रांसमिशन नेटवर्क विकसित करने पर काम किया गया था।

देश में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार के साथ ट्रांसमिशन की जरूरत और बढ़ी है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए GEC-III की परिकल्पना की गई थी, जिसे अब PM DHARA के नाम से आगे बढ़ाया जाएगा।

प्रोजेक्ट लागू करने की जिम्मेदारी STU की

राज्य के भीतर आने वाली नई ग्रीनफील्ड ट्रांसमिशन परियोजनाओं को Tariff-Based Competitive Bidding (TBCB) के माध्यम से लागू किया जाएगा। ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर्स इन परिसंपत्तियों का निर्माण, स्वामित्व, संचालन और रखरखाव Build-Own-Operate-Maintain (BOOM) मॉडल के तहत करेंगे।

वहीं मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने और अपग्रेड करने वाले ब्राउनफील्ड कार्य कॉस्ट-प्लस आधार पर किए जाएंगे। योजना के क्रियान्वयन में State Transmission Utilities (STUs) प्रमुख एजेंसियों के रूप में काम करेंगी।