
शेयर खरीद-बिक्री के दस्तावेज, डीमैट और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर मुंबई ITAT ने करदाता के पक्ष में दिया फैसला
नई दिल्ली, 24 सितंबर (SDNA):
शेयर बाजार में करीब ₹70,000 के निवेश से लगभग ₹1.93 करोड़ का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन हासिल करने वाले मुंबई के एक निवेशक के मामले में आयकर विभाग और करदाता के बीच विवाद अब खत्म हो गया है। विभाग ने इस भारी मुनाफे को कथित रूप से संदिग्ध पेनी-स्टॉक लेनदेन से जुड़ा मानते हुए कर योग्य आय में जोड़ दिया था। हालांकि, मुंबई आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने उपलब्ध दस्तावेजों और लेनदेन के रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद यह अतिरिक्त आय हटाने का निर्देश दिया।
यह मामला संजय कुमार मेहता से संबंधित है और Assessment Year 2015-16 का है। ITAT के आदेश के बाद विभाग द्वारा की गई ₹1,93,30,395 की आय वृद्धि को हटाया गया।
2013 में खरीदे थे 35 हजार शेयर
मामले के अनुसार, मेहता ने अप्रैल 2013 में Toyam Industries Ltd. के करीब 35,000 शेयर ₹70,000 में खरीदे थे। शुरुआत में शेयर फिजिकल फॉर्म में उनके पास आए थे।
📢 SD News Agency से जुड़ें और पाएं हर खबर का अपडेट अपने मोबाइल पर!
देश-दुनिया, राजनीति, समाज, व्यापार, प्रदेश और स्थानीय समाचारों की ताजा एवं महत्वपूर्ण खबरें सीधे अपने मोबाइल WhatsApp पर प्राप्त करते रहें।
📰 SD News Agency के WhatsApp ग्रुप से जुड़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और ग्रुप से जुड़ जाएं।
👉 WhatsApp Group से जुड़ने के लिए क्लिक करें:
SD News Agency WhatsApp Group से जुड़ें
SD News Agency — खबर वही, जो आपके लिए जरूरी है।
बाद में अगस्त 2014 में उन्होंने अपने ब्रोकर के माध्यम से इन शेयरों को डीमैट खाते में ट्रांसफर कराया। इसके बाद सितंबर 2014 से फरवरी 2015 के बीच शेयरों की बिक्री बीएसई पर अलग-अलग भावों में की गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार बिक्री मूल्य लगभग ₹447 से ₹556 प्रति शेयर के बीच रहा।
पूरे पोर्टफोलियो में ₹2.14 करोड़ का LTCG
इन शेयरों सहित मेहता के पूरे शेयर पोर्टफोलियो से करीब ₹2.14 करोड़ का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन दर्ज हुआ। इसमें अकेले Toyam Industries के शेयरों से लगभग ₹1.93 करोड़ का लाभ शामिल था।
मेहता ने आयकर अधिकारियों के समक्ष अपने लेनदेन को वास्तविक बताते हुए संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत किए। उनका कहना था कि शेयरों की खरीद और बिक्री मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से हुई और लेनदेन पर Securities Transaction Tax (STT) भी लगाया गया था।
बिक्री से प्राप्त राशि ब्रोकर के माध्यम से उनके बैंक खाते में आई थी, जिसका उल्लेख बैंक रिकॉर्ड में भी मौजूद था।
आयकर विभाग को क्यों लगा मामला संदिग्ध?
आयकर विभाग की जांच में Toyam Industries को ऐसे शेयरों की सूची में शामिल किया गया था, जिनके संबंध में कथित तौर पर फर्जी या बोगस लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन तैयार किए जाने की जांच की जा रही थी।
आकलन अधिकारी का तर्क था कि कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और कारोबारी बुनियादी आंकड़े शेयर की कीमत में हुई इतनी बड़ी वृद्धि को सामान्य कारोबारी परिस्थितियों से पर्याप्त रूप से नहीं समझाते।
इसी आधार पर विभाग ने लेनदेन की वास्तविकता पर सवाल उठाते हुए लगभग ₹1.93 करोड़ की राशि को धारा 68 के तहत अघोषित नकद क्रेडिट के रूप में माना। बाद में CIT (Appeals) ने भी विभाग की इस कार्रवाई को बरकरार रखा।
ITAT के सामने करदाता ने रखे दस्तावेज
मामला जब मुंबई ITAT पहुंचा तो मेहता की ओर से शेयरों की खरीद और बिक्री से संबंधित विभिन्न दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
इनमें प्रमुख रूप से:
- शेयर खरीद से संबंधित रिकॉर्ड
- डीमैट स्टेटमेंट
- बैंक स्टेटमेंट
- ब्रोकर के कॉन्ट्रैक्ट नोट्स
- STT से संबंधित दस्तावेज
- शेयरों की बिक्री से प्राप्त रकम का बैंक रिकॉर्ड
शामिल थे।
करदाता की ओर से यह भी बताया गया कि शेयरों को बेचने से पहले वे एक वर्ष से अधिक समय तक उनके पास रखे गए थे, इसलिए लेनदेन को लॉन्ग-टर्म निवेश के रूप में घोषित किया गया था।
दस्तावेजों पर गौर करने के बाद बदला फैसला
मुंबई ITAT ने मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और करदाता की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों की समीक्षा की। ट्रिब्यूनल ने पाया कि शेयरों की खरीद-बिक्री और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन को समर्थन देने वाले दस्तावेज रिकॉर्ड पर मौजूद थे।
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ITAT ने आयकर विभाग द्वारा की गई ₹1,93,30,395 की अतिरिक्त आय वृद्धि को हटाने का निर्देश दिया।
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए क्या संकेत?
यह फैसला किसी भी शेयर में असाधारण रिटर्न को स्वतः वैध या अवैध घोषित नहीं करता। ऐसे मामलों में लेनदेन की वास्तविकता, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रेल, डीमैट विवरण, ब्रोकर दस्तावेज और लागू कर कानून जैसे पहलुओं का महत्व रहता है।
मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि जब किसी बड़े पूंजीगत लाभ पर सवाल उठता है, तो निवेशक के पास सुसंगत और सत्यापित लेनदेन रिकॉर्ड होना महत्वपूर्ण हो सकता है।
मुंबई ITAT का यह निर्णय इसी विशेष मामले के तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आया है।
(SDNA)



