Saturday, October 10

Judiciary & Legal

कैंसर की दवा पर 10 गुना MRP! सुप्रीम कोर्ट ने कीमतों पर उठाए तीखे सवाल, कहा- मरीजों पर इतना बोझ क्यों?
Health, Judiciary & Legal, Natioanal, Supreme Court

कैंसर की दवा पर 10 गुना MRP! सुप्रीम कोर्ट ने कीमतों पर उठाए तीखे सवाल, कहा- मरीजों पर इतना बोझ क्यों?

नई दिल्ली। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के इलाज का खर्च पहले ही परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में भारी अंतर का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मंगलवार को कैंसर की दवाओं की कीमतों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने एक ऐसी दवा का उदाहरण सामने आने पर गंभीर सवाल उठाया, जिसकी लागत करीब ₹2,700 बताई गई, जबकि उस पर ₹27,000 की MRP दर्ज थी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान दवाओं की कीमतों और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर तीखी टिप्पणियां कीं। अदालत ने सवाल किया कि जब किसी दवा की कीमत और उस पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य के बीच इतना बड़ा अंतर हो सकता है, तो इसका असर आखिर किस पर पड़ता है। सरकारी योजनाओं में खर्च का बोझ किस पर? सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी मरीज...
कर्ज की वसूली हो, लेकिन कानून की हद में
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कर्ज की वसूली हो, लेकिन कानून की हद में

सर्वोच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला : वाहन जब्ती में मनमानी, बलप्रयोग और अनुचित समय पर कार्रवाई पर कड़ा संदेश — डॉ. सत्यवान सौरभ (SDNA) कर्ज लेना एक आर्थिक अनुबंध है। कर्ज की राशि निर्धारित समय पर वापस न मिलने की स्थिति में बैंक या वित्तीय संस्था को अपनी बकाया राशि वसूलने का अधिकार है। लेकिन यह अधिकार असीमित नहीं है। कर्ज की वसूली के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया कानून, ऋण समझौते और भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए। किसी व्यक्ति के ऊपर कर्ज बकाया होने का अर्थ यह नहीं है कि वित्तीय संस्था उसके साथ बलपूर्वक, अपमानजनक या मनमाने तरीके से व्यवहार कर सकती है। सर्वोच्च न्यायालय का हालिया फैसला इसी महत्वपूर्ण सिद्धांत को रेखांकित करता है। मामला उत्तर प्रदेश के हरि दत्ता शर्मा से संबंधित है। उन्होंने वर्ष 2019 में टाटा एसएफसी 407 ट्रक खरीदने के लिए चोलामंडलम इन्व...