टूटे रिश्ते जोड़ना ही सच्चा धर्म, संवत्सरी पर मिला मैत्री का संदेश
साध्वी उपेन्द्रयशाश्रीजी ने कहा—अहंकार, क्रोध और वैर-विरोध छोड़कर सभी जीवों से मैत्री स्थापित करना ही संवत्सरी की वास्तविक साधना
उज्जैन | (सद्वार्ता)
आचार्य श्री विजयहीर सूरिश्वरजी बड़ा उपाश्रय एवं श्री केसरियानाथ खाराकुआं मंदिर में संवत्सरी पर्व श्रद्धा, आत्मचिंतन और क्षमाभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर साध्वी उपेन्द्रयशाश्रीजी म.सा. ने संवत्सरी को विश्व मैत्री का पवित्र पर्व बताते हुए कहा कि यह पर्व रिश्तों में आई दूरियों और मनमुटाव की दीवारों को हटाकर एक-दूसरे के करीब आने की प्रेरणा देता है।
साध्वीजी ने कहा कि भाई-भाई, सास-बहू, देवरानी-जेठानी, पिता-पुत्र अथवा पड़ोसियों के बीच यदि किसी कारण से वैर-विरोध या मनमुटाव उत्पन्न हो गया है, तो संवत्सरी का सच्चा संदेश उस दूरी को समाप्त करना है। केवल पर्व मनाने से धर्म की पूर्णता नहीं होती, बल्कि मन से अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और प्रतिशोध ...










